बिहार चुनाव के बाद राजस्थान में दिखेगा बदलाव, अनुभवी और नए चेहरों को मिल सकती है सरकार में जगह

Rakesh Sharma | Nov 08, 2025, 16:55 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में मंत्रिमंडल फेरबदल में बदलाव की संभावना। कामकाज के रिपोर्ट कार्ड से कुछ की छुट्टी तो कुछ का होगा प्रमोशन। पंचायत एवं निकाय चुनाव में मैसेज देने के लिए जातिगत और क्षेत्रवाद फैक्टर भी दिखेगा। वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को भी मिल सकता है मौका।

Jaipur. बिहार चुनाव के साथ ही राजस्थान में मंत्रिमंडल फेरबदल होने की संभावना है। फिलहाल भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व बिहार चुनाव में व्यस्त है। बिहार चुनाव नतीजों के बाद राजस्थान में भी फेरबदल की संभावना है। सत्ता-संगठन के माध्यम से कामकाज की रिपोर्ट केन्द्रीय नेतृत्व के पास है।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की मुलाकातें हो चुकी हैं। इन मुलाकातों के दौरान सत्ता-संगठन के कामकाज, मंत्रियों की रिपोर्ट, मंत्रिमण्डल फेरबदल, राजनीतिक नियुक्तियों पर चर्चा हो गई है।



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दिल्ली में बन चुकी है सहमति

केन्द्रीय नेतृत्व की ओर से फेरबदल में शामिल होने वाले विधायकों, हटाए जाने वाले मंत्रियों के नामों पर करीब-करीब सहमति दी जा चुकी है। साथ ही राजेन्द्र राठौड़, सतीश पूनियां जैसे वरिष्ठ नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियों की भी हरी झंडी मिल चुकी है।



बताया जा रहा है कि बिहार चुनाव के बाद राजस्थान में भी गुजरात की तर्ज पर सरकार का चेहरा बदला जाएगा। फेरबदल में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खेमे के समर्थक विधायकों को भी मौका मिल सकता हैं। वहीं वैश्य समाज के साथ पिछड़ा वर्ग और एससी वर्ग के मजबूत नेताओं को मंत्रिमण्डल में मौका मिल सकता है।



रिपोर्ट कार्ड तैयार, कुछ होंगे आउट

दो साल के भाजपा सरकार के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी केन्द्रीय नेतृत्व के पास है। इसमें सत्ता और संगठन दोनों के कामकाज की रिपोर्ट है। प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से कामकाज की रिपोर्ट ली गई है, तो केन्द्रीय नेतृत्व ने अपने स्तर पर भी सत्ता-संगठन के कामकाज की पड़ताल करवाई है।



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हर स्तर पर ली गई है रिपोर्ट

सर्वे कंपनियों और आईबी से भी रिपोर्ट ली गई है। सरकार और संगठन की मीडिया रिपोर्ट भी केन्द्रीय नेतृत्व के पास है। खासकर मंत्रियों के कामकाज को लेकर। कुछ मंत्रियों के बड़बोलेपन से सरकार की किरकिरी सामने आ चुकी हैं। एकाध मंत्रियों के कामकाज में शिथिलता और उत्साह नहीं होने की रिपोर्ट भी है। कुछ मंत्री के पास भारी-भरकम विभाग है, जिनमें कटौती हो सकती है।



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काफी बदलाव दिखेगा

राजनीतिक नियुक्तियों के लिए सत्ता और संगठन पर बराबर का दबाव है। सरकार को दो साल होने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक प्रमुख बोर्ड और आयोग में नाममात्र की नियुक्तियां हुई हैं। कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता राजनीतिक नियुक्तियों की राह देख रहे हैं। वे भी सत्ता और संगठन तक अपनी बात कई बार कह चुके हैं। माना जा रहा है कि राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सीएम भजनलाल शर्मा ने पीएम मोदी के सामने प्रदेश के कामकाज और नेताओं को लेकर रिपोर्ट पेश की है।



सीएम ने दिया है फीडबैक

संगठन की गतिविधियों और कार्यक्रमों को लेकर फीडबैक दिया है। पीएम मोदी से मुलाकात की वजह सामने नहीं आती हैं। मुख्यमंत्री, मंत्री और नेता उसे शिष्टाचार भेंट ही बताते हैं, लेकिन इन मेल-मुलाकातों के कयास भी होते हैं। जल्द ही राजस्थान में काफी बदलाव देखने को मिलेगा। चाहे वह मंत्रिमंडल फेरबदल के जरिए देखने को मिले या फिर राजनीतिक नियुक्तियों के माध्यम से। गुजरात की तर्ज पर बड़ा बदलाव देखा जा सकता है।



फेरबदल में समीकरण भी अहम

राजस्थान में अगले साल से पंचायत और निकाय चुनाव होने वाले हैं। पंचायत और निकाय चुनाव में देरी के चलते इन संस्थाओं में प्रशासक लगाने पड़े हैं, जिसे लेकर भी स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों और लोगों में खासी चर्चा है। ऐसे में चुनाव से पहले सरकार को मंत्रिमंडल फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियां करना जरूरी हो गया है। यह भी तय है कि मंत्रिमंडल बदलाव में निकाय चुनाव को देखते हुए जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधा जाएगा।



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दी जाएंगी राजनीतिक नियुक्तियां

जातिगत समीकरण भी साधे जाने हैं। ऐसा नहीं होने पर चुनाव में यह मुद्दा बन सकता है। छह मंत्री और बनाए जाने हैं। ऐसे में उन क्षेत्रों के विधायकों का नम्बर मंत्रिमंडल में आ सकता है, जिनकी सरकार में भागीदारी नहीं के बराबर है। साथ ही जातिगत फैक्टर के हिसाब से मंत्री बनाए जा सकते हैं। उन्हें राजनीतिक नियुक्तियां भी दी जा सकती है।



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पीएम मोदी से मुलाकात के मायने

दीपावली के बाद सीएम शर्मा दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री मोदी समेत अन्य नेताओं से मुलाकात की। इसे दीपावली के बाद की शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे मंत्रिमंडल फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों से जोड़कर देखा गया है। मुख्यमंत्री शर्मा की तीन महीने में प्रधानमंत्री मोदी से यह तीसरी मुलाकात है। यह मुलाकात संगठन और सरकार दोनों में संतुलन साधने की कोशिश का हिस्सा बताई जा रही है।



दिल्ली तक भागदौड़

सरकार गठन के बाद से बीस सूत्री कार्यक्रम, राजस्थान आवासन बोर्ड, राजस्थान पर्यटन विकास निगम, राज्य बीज निगम, अल्पसंख्यक, मदरसा समेत कई बोर्ड, आयोग और यूआईटी खाली पड़े हैं। साथ ही सैकड़ों सदस्यों के पद भरे जाने हैं। कुछ वरिष्ठ नेताओं के नामों को लेकर भी सहमति बताई जा रही है। इनके नामों की घोषणा भी हो सकती है। दो साल से कई वरिष्ठ नेता इन बोर्ड व आयोग की अध्यक्ष पद की दौड़ में है। हारे हुए वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक, पूर्व सांसद दिल्ली तक चक्कर लगा रहे हैं।



छह मंत्री पद खाली

राजस्थान सरकार के मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री सहित 24 कैबिनेट और राज्य मंत्री हैं। नियमानुसार विधानसभा सदस्यों के हिसाब से 30 सदस्य मंत्री बन सकते हैं। राजस्थान में दो सौ विधानसभा सदस्यों के हिसाब से 15 फीसदी मंत्री बना सकते हैं। फिलहाल मंत्रिमंडल में छह विधायक और मंत्री बन सकते हैं। जो मंत्रिमंडल में नहीं आ पाए तो सरकार संसदीय सचिव भी बनाकर भी विधायकों को संतुष्ट कर सकती है।



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