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Photograph: (the sootr)
Jhalawar. राजस्थान के झालावाड़ में साल 2025 में हुए स्कूल हादसे में मृतक सात बच्चों की याद में अंतरिक्ष में एक घोटा ग्रह स्थापित करने की तैयारी हो गई है। नासा को इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है जिसे स्वीकार कर लिया गया है। इस गृह का नाम "प्रमिश्का" रखने का प्रस्ताव दिया गया है। इसमें पिपलोदी हादसे में मारे गए सात बच्चों के नामों के पहले अक्षरों से लिया गया है। यह नाम उनकी स्मृति में हमेशा के लिए सूर्य की परिक्रमा करता रहेगा। इस नाम के जरिए उनका योगदान और उनके परिवार के लिए उन्हें सम्मान दिया जाएगा।
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क्षुद्रग्रह खोजने वाले छात्रों की लिखित सहमति
पचपहाड़ गवर्मेंट महात्मा गांधी स्कूल के शिक्षक डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि क्षुद्रग्रह खोजने वाले छात्रों ने अपनी लिखित रूप में सहमति दे दी है। उनके द्वारा खोजे गए क्षुद्रग्रह (2021 DB5) का नाम पिपलोदी हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की स्मृति में रखा जाए।
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प्रमिश्का के प्रस्तावित नाम की यह है जानकारी
इसका प्रस्तावित नाम 'प्रमिश्का' है, जो 7 दिवंगत बच्चों पायल (13), प्रियंका (12), मीना (12), हरीश (11), कुंदन (10), कान्हा (7) और सतीश (8) के नामों के शुरुआती अक्षरों को जोड़कर बनाया है। इससे यह नाम अंतरिक्ष मे लाखों वर्षों तक (लगभग हमेशा के लिए) अमर हो जाएगा। इस बात की पुष्टि नासा द्वारा कर दी गई है और इन्हें परमानेंट नंबर अलॉट भी कर दिया है।
छात्रों ने की 4 क्षुद्रग्रहों की खोज
झालावाड़ महात्मा गांधी सरकारी स्कूल टीचर डॉ. दिव्येंदु सेन के सानिध्य में स्कूली वैज्ञानिक छात्रों ने वर्ष 2020-21 में चार क्षुद्रग्रहों की खोज की थी। ये चारों क्षुद्रग्रहों ने सूर्य का एक चक्कर पूरा कर लिया है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थायी नंबर मिल गया है। इससे उनकी कक्षाएं पूरी तरह स्थापित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चुकी है।
टीचर डॉ. दिव्येंदु के मार्गदर्शन में क्षुद्रग्रहों को खोजा
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय उन्हेल की छात्रा सुगंधा कुमारी, कोमल कुंवर, हर्षिता डांगी और संजय कुमार ने इन क्षुद्रग्रहों की खोज की है। अब ये स्टूडेंट्स अलग-अलग कॉलेजों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। डॉ. दिव्येंदु सेन के मार्गदर्शन में स्टूडेंट्स ने IASC–NASA एस्टेरॉयड सर्च कैंपेन में भाग लिया था। अब तक 100 से अधिक स्टूडेंट्स इस कार्यक्रम में भाग ले चुके हैं। सामूहिक रूप से 12 मेन-बेल्ट क्षुद्रग्रहों की खोज कर चुके हैं।
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यह था झालावाड़ स्कूल हादसा
पिपलोदी गांव में 25 जुलाई 2025 को भारी बारिश के दौरान महात्मा गांधी स्कूल की छत गिर गई थी। इस हादसे में सात बच्चों की जान चली गई, जबकि 27 अन्य छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद से राज्य सरकार और समाज में कई पहल की गईं ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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IASC-NASA ऐस्टेरॉयड सर्च कैंपेन में खोजे गए ग्रह
यह ग्रह "प्रमिश्का" 2020-21 में IASC-NASA ऐस्टेरॉयड सर्च कैंपेन के दौरान खोजा गया था। इस अभियान में राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल, उन्हेल के छात्रों ने भाग लिया था। इन छात्रों ने डॉ. दिव्येंदु सेन के मार्गदर्शन में इस अभियान में चार क्षुद्र ग्रहों की खोज की थी। इनमें से एक ग्रह को पिपलोदी हादसे के दिवंगत बच्चों के नाम पर रखने का प्रस्ताव दिया गया।
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रह नामकरण का महत्व
डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि विज्ञान तभी सार्थक बनता है जब वह जीवन को छूता है। "प्रमिश्का" नाम पिपलोदी के बच्चों के नामों के संयुक्त शुरुआती अक्षरों से बनाया गया है। इस नाम को अंतरिक्ष में भेजकर हम चाहते हैं कि उनकी स्मृति हमेशा सूर्य की परिक्रमा करती रहे।
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अंतरराष्ट्रीय मान्यता और ग्रह का स्थायी नंबर
इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलेबोरेशन (IASC) से प्राप्त मेल में बताया गया कि 2020-21 के दौरान खोजे गए चारों क्षुद्र ग्रहों ने अपनी पूरी कक्षा पूरी कर ली है। इनमें से तीन ग्रहों को इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमिकल यूनियन द्वारा स्थायी नंबर मिल चुके हैं। यह ग्रह अब वैज्ञानिक साहित्य का स्थायी हिस्सा बन गए हैं और इनकी कक्षाएं पूरी तरह से प्रमाणित हैं।
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युवाओं की प्रेरणा और श्रद्धांजलि
झालावाड़ के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी राम सिंह मीणा ने इस कदम की सराहना करते हुए इसे सरकारी स्कूलों के छात्रों और उनके मार्गदर्शकों के लिए एक प्रेरणादायक कदम बताया। उन्होंने कहा, "यह साबित करता है कि सरकारी स्कूलों के छात्र भी अपने मार्गदर्शकों के साथ वैज्ञानिक अध्ययन और अंतरिक्ष अन्वेषण में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
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मुख्य बिंदू:
- नासा ने अंतरिक्ष में गृह को दिया 'प्रमिश्का' नाम, पिपलोदी गांव में हुए स्कूल हादसे में मारे गए सात बच्चों की याद में रखा गया है।
- ग्रह का नाम उन सात बच्चों के नामों के पहले अक्षरों से लिया गया है: पायल, प्रियंका, मीना, हरीश, कुंदन, कान्हा, और सतीश।
- यह नामकरण प्रस्ताव IASC और NASA द्वारा स्वीकार किया गया है और नामकरण प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार की जाएगी।
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