खनन माफिया से भिड़ रहे वनकर्मी, हथियार और वाहन देने के फिर निर्देश, बजट की घोषणाएं जमीन पर कितनी उतरीं?
Raghvendra Singh Rathore | Oct 16, 2026, 15:59 IST
राजस्थान में वनकर्मियों पर हमलों के बीच सुरक्षा इंतजामों पर सवाल।
राजस्थान में अवैध खनन रोकने वाले वनकर्मियों पर हमलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। प्रतापगढ़ में रेंजर की मौत के बाद मुख्य सचिव ने हथियार और वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। बजट में घोषित हथियारों और 460 मोटरसाइकिलों की खरीद तथा वितरण की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
राजस्थान में अवैध खनन रोकने वाले वनकर्मियों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सितंबर में प्रतापगढ़ में वन रेंजर की मौत और दूसरे जिलों में वनकर्मियों पर हमलों के बाद सरकार ने हथियार और वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब वनकर्मियों को पहले से खतरा था, तब सुरक्षा के इंतजाम समय पर क्यों नहीं हुए?
राज्य सरकार के 2026-27 के बजट में वनकर्मियों के लिए आधुनिक हथियार और 460 मोटरसाइकिलों की घोषणा हुई थी। इसके बावजूद कर्मचारी संगठनों ने सितंबर में संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाया। अब मुख्य सचिव के नए निर्देशों के बाद हथियारों और वाहनों की वास्तविक उपलब्धता की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
21 सितंबर 2026 की रात प्रतापगढ़ जिले की छोटी सादड़ी रेंज में वन रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की मौत हो गई। वे कथित अवैध खनन में इस्तेमाल हो रहे डंपर को रोकने का प्रयास कर रहे थे। आरोप है कि डंपर ने उन्हें कुचल दिया।
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। वन विभाग ने मृतक रेंजर को वन शहीद का दर्जा देने की सिफारिश भी की थी। यह घटना बताती है कि भारी वाहनों से अवैध खनन करने वालों का पीछा करने वाले वनकर्मियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है।
26 सितंबर को भरतपुर के कोंडापुरा क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने गई वन विभाग की टीम पर कथित पथराव और फायरिंग हुई। टीम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली और कंप्रेसर मशीन जब्त की थी।
7 अक्टूबर को सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र में कथित अवैध बजरी परिवहन में शामिल ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से पुलिस कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए जयपुर रेफर किया गया। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में वन विभाग के साथ पुलिसकर्मियों को भी गंभीर जोखिम उठाना पड़ रहा है।
राजस्थान के 2026-27 के बजट में क्षेत्रीय वन अधिकारियों और वनपालों के लिए ग्लॉक पिस्तौल, प्रत्येक वन चौकी के लिए दो एसएलआर राइफल और फील्ड कर्मचारियों के लिए 460 मोटरसाइकिलों की घोषणा की गई थी।
लेकिन सितंबर में वन कर्मचारी संगठनों ने शिकायत की कि घोषित संसाधन कर्मचारियों तक नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में तीन सवाल महत्वपूर्ण हैं। हथियारों की खरीद प्रक्रिया कहां तक पहुंची? कितनी मोटरसाइकिलें खरीदी गईं? और खरीदे गए संसाधनों में से कितने संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को दिए गए?
राजस्थान में वनकर्मियों को हथियार उपलब्ध कराने की नीति वर्ष 1994 से है। इसके तहत वनरक्षकों और वनपालों को 12 बोर की बंदूक तथा वरिष्ठ फील्ड अधिकारियों को .22 रिवॉल्वर दिए जाने का प्रावधान बताया गया है।
इसके बावजूद कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल बने हुए हैं। आधुनिक हथियारों की घोषणा और पहले से मौजूद नीति के बीच वास्तविक अंतर का पता विभागीय खरीद तथा वितरण रिकॉर्ड से ही चल सकेगा।
9 अक्टूबर को मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध बजरी खनन रोकने और वनकर्मियों की सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ी राज्य स्तरीय समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में संवेदनशील क्षेत्रों में हथियार और वाहन समय पर उपलब्ध कराने, गश्त बढ़ाने तथा संबंधित विभागों की संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया। वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड निरीक्षण और कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए गए।
वन रेंजर की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने भी आया। अदालत ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध बजरी खनन के खिलाफ कार्रवाई और फील्ड कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।
अदालत ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, चेकपोस्ट और संगठित अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया।
वन कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने सितंबर में सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि पिछले पांच वर्षों में वनकर्मियों पर 200 से अधिक हमले हुए हैं और दो वर्षों में तीन वनकर्मियों की जान गई है।
उन्होंने कर्मचारियों को हथियार और चारपहिया वाहन देने की मांग की थी। उनका तर्क था कि भारी वाहनों से अवैध खनन करने वालों का सामना मोटरसाइकिल पर करना कर्मचारियों के लिए खतरनाक है। ये संगठन के दावे हैं। इनकी सालवार पुष्टि पुलिस और वन विभाग के रिकॉर्ड से होना बाकी है।
वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए नई घोषणाएं और निर्देश सामने आते रहे हैं। लेकिन उनकी प्रभावशीलता इस बात से तय होगी कि कितने संसाधन वास्तव में फील्ड कर्मचारियों तक पहुंचे और हमलों को रोकने के लिए क्या बदलाव हुए।
राज्य सरकार के 2026-27 के बजट में वनकर्मियों के लिए आधुनिक हथियार और 460 मोटरसाइकिलों की घोषणा हुई थी। इसके बावजूद कर्मचारी संगठनों ने सितंबर में संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाया। अब मुख्य सचिव के नए निर्देशों के बाद हथियारों और वाहनों की वास्तविक उपलब्धता की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
प्रतापगढ़ में रेंजर की मौत से उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। वन विभाग ने मृतक रेंजर को वन शहीद का दर्जा देने की सिफारिश भी की थी। यह घटना बताती है कि भारी वाहनों से अवैध खनन करने वालों का पीछा करने वाले वनकर्मियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है।
भरतपुर में पथराव और फायरिंग, सवाई माधोपुर में पुलिसकर्मी घायल
7 अक्टूबर को सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा क्षेत्र में कथित अवैध बजरी परिवहन में शामिल ट्रैक्टर-ट्रॉली की चपेट में आने से पुलिस कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए जयपुर रेफर किया गया। इन घटनाओं से स्पष्ट है कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई में वन विभाग के साथ पुलिसकर्मियों को भी गंभीर जोखिम उठाना पड़ रहा है।
बजट में हथियार और 460 मोटरसाइकिलों की घोषणा
लेकिन सितंबर में वन कर्मचारी संगठनों ने शिकायत की कि घोषित संसाधन कर्मचारियों तक नहीं पहुंचे हैं। ऐसे में तीन सवाल महत्वपूर्ण हैं। हथियारों की खरीद प्रक्रिया कहां तक पहुंची? कितनी मोटरसाइकिलें खरीदी गईं? और खरीदे गए संसाधनों में से कितने संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को दिए गए?
1994 से हथियारों की नीति, फिर भी सुरक्षा का संकट
इसके बावजूद कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल बने हुए हैं। आधुनिक हथियारों की घोषणा और पहले से मौजूद नीति के बीच वास्तविक अंतर का पता विभागीय खरीद तथा वितरण रिकॉर्ड से ही चल सकेगा।
मुख्य सचिव ने दिए हथियार और वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ी राज्य स्तरीय समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में संवेदनशील क्षेत्रों में हथियार और वाहन समय पर उपलब्ध कराने, गश्त बढ़ाने तथा संबंधित विभागों की संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया। वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड निरीक्षण और कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए गए।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
अदालत ने राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, चेकपोस्ट और संगठित अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया।
कर्मचारी संगठन ने क्या कहा?
उन्होंने कर्मचारियों को हथियार और चारपहिया वाहन देने की मांग की थी। उनका तर्क था कि भारी वाहनों से अवैध खनन करने वालों का सामना मोटरसाइकिल पर करना कर्मचारियों के लिए खतरनाक है। ये संगठन के दावे हैं। इनकी सालवार पुष्टि पुलिस और वन विभाग के रिकॉर्ड से होना बाकी है।
समझें, सुरक्षा की पड़ताल में क्या जरूरी है?
- 2023 से 2026 तक हथियारों और वाहनों की कुल मांग, स्वीकृति, खरीद और वितरण।
- सुरक्षा उपकरणों के लिए मंजूर बजट और वास्तविक खर्च।
- संवेदनशील वन चौकियों पर उपलब्ध वाहन, हथियार और कर्मचारियों की संख्या।
- अवैध खनन रोकने के दौरान हमलों, घायल कर्मचारियों और मौतों का सालवार रिकॉर्ड।
- लंबित खरीद प्रस्ताव और मंजूरी में हुई देरी के कारण।
सबसे बड़ा सवाल
MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, ओपन कैटेगरी में आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का भी हक, मेरिट बनेगी आधार
By Manya Jain
उदयपुर में 492 करोड़ से डबल होगा 24 किलोमीटर लंबा रेलवे ट्रैक, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी
By Ashish Bhardwaj
ट्विशा केस: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल पर लगाई रोक, गिरिबाला की जमानत पर 26 अक्टूबर को सुनवाई
By Neel Tiwari
अफसरी के ग्लैमर पर भारी राजनीति की चकाचौंध, कई IAS-IPS ने नौकरी छोड़ चुनी सियासत, इनमें एमपी, सीजी और राजस्थान के नौकरशाह
By Arun Tiwari
अफसरी के ग्लैमर पर भारी राजनीति की चकाचौंध, कई IAS-IPS ने नौकरी छोड़ चुनी सियासत, इनमें एमपी, सीजी और राजस्थान के नौकरशाह
By Arun Tiwari
अफसरी के ग्लैमर पर भारी राजनीति की चकाचौंध, कई IAS-IPS ने नौकरी छोड़ चुनी सियासत, इनमें एमपी, सीजी और राजस्थान के नौकरशाह
By Arun Tiwari
सऊदी हमले के बाद उड़ानें रद्द: उदयपुर, जयपुर, कोटा समेत कई जिलों के जायरीन मक्का-मदीना में फंसे
By Jageshwar prasad