अरावली में खनन का बढ़ता संकट : लगातार बढ़ रहे विवाद, पर्यावरण के नुकसान की ओर इशारा
Jaipur. राजस्थान में अरावली पर्वतमाला क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में अवैध खनन में तेजी आई है। आंकड़ों के अनुसार, यहां 1,230 से अधिक खनन पट्टे दिए गए हैं, जिनमें से अधिकांश विवादित हैं। यह खनन पट्टे अरावली पर्वत प्रणाली के 17,393 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं।
इन पट्टों पर अक्सर कानूनी विवाद होते रहते हैं और कई मामलों में अदालतों में लंबित रहते हैं। कुछ खदानें बंद हो चुकी हैं, जबकि कई अभी भी संचालित हो रही हैं।
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खनन का दवाब और विवाद
अरावली पर्वत में खनन का सबसे अधिक दबाव राजसमंद जिले पर है, जहां 540 से अधिक खनन पट्टे हैं। इसके बाद उदयपुर (162 पट्टे), जयपुर (139 पट्टे) और अलवर, सिरोही तथा भीलवाड़ा जिलों में 250 से अधिक खनन पट्टे हैं। इनसे साफ है कि अरावली क्षेत्र में खनन कितना गहरा है।
राजस्थान खनन विभाग ने नवंबर, 2025 में 126 नए खनन पट्टों के लिए अधिसूचना जारी की थी, जिनमें से 50 पट्टे अरावली जिलों में और 76 पट्टे अरावली क्षेत्र के बाहर स्थित हैं।
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नए खनन पर रोक का प्रभाव
केंद्र सरकार ने अरावली क्षेत्र में नए खनन पट्टों पर प्रतिबंध लगा दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पुराने खनन पट्टे रद्द हो गए हैं। नए प्रतिबंध से पुरानी खनन अनुमतियों को रद्द नहीं किया जाता है, जिससे राजस्थान में सैकड़ों पट्टे अब भी जारी हैं।
खनन के चलते पर्यावरणीय क्षति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है, जिनमें से कई स्थानों पर क्षति अपूरणीय है। पहाड़ खोखले हो गए हैं, वन क्षेत्र कम हो गया है और प्राकृतिक जल निकासी प्रणालियां बाधित हो चुकी हैं।
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आगे की दिशा और समाधान
खनन के इस मुद्दे को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान केवल प्रतिबंधों से नहीं, बल्कि सख्त निगरानी और प्रभावी पर्यावरणीय संरक्षण से हो सकता है। यदि अरावली पर्वतमाला को बचाना है, तो खनन कार्यों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। साथ ही पुराने खनन पट्टों को नियंत्रित करने और अवैध खनन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
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खास बातें
- अरावली में खनन का बढ़ता संकट। अरावली क्षेत्र में 1,230 से अधिक खनन पट्टे दिए गए हैं, जो करीब 17,393 हेक्टेयर में फैले हुए हैं।
- नए खनन पट्टों पर प्रतिबंध लगाने का मतलब यह नहीं है कि पुराने पट्टे रद्द हो जाएंगे, वे अभी भी जारी हैं। अवैध खनन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
- खनन के कारण पहाड़ खोखले हो गए हैं, वन क्षेत्र कम हुआ है। जल निकासी प्रणालियां बाधित हो चुकी हैं, जिससे पर्यावरणीय क्षति हो रही है।