विधायक से अभद्रता पर तहसीलदार ने भेजा माफीनामा, विधानसभा में स्पीकर ने की सुलह की घोषणा

राजस्थान में विधायक के साथ तहसीलदार के अभद्र व्यवहार का मामला सुलझ गया है। कांग्रेस के विशेषाधिकार हनन नोटिस के बाद तहसीलदार ने विधानसभा स्पीकर को अपना माफीनामा भेज दिया है।

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Ashish Bhardwaj
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SDM or vidhayak

Photograph: (the sootr)

News In Short

  • राजस्थान में दौसा विधायक और तहसीलदार के बीच विवाद सुलझा। 
  • विधायक का आरोप था कि उनसे तहसीलदार ने अभद्र व्यवहार किया।
  • कांग्रेस ने इस मामले में स्पीकर को विशेषाधिकार हनन नोटिस दिया था।
  • नोटिस के बाद तहसीलदार ने विधानसभा स्पीकर को माफीनामा भेजा।
  • स्पीकर ने विधानसभा में इस माफीनामे के आधार पर विवाद खत्म की घोषणा की। 

News In Detail 

राजस्थान की सियासत में गरमाया दौसा विधायक बनाम तहसीलदार विवाद आखिरकार थम गया है। यह मामला दौसा में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कांग्रेस विधायक डीसी बैरवा से तहसीलदार गजानंद मीणा के अभद्र व्यवहार का है। गजानंद ने विशेषाधिकार हनन नोटिस के बाद विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी को लिखित माफीनामा भेजकर खेद जताया है। स्पीकर ने सदन में इस माफीनामे को पढ़कर सुनाया, जिसके बाद इस प्रकरण को समाप्त मान लिया गया है।

यह है पूरा मामला

​यह विवाद 2 फरवरी को तब शुरू हुआ, जब दौसा तहसीलदार गजानंद मीणा जयपुर-दौसा हाईवे पर ट्रक यूनियन ऑफिस के सामने रानी बीड नामक सरकारी जमीन (करीब 12 बीघा) से अतिक्रमण हटाने पहुंचे थे। इस दौरान स्थानीय विधायक दीनदयाल बैरवा भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तहसीलदार से कार्रवाई से संबंधित आदेश दिखाने की मांग की।

​प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के अनुसार, विधायक की मांग पर तहसीलदार अपना आपा खो बैठे और उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा, सरकारी जमीन का मालिक मैं खुद हूं, मुझे कौन आदेश देगा। जमीन मेरी है, आप फालतू की बात मत करो। इस व्यवहार से विधायक और उनके समर्थकों में भारी आक्रोश फैल गया था। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया था, लेकिन यह चिंगारी विधानसभा तक पहुंच गई।

​स्पीकर की सख्ती और मध्यस्थता

​विपक्ष ने विधानसभा में इस मुद्दे को मजबूती से उठाया। विधायक डीसी बैरवा ने 14 फरवरी को कांग्रेस के अन्य विधायकों के साथ मिलकर विधानसभा स्पीकर को तहसीलदार के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। ​स्पीकर वासुदेव देवनानी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे संज्ञान में लिया।

स्पीकर देवनानी ने सदन में बताया, मेरे पास विधायक का मामला आया था कि उनका अपमान हुआ है। मैंने कलेक्टर से फीडबैक लिया, अगले दिन तहसीलदार को व्यक्तिगत रूप से तलब किया। मैंने पाया कि तहसीलदार का व्यवहार एक जनप्रतिनिधि की गरिमा के अनुकूल नहीं था। मैंने तत्काल कलेक्टर को एक्शन के निर्देश दिए थे।

​माफीनामे में क्या लिखा तहसीलदार ने

​सदन में पढ़े गए माफीनामे में तहसीलदार गजानंद मीणा ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखा कि 2 फरवरी को विधायक दीनदयाल बैरवा के साथ मेरा व्यवहार गरिमापूर्ण नहीं था। मुझे एक जनप्रतिनिधि के साथ इस प्रकार का आचरण नहीं करना चाहिए था। मैं अपने किए पर खेद प्रकट करता हूं और विश्वास दिलाता हूं कि भविष्य में ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी।

सुलह के बाद मामला खत्म

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकरण ने ब्यूरोक्रेसी को एक कड़ा संदेश दिया है कि सरकारी कार्यों के दौरान शिष्टाचार और गरिमा बनाए रखना अनिवार्य है।  विशेषकर जब मामला सीधे जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों से जुड़ा हो। फिलहाल, इस सुलह के बाद दौसा के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में जारी तनाव खत्म हो गया है।

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