राजस्थान निकाय चुनाव: कांग्रेस ने लगाए पार्षद खरीद-फरोख्त के आरोप, डीजीपी ने दिए विजिलेंस जांच के आदेश
Ashish Bhardwaj | Oct 10, 2026, 12:09 IST
पार्षदों की खरीद-फरोख्त पर विजिलेंस जांच
राजस्थान में निकाय चुनाव के दौरान पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए थे। इसे लेकर कांग्रेस नेताओं ने 5 अक्टूबर को डीजीपी से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपकर पार्षदों को धमकाने और उन पर दबाव बनाने के आरोप लगाए। शिकायत के बाद डीजीपी ने मामले की विजिलेंस जांच शुरू कराई है।
राजस्थान में निकाय चुनाव के दौरान कांग्रेस ने सत्ता पक्ष और पुलिस-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब यह मामला जांच तक पहुंच गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भाजपा पर पार्षदों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए थे। कांग्रेस का दावा था कि कई निकायों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पक्षपातपूर्ण रही।
इसे लेकर गोविंद सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasra) और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Jully) ने पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी आरके शर्मा (DGP – Director General of Police) को 5 अक्टूबर को ज्ञापन दिया था। इसमें पार्षदों को धमकाने, दबाव बनाने और चुनाव प्रभावित करने के आरोप थे। 5 अक्टूबर को दिए इस ज्ञापन के बाद डीजीपी ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे।
अगले ही दिन 6 अक्टूबर को विजिलेंस विंग हरकत में आई। उसने भरतपुर, बीकानेर, जोधपुर, अजमेर और जयपुर रेंज के आईजी (IG – Inspector General) को जांच के निर्देश दिए। जांच की तथ्यात्मक रिपोर्ट जल्द एडीजी (ADG – Additional Director General) विजिलेंस कार्यालय को भेजनी होगी। अब सवाल यह है कि कांग्रेस की शिकायतों में कितनी सच्चाई है? किन मामलों में कार्रवाई बनती है? यह जांच के बाद ही तय होगा।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि बीजेपी ने राजस्थान में नगर निकाय चुनाव में पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का बेजा इस्तेमाल किया। उनके मुताबिक इससे चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। कांग्रेस का दावा है कि उसके और निर्दलीय पार्षदों के परिजनों को भी धमकियां दी गईं। कुछ मामलों में प्रलोभन देने और अपहरण जैसे आरोप भी लगाए गए।
ज्ञापन के मुताबिक कई निकायों में पार्षदों पर दबाव बनाकर बीजेपी ने चेयरमैन पद हासिल किए। कांग्रेस का कहना है कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना था। लेकिन उसका इस्तेमाल पार्षदों को पकड़ने और दबाव बनाने में हुआ। पार्टी ने दोषी अफसरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
ज्ञापन में पार्षदों और समर्थकों पर दर्ज मामलों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का दावा है कि चुनाव के दौरान 152 एफआईआर और शिकायतें दर्ज की गईं। ये मामले कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों और उनके समर्थकों के खिलाफ थे। कांग्रेस ने कई मामलों को राजनीतिक दबाव से प्रेरित बताया है।
कांग्रेस का आरोप है कि कुछ पुराने मामलों में कांग्रेस नेताओं को फिर से नोटिस जारी किए गए। कई पार्षदों को मतदान वाले दिन ही पूछताछ के लिए बुलाया गया। कांग्रेस ने इसे दबाव बनाने की कोशिश बताया है। हालांकि इन एफआईआर का आधार जांच के बाद ही साफ होगा।
ज्ञापन में एक और गंभीर आरोप लगाया था। कई निकायों में चेयरमैन चुनाव के दिन मतदान की समय सीमा दोपहर 2 बजे तय थी। आरोप है कि रिटर्निंग अफसरों ने इसे बिना उचित कारण बार-बार बढ़ाया। कांग्रेस ने इसे चुनाव प्रक्रिया में अनियमितता बताया है।
राजस्थान कांग्रेस का आरोप है कि पार्षदों के कारोबार पर कई विभागों ने दबिश दी। इनमें जीएसटी (GST – Goods and Services Tax), आयकर, खाद्य सुरक्षा और श्रम विभाग शामिल बताए गए। कांग्रेस का कहना है कि इससे पार्षदों और परिवारों पर दबाव बनाया गया। जांच में इन कार्रवाइयों के कारण और समय की पड़ताल अहम होगी। अगर आप किसी निकाय के मतदाता हैं, तो सोचिए कि आपके चुने पार्षद पर कितना दबाव रहा होगा। या फिर ये सिर्फ राजनीतिक आरोप हैं? जवाब जांच से ही मिलेगा।
कांग्रेस ने राजस्थान के डीजीपी आरके शर्मा को सौंपे ज्ञापन में कुचेरा नगरपालिका का मामला भी उठाया था। पार्टी के मुताबिक अध्यक्ष पद के प्रत्याशी तेजपाल मिर्धा को गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ा। तिजारा नगर परिषद के पार्षदों को हरियाणा पुलिस द्वारा रोके जाने का आरोप भी लगाया गया है। कांग्रेस ने मांग की है कि चुनाव में पुलिस और प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। जिन अफसरों की भूमिका गलत पाई जाए, उन पर कार्रवाई की जाए।
विजिलेंस विंग ने पांच रेंज के आईजी को जांच सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर आरोपों की पुष्टि और आगे की कार्रवाई तय होगी। मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव होने हैं। कांग्रेस पहले ही मांग कर चुकी है कि आगामी चुनावों में पुलिस-प्रशासन बिना दबाव के काम करे। फिलहाल जांच के आदेश जारी होना आरोपों के सही होने का सबूत नहीं है। असली तस्वीर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी।
डीजीपी को ज्ञापन, अगले दिन जांच
पांच रेंज के आईजी को जिम्मेदारी
बीजेपी पर चेयरमैन पद हथियाने का आरोप
ज्ञापन के मुताबिक कई निकायों में पार्षदों पर दबाव बनाकर बीजेपी ने चेयरमैन पद हासिल किए। कांग्रेस का कहना है कि पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना था। लेकिन उसका इस्तेमाल पार्षदों को पकड़ने और दबाव बनाने में हुआ। पार्टी ने दोषी अफसरों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
52 एफआईआर का मुद्दा
मतदान के दिन पूछताछ के लिए बुलाया
मतदान का समय बढ़ाने का आरोप
जीएसटी, आयकर विभाग की दबिश
कुचेरा और तिजारा के मामले
जांच रिपोर्ट पर टिकी नजर
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