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Photograph: (the sootr)
News in Short
- एसएमएस अस्पताल में 30 से ज्यादा डॉक्टरों को चिकित्सा के अलावा किचन, कैंटीन, सिक्योरिटी, पार्किंग जैसी प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ दी गई हैं।
- राजस्थान में लगभग 4,500 डॉक्टरों के पद खाली हैं, जिससे डॉक्टरों को अपनी विशेषज्ञता के बजाय अन्य प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहना पड़ रहा है।
- हार्ट, किडनी और न्यूरोसर्जन जैसे विशेषज्ञ डॉक्टर भी किचन, कैंटीन और लॉन्ड्री जैसे कार्यों में शामिल हैं।
- डॉक्टरों के संगठन का कहना है कि प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ डॉक्टरों को नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि यह मरीजों के इलाज में हस्तक्षेप कर रहा है।
- प्राइवेट अस्पतालों में प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी अलग विभागों को दी जाती है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह जिम्मेदारी डॉक्टरों को सौंप दी गई है।
News in Detail
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स को अब सिर्फ चिकित्सा कार्य ही नहीं, बल्कि अन्य व्यवस्थाओं को देखने की जिम्मेदारी भी दी जा रही हैं। सवाई मान सिंह (एमएसएस) अस्पताल में 30 से ज्यादा डॉक्टरों को इस तरह की जिम्मेदारी सौंप दी गई हैं। किसी डॉक्टर को किचन की जिम्मेदारी दी गई है तो किसी को सीवरेज और पार्किंग व्यवस्था की।
सरकारी डॉक्टरों को मिली नई जिम्मेदारियां
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को अब उनकी मुख्य जिम्मेदारियों के अलावा किचन, कैंटीन, सिक्योरिटी, पार्किंग और सीवरेज जैसे कार्य भी सौंपे गए हैं। यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से एसएमएस अस्पताल में यह व्यवस्था चल रही है। इसने डॉक्टरों की चिकित्सा विशेषज्ञता का पूरा लाभ मरीजों को न मिलने का मुद्दा भी खड़ा कर दिया है।
डॉक्टरों को मिली असामान्य जिम्मेदारी
सवाई मान सिंह (SMS) अस्पताल के डॉक्टरों को कई प्रशासनिक कार्यों में उलझा दिया गया है। इनमें किचन और कैंटीन के संचालन से लेकर स्टेशनरी, पार्किंग, सिक्योरिटी, लॉन्ड्री, ट्रॉली जैसे कार्य भी शामिल हैं। इसका असर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ा है, और डॉक्टरों की विशेषज्ञता अब इन गैर-चिकित्सीय जिम्मेदारियों में फंसी हुई है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों का अस्पताल संचालन में शामिल होना
एसएमएस अस्पताल में कई विशेषज्ञ डॉक्टर, जैसे कि न्यूरोसर्जन, ईएनटी स्पेशलिस्ट, और जनरल मेडिसिन के विशेषज्ञ, अब अस्पताल की प्रबंधन गतिविधियों में शामिल हो गए हैं। यह स्थिति राजस्थान में चिकित्सक की भारी कमी के चलते उत्पन्न हुई है, क्योंकि राज्य में लगभग 4,500 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं।
डॉक्टर्स की सूची: कौन संभाल रहे हैं कार्य
- डॉ. सतीश वर्मा: किचन, कैंटीन, स्टेशनरी, कॉन्ट्रैक्ट सेल, रेडियोग्राफर एंड लैब टेक्नीशियन।
- डॉ. अरविंद पालावत: रेडियोग्राफर एंड लैब टेक्नीशियन।
- डॉ. राशिम कटारिया: नर्सिंग ड्यूटी मैनेजमेंट इंचार्ज, फार्मासिस्ट ड्यूटी।
- डॉ. बीएम शर्मा: किचन, कैंटीन।
- डॉ. प्रवीण जोशी: पार्किंग, लाइफ लाइन इंचार्ज।
- डॉ. अजीत सिंह: सिक्योरिटी, चोरी नियंत्रण, हॉस्पिटल में वॉयलेंस।
- डॉ. राजकुमार हर्षवाल: सुलभ टॉयलेट क्लीनिंग, कंडम आइटम की नीलामी।
- डॉ. गिरधर गोयल: लॉन्ड्री, क्लॉथिंग-लिनेन सेक्शन, ईपीबीएक्स।
- डॉ. आलोक तिवारी: अस्पताल की फायर सेफ्टी, पीडब्ल्यूडी से जुड़े काम।
क्या कहता है डॉक्टरों का संगठन?
जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर के अध्यक्ष डॉ. राजपाल मीना का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में प्रशासनिक कार्यों की जिम्मेदारी डॉक्टरों को नहीं दी जानी चाहिए। डॉक्टरों की विशेषज्ञता का पूरा लाभ मरीजों को मिलना चाहिए, जबकि प्रशासनिक कार्यों के लिए अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
राजस्थान में 4500 डॉक्टरों की कमी
प्रदेश में करीब साढ़े चार हजार डॉक्टर्स के पद रिक्त चल रहे हैं। एसएमएस या फिर अन्य सरकारी अस्पतालों में कई डॉक्टर्स इस तरह के कामों की जिम्मेदारी संभालने में व्यस्त हैं। उनकी विशेषज्ञता का लाभ न तो मरीजों को मिल पा रहा है और न ही सरकार को। कई सीएचसी-पीएचसी या फिर जिला अस्पतालों में डॉक्टर्स के पद खाली पड़े हैं।
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