डिलेवरी करने वालों की आड़ में अपराधियों की हुई घर-घर तक पहुंच

राजस्थान में ऑन लाईन शॉपिंग में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ोतरी हो रही है। डिलीवरी देने के काम के कारण इनकी घर-घर तक पहुंच हो गई है। इनकी आड़ में अपराधियों ने भी घरों तक पहुंच बना ली है। पुलिस वैरिफिकेशन नहीं होने के कारण अपराधियों का पता नहीं चलता।

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Mukesh Sharma
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Photograph: (the sootr)

News In Short

  • जयपुर पुलिस ने शुरु किया  वैरिफिकेशन अभियान 
  • जयपुर में करीब 3 से 4 लाख वर्कर,नेपाल के युवक भी काम कर रहे 
  • अब तक 16,500 डिलेवरी करने वालों का हुआ  वैरिफिकेशन
  • 38 डिलेवरी करने वालों के खिलाफ मिले पुरान आपराधिक मुकदमे 

News In Detail 

राजस्थान में ऑनलाइन शॉपिंग और फूड डिलीवरी का चलन दिन दूनी और रात चौगुनी गति से बढ़ रहा है। आज हर घर में ऑन लाईन खरीददारी होती है। इसके लिए हर दिन लाखों  डिलीवरी बॉय घरों तक पहुंचते हैं। पिछले दिनों पुलिस को कुछ अपराधियों के डिलीवरी बॉय बनकर शहर में काम करने की सूचना मिलने से चिंता हो गई है।   

पुलिस ने शुरु किया वैरिफिकेशन अभियान

डिलीवरी बॉय के भेष में अपराधियों के शहर में घूमने की सूचना ने पुलिस को चिंता में डाल दिया। पुलिस ने गिग वर्करों के वैरिफिकेशन के लिए अभियान शुरु कर दिया। हालांकि अभी तक मात्र 16,500 वर्कर का ही वैरिफिकेशन हुआ है। अभियान के दौरान 38 वर्कर ऐसे मिले जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। इनके खिलाफ चोरी,नकबजनी और मारपीट जैसे गंभीर मामले है। गंभीर यह है कि यह लोग सीधे घरों तक पहुंचते हैं। इसलिए आॅन लाईन सामान मंगवाने वालों को बेहद सावचेत रहने की आवश्यकता है।

हर हाल में वैरिफिकेशन जरुरी

पुलिस का कहना है कि डिलीवरी करने वाले अकेले बुजुर्गों,महिलाओं और बच्चों के संपर्क में आते हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई आपराधिक मानसिकता वाला व्यक्ति इस काम में शामिल न हो। इस​लिए कंपनियों से पूरा डाटा मंगवाकर जांच की जा रही है  । 

पुलिस की निगहेबानी में है

आपराधिक पृष्ठभूमि वाले गिग वर्कर्स पर पुलिस ने निगाह रखी हुई है और उन्हें पाबंद किया जा रहा है । इसके अतिरिक्त संबंधित कंपनियों को भी सूचना देकर कार्रवाई करने को कहा है। 

तेज होगा अभियान

फिलहाल 16 हजार से ज्यादा डिलीवरी बॉय का वैरिफिकेशन हुआ है और आने वाले दिनों में पूरे जयपुर शहर में बड़े स्तर पर वेरिफिकेशन अभियान चलेगा। पुलिस का मानना है कि यह कदम भविष्य में किसी बड़ी वारदात को रोकने में मददगार साबित होगा। 

अकेले जयपुर में इस समय करीब 3 से 4 लाख गिग वर्कर काम कर रहे हैं। इनमें सवाईमाधोपुर,दौसा,करौली व टोंक जिलों के सर्वाधिक वर्कर हैं। इनके अलावा नेपाल के युवक भी जयपुर में काम कर रहे है। इनका पुलिस वैरिफिकेशन करवाने की जिम्मेदारी कंपनी की है,लेकिन शायद ही कोई कंपनी करवाती हो। इसलिए राजस्थान प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण और कल्याण) अधिनियम-2023 को प्रभावी रुप से लागू करना जरुरी है। हम लंबे समय से इसकी मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। 

कृष्णकुमार चौधरी,
महासचिव,राजस्थान गिग एंड ऐप बेस्ड वर्कर यूनियन

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