पिपलोदी स्कूल हादसा जांच रिपोर्ट में लापरवाही उजागर, 12 पर एक्शन
समझें क्या है पूरा मामला
- पिपलोदी स्कूल हादसे के 1 साल बाद बड़ा एक्शन, 12 पर गाज।
- 7 मासूमों की मौत के जिम्मेदार 7 अफसरों की सैलरी रुकी।
- जर्जर स्कूल पर हुई लापरवाही, 5 शिक्षकों के भी इंक्रीमेंट रोके।
- अब किसान के घर चल रहा स्कूल, 90 बच्चे ले रहे शिक्षा।
झालावाड़ के पिपलोदी सरकारी स्कूल में हुए दर्दनाक हादसे की जांच रिपोर्ट आ गई है। जांच में अधिकारियों और शिक्षकों की घोर लापरवाही उजागर हुई है।
जर्जर भवन की सुध न लेने से दीवार ढह गई थी। इस हादसे में 7 बच्चों की मौत हो गई थी और 21 बच्चे घायल हुए थे। अब विभाग ने 7 अफसरों और 5 शिक्षकों की वेतन वृद्धि रोक दी है।
पिपलोदी हादसे के जिम्मेदारों पर कार्रवाई
राजस्थान के झालावाड़ जिले में पिपलोदी सरकारी स्कूल हादसे के एक साल बाद जांच रिपोर्ट आई है। जांच में सामने आया कि अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभाई।
विभाग ने झालावाड़ में पदस्थापित रहे 7 अधिकारियों और 5 शिक्षकों को दोषी माना है। इन सभी की वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) रोकने के आदेश जारी किए गए हैं।
हादसे के बाद संविदा जेईएन (Junior Engineer) पारस कुमार गुप्ता को बर्खास्त किया जा चुका था। 25 जुलाई को स्कूल की दीवार गिरने से 7 मासूम बच्चों की जान चली गई थी। हादसे में 21 बच्चे गंभीर रूप से घायल भी हुए थे।
अफसरों और शिक्षकों ने बरती लापरवाही
जांच रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने जर्जर स्कूल भवन का समय पर निरीक्षण नहीं किया। जिला स्तर पर जर्जर भवनों की सूची बनाते समय इस स्कूल का नाम शामिल नहीं कराया गया।
डीईओ (District Education Officer) मुख्यालय नरसो मीणा के 3 इंक्रीमेंट रोके गए हैं। सीडीईओ (CDEO) रामसिंह मीणा और एडीईओ (ADEO) हंसराज मीणा के 2-2 इंक्रीमेंट रोके गए।
पीईईओ (PEEO) राधेश्याम मीणा, कार्यवाहक पीईईओ प्रभुलाल कारपेंटर, एईएन (AEN) कैलाशचंद पाटोदिया और सीबीईओ (CBEO) प्रमोद कुमार के 2-2 इंक्रीमेंट रोके गए हैं।
एडीपीसी (ADPC) कल्याणमल वर्मा का 1 इंक्रीमेंट रोका गया है। शिक्षक मीना गर्ग, जावेद अहमद, रामविलास, कन्हैयालाल सुमन और बद्रीलाल लोधा के भी 2-2 इंक्रीमेंट रोके गए हैं। इन्होंने समय रहते जर्जर भवन की सूचना उच्च अधिकारियों को नहीं दी थी।
लंबे समय से जर्जर था स्कूल भवन
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि स्कूल भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में था। भवन के पीछे की दीवार काफी कमजोर हो चुकी थी।
पानी निकासी के पाइप टूटे हुए थे। दीवार बिना प्लास्टर की ईंट और मिट्टी से बनी थी। लगातार पानी के रिसाव के कारण दीवार की नींव कमजोर हो गई थी।
इसके बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने भवन का निरीक्षण नहीं किया। न ही इसकी मरम्मत के लिए कोई कदम उठाया गया।
किसान के घर में पढ़ रहे 90 बच्चे
हादसे के बाद सरकार ने कोलूखेड़ी मार्ग पर नए भवन निर्माण की घोषणा की थी। 1.25 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह भवन एक साल बाद भी तैयार नहीं हो सका है।
भवन में आरसीसी (RCC – Reinforced Cement Concrete) सहित कई निर्माण कार्य अभी भी बाकी हैं। नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन बच्चों के पास बैठने की जगह नहीं है।
ऐसे में गांव के किसान मोरसिंह ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। उन्होंने अपना घर बच्चों की पढ़ाई के लिए दे दिया है। फिलहाल इसी घर में 90 से अधिक बच्चे निशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं।
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