नौकरी के लिए बनवाया फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र, विभाग ने बर्खास्त कर लिख दिया एसओजी को पत्र

Purshottam Kumar Joshi | Feb 03, 2026, 18:03 IST
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Photograph: (the sootr)

राजस्थान के टोंक में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र से सरकारी नौकरी प्राप्त करने के आरोप में पंचायतराज के दो ग्राम विकास अधिकारियों बर्खास्त कर दिया गया। साथ ही भत्तों की वसूली के साथ ही डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।



News in Short

  • राजस्थान में टोंक के दो ग्राम विकास अधिकारियों को फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आरोप में बर्खास्त किया गया।
  • दोनों अधिकारियों ने फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट बनाकर 2021 में सरकारी नौकरी प्राप्त की थी।
  • जिला परिषद ने जांच के बाद अजमेर और जयपुर मेडिकल बोर्ड से पुनः परीक्षण करवाया।
  • मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में दोनों की फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट से नौकरीपाई गई।
  • अधिकारियों से पूरी सैलरी और भत्तों की वसूली के साथ-साथ फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश।

News in Detail

राजस्थान में पेपर लीक,ओमएमआर शीट घोटाले के बाद अब फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र का बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। टोंक में दो ग्राम विकास अधिकारी ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बना कर नौकरी हासिल कर ली। फर्जी सर्टिफिकेट की जांच के बांद दो ग्राम विकास अधिकारियों शाहरूख और विजय चौधरी को जिला परिषद मुख्य कार्यकारी अधिकारी परशुराम धानका ने बर्खास्त कर दिया गया। साथ ही भत्तों की वसूली के साथ ही डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। इस मामले को लेकर अतिरिक्त महानिदेषक पुलिस, एटीएस एवं एसओजी, राजस्थान को भी चिठ्ठी भेजी है।

टोंक में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र मामले में कार्रवाई

राजस्थान के टोंक जिले में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के मामले में प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। दो ग्राम विकास अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। इन अधिकारियों ने सरकारी नौकरी पाने के लिए आंखों की दिव्यांगता का झूठा प्रमाण पत्र पेश किया था।

जांच के बाद सख्त कदम उठाया गया

इस मामले की शिकायत मिलने के बाद, जिला परिषद ने इसकी गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान, अजमेर और जयपुर मेडिकल बोर्ड से दोनों अधिकारियों की दिव्यांगता का परीक्षण कराया गया। मेडिकल रिपोर्ट में उनकी दिव्यांगता को फर्जी पाया गया। इसके बाद प्रशासन ने मालपुरा पंचायत समिति के विजय चौधरी और टोंक पंचायत समिति के शाहरुख खान को सेवा से निलंबित कर दिया।



फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई

प्रशासन ने केवल अधिकारियों को ही बर्खास्त नहीं किया, बल्कि उन डॉक्टरों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं, जिन्होंने इन अधिकारियों को फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किए थे। इसके अलावा, दोनों अधिकारियों से नौकरी के दौरान प्राप्त सैलरी और भत्तों की वसूली का आदेश भी दिया गया है।

कड़े कदमों से विभाग में हड़कंप

इस कार्रवाई से पूरे सरकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। सरकारी पदों पर दिव्यांगता का प्रमाण पत्र दिखाकर नौकरी पाने के मामलों को लेकर यह घटना एक चेतावनी साबित हो सकती है।

सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव

यह घटना न केवल प्रशासनिक स्तर पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज में भी यह संदेश भेजती है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सार्वजनिक सेवा में घुसपैठ करने की कोशिशें किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। सरकार और प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए।

पेपर लीक का पूरा मामला यह है

राजस्थान में पेपर लीक का मामला एक बड़ा मुद्दा रहा है। इसमें पिछले कुछ वर्षों की कई महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं। वर्तमान में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं।

1. एसआई भर्ती 2021: यह सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है। जांच में सामने आया कि आरपीएससी के पूर्व सदस्य रामूराम राईका ने अपने बच्चों को पेपर दिया था। इस मामले में अब तक 63 ट्रेनी एसआई सहित कुल 139 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हाल ही में अगस्त 2025 में राजस्थान हाई कोर्ट ने इस परीक्षा को रद्द करने का आदेश दिया था।
2.रीट 2021: परीक्षा के दिन ही व्हाट्सएप पर पेपर लीक हो गया था, जिसके बाद लेवल-2 की परीक्षा रद्द कर दी गई थी। इस मामले में शिक्षा बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष को भी बर्खास्त किया गया था।
3.JEN भर्ती 2020: जूनियर इंजीनियर भर्ती का पेपर भी लीक हुआ था। हालिया जांच (जनवरी 2026) में खुलासा हुआ कि दोबारा हुई परीक्षा में भी धांधली हुई थी और 35 लाख रुपये में पेपर बेचे गए थे।
4.वरिष्ठ अध्यापक (2nd Grade) 2022: उदयपुर में एक चलती बस में पेपर हल करते हुए कई अभ्यर्थी पकड़े गए थे।

घोटाले का तरीका

  • पेपर माफिया और गिरोह: सुरेश ढाका, भूपेंद्र सारण और जगदीश विश्नोई जैसे नाम मास्टरमाइंड के रूप में सामने आए हैं।
  • डमी कैंडिडेट: असली अभ्यर्थी की जगह किसी और 'एक्सपर्ट' को बैठाकर परीक्षा दिलाई जाती थी। हाल ही में फरवरी 2026 में एक मास्टरमाइंड अशोक विश्नोई को गिरफ्तार किया गया है, जो 3 अलग-अलग अभ्यर्थियों की जगह डमी कैंडिडेट बना था।
  • OMR शीट में छेड़छाड़: कुछ मामलों में पेपर लीक के बजाय सीधे OMR शीट में छेड़छाड़ कर अभ्यर्थियों को नौकरी दिलाई गई।
  • हाई-टेक नकल: ब्लूटूथ डिवाइस और क्यूआर कोड का इस्तेमाल भी धड़ल्ले से किया गया।

वर्तमान स्थिति और कार्रवाई (फरवरी 2026 तक)

  • एसआईटी (SIT) का गठन: नई सरकार ने पेपर लीक मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल बनाया है।
  • ईडी की कार्रवाई: ईडी ने आरोपियों की करोड़ों की संपत्ति अटैच की है और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच कर रही है।
  • प्रशासनिक बदलाव: आगामी परीक्षाओं (जैसे SI भर्ती 2025) के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसमें डिजिटल लॉक और पेपर पहुंचने की वीडियोग्राफी शामिल है

राजस्थान में ओएमआर (OMR) शीट घोटाला

सरकारी भर्तियों में धांधली का एक नया और गंभीर रूप है, जिसका खुलासा जनवरी-फरवरी 2026 में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने किया है।
1. मुख्य प्रभावित भर्तियां (वर्ष 2018-19)-एसओजी की जांच मुख्य रूप से तीन बड़ी भर्तियों पर केंद्रित है। इनमें ओएमआर शीट के अंकों में भारी हेरफेर कर 38 अभ्यर्थियों को फर्जी तरीके से पास कराया गया।

  • महिला अधिकारिता सुपरवाइजर (Women Supervisor)
  • प्रयोगशाला सहायक (Lab Assistant)
  • कृषि पर्यवेक्षक (Agriculture Supervisor)

2. घोटाले का तरीका

  • ओएमआर शीट घोटाला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं था, बल्कि परीक्षा के बाद रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया में किया गया।
  • डिजिटल हेरफेर: ओएमआर शीट स्कैन होने के बाद, प्राइवेट एजेंसी और बोर्ड के अधिकारियों ने कंप्यूटर सिस्टम में 'फोटोशॉप' जैसे टूल्स का उपयोग कर डिजिटल डेटा बदल दिया।
  • नंबरों में भारी अंतर: जांच में पाया गया कि कई अभ्यर्थियों के वास्तविक अंक बहुत कम थे, जिन्हें बढ़ाकर टॉपर बना दिया गया। उदाहरण के लिए, एक अभ्यर्थी जिसे -6 अंक मिल रहे थे, उसे हेरफेर कर 259 अंक दे दिए गए।
  • खाली गोले भरना: आउटसोर्स फर्म 'राभव लिमिटेड' के जरिए खाली छोड़े गए ओएमआर गोलों को बाद में भरकर अंकों में बढ़ोतरी की गई।

प्रमुख गिरफ्तारियां और जांच का दायरा

  • संजय माथुर: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के तत्कालीन तकनीकी प्रमुख और डिप्टी डायरेक्टर।
    प्रवीण गंगवाल: बोर्ड के प्रोग्रामर।
  • रामप्रवेश यादव: ओएमआर स्कैनिंग का ठेका लेने वाली फर्म 'राभव लिमिटेड' (Rabhav Ltd) का संचालक।
  • बी.एल. जाटावत से पूछताछ: एसओजी अब बोर्ड के पूर्व चेयरमैन बी.एल. जाटावत से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है, क्योंकि विवादित फर्म को ठेका उनके कार्यकाल में मिला था।
  • 38 अभ्यर्थी फरार: इस घोटाले के लाभार्थी 38 अभ्यर्थी अब भूमिगत हो गए हैं और एसओजी उनकी तलाश कर रही है।
  • पिछले 8-9 साल की जांच: एसओजी अब पिछले 8-9 वर्षों में हुई सभी बड़ी भर्तियों के रिकॉर्ड खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह खेल कितने समय से चल रहा था।
  • पुरानी ओएमआर शीट्स नष्ट करने का विवाद: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा पुरानी भर्तियों की ओएमआर शीट्स नष्ट करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसे कुछ लोग सबूत मिटाने की कोशिश मान रहे हैं, हालांकि बोर्ड अध्यक्ष ने इसे अफवाह बताया है।
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