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Photograph: (the sootr)
News In Short
- डीडवाना कलेक्टर महेंद्र खड़गावत की आरएएस अफसरों से ठनी
- आरएएस परिषद ने पद दुरुपयोग व उत्पीड़न के लगाए गंभीर आरोप
- आरएएस परिषद ने खड़गावत के खिलाफ सीएस से की शिकायत
- खड़गावत नेशनल क्रिकेटर रहे हैं, 2022 में प्रमोट होकर बने आईएएस
- खड़गावत ने 1992 में आरपीएससी पास की, फिर 2004 में फिर परीक्षा दी
News In Detail
राजस्थान में डीडवाना-कुचामन के जिला कलेक्टर महेंद्र खड़गावत विवादों में हैं। उनकी कार्यशौली के खिलाफ राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद ने मोर्चा खोल दिया। परिषद ने मुख्य सचिव को तीखा पत्र लिखकर कलेक्टर खड़गावत पर पद के दुरुपयोग, कनिष्ठ अधिकारियों के उत्पीड़न और नियमों को ताक पर रखकर काम करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
नियम विरुद्ध काम करो वरना चार्जशीट ले लो
आरएएस परिषद ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि लेक्टर आईएएस महेंंद्र खड़गावत अपने अधीनस्थ अधिकारियों पर नियम विरुद्ध और विधि विरुद्ध कार्य करने के लिए 'अनावश्यक दबाव' बना रहे हैं। परिषद का दावा है कि जब ईमानदार अधिकारी गलत काम करने से इनकार कर देते हैं, तो कलेक्टर उन्हें डराने-धमकाने के लिए झूठी चार्जशीट जारी कर शासन को भेज देते हैं। यह आरोप सीधे तौर पर जिले के प्रशासनिक वातावरण में व्याप्त तनाव और तानाशाही की ओर इशारा करता है।
​इन तीन प्रमुख बिंदुओं पर फंसा पेंच
​परिषद ने कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तीन मुख्य उदाहरण पेश किए हैं:
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ऑफलाइन काम का दबाव: डिजिटल इंडिया के दौर में जहां सरकार ऑनलाइन प्रक्रियाओं पर जोर दे रही है, वहीं कलेक्टर पर आरोप है कि वे 'संपरिवर्तन' (Conversion) के आवेदनों को ऑनलाइन के बजाय ऑफलाइन करने के लिए अधिकारियों को मजबूर कर रहे हैं।
​बिना कारण फाइलें तलब करना: संपरिवर्तन की पत्रावलियों को बिना किसी ठोस आधार के अपने पास मंगवाना और उन्हें अटकाना भी उनकी कार्यशैली का हिस्सा बताया गया है।
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अदालती फैसलों में हस्तक्षेप: सबसे गंभीर आरोप यह है कि कलेक्टर न्यायिक प्रकरणों में निर्णय को प्रभावित करने के निर्देश देते हैं, जो पूरी तरह से असंवैधानिक और विधि विरुद्ध है।
​"अनुभव की कमी या सत्ता का मद?"
​पत्र में कलेक्टर खड़गावत की योग्यता पर भी तीखा प्रहार किया गया है। परिषद का कहना है कि खड़गावत की अधिकांश सेवाएं 'पूरालेख विभाग' (Archives Department) में रही हैं। इसके कारण उन्हें राजस्व नियमों और जमीनी प्रशासन का पर्याप्त अनुभव नहीं है। परिषद ने सवाल उठाया है कि ऐसे व्यक्ति को 'जिला कलेक्टर' जैसे अति महत्वपूर्ण पद पर बैठाना प्रशासन की कार्यकुशलता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
​परिषद की मांग: उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई
​परिषद के अध्यक्ष महावीर खराड़ी और महासचिव नीतू राजेश्वर के हस्ताक्षरित इस पत्र में स्पष्ट मांग की गई है कि ​कलेक्टर महेंद्र खड़गावत के अब तक के कार्यकाल और उनके द्वारा किए गए कार्यों की किसी उच्चाधिकारी से निष्पक्ष जांच करवाई जाए। ​उनके खिलाफ तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाए।
प्रशासन में बढ़ती रार
​यह पहली बार नहीं है जब राजस्थान में आरएएस और आरईएएस अधिकारियों के बीच खींचतान सामने आई है। लेकिन, जिस तरह कलेक्टर महेंद्र खड़गावत के खिलाफ 'ऑफलाइन फाइलिंग' और 'न्यायिक हस्तक्षेप' के आरोप सार्वजनिक हुए हैं, उसने प्रदेश की भजनलाल सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को चुनौती दी है। अब देखना यह है कि मुख्य सचिव इस मामले में जांच के आदेश देते हैं या जिला स्तर पर जारी यह 'कोल्ड वॉर' और उग्र रूप धारण करती है।
कौन हैं कलेक्टर महेंद्र खड़गावत
दरअसल, महेंद्र खड़गावत नेशनल क्रिकेटर रहे हैं। उन्होंने 1992 में पहले ही प्रयास में आरपीएससी की परीक्षा पास की थी और अधिकारी बने। वर्ष 2004 में उन्होंने अपनी रैंक बढ़ाने के लिए फिर आरपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की। वे राज्य अभिलेखागार के निदेशक बने। उन्होंने देश के पहले डिजिटल अभिलेखागार तैयार किया, जिसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली। उन्होंने राजस्थान सरकार से जुड़े अलग-अलग विभाग में काम किया। पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के समय वह 2022 में प्रमोट होकर आईएएस बन गए।
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