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Photograph: (The Sootr)
Jaipur: राजस्थान में स्कूल व्याख्याताओं के ताबड़तोड़ किए गए तबादलों के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को अब एक बड़ी गलती का एहसास हुआ है। शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने आदेश जारी कर उन स्थानांतरित किए गए शिक्षकों को वापस अपने स्कूलों में लौटने के आदेश दिए हैं, जिनकी ड्यूटी मतदाता पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में लगी हुई है। तबादले के बाद ऐसे 1500 से अधिक व्याख्याता वापस पुरानी जगह लौटेंगे।
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शिक्षा निदेशालय को हुआ गलती का एहसास
राजस्थान में इन दिनों एसआईआर का कार्य चल रहा है। इसमें शिक्षकों को पर्यवेक्षक, बीएलओ, हेल्पलाइन डेस्क प्रभारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पर लगाया गया है। तबादला सूचियों में ऐसे शिक्षकों के नाम शामिल होने से एसआईआर का काम प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था। इन तबादलों को लेकर सरकार की किरकिरी हुई तो शिक्षा निदेशालय को अपनी गलती का एहसास हुआ।
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6500 से अधिक व्याख्याताओं के तबादले
शिक्षा विभाग में हाल ही में प्राचार्य, उप प्राचार्य और व्याख्याताओं के ताबड़तोड़ तबादले किए गए थे। इसमें एक दिन में 15 विषयों के 6500 से अधिक व्याख्याताओं के तबादले हुए। गंभीर बात यह हुई है कि ये तबादले उस स्थिति में किए गए, जब राजस्थान में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा को मात्र एक महीना बाकी था। साथ ही प्रदेश में एसआईआर का भी काम चल रहा है। इससे पहले सात हजार से अधिक प्राचार्यों के तबादला किए गए।
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चुनाव आयोग को भेजी थी शिकायत
एसआईआर के दौरान व्याख्याताओं के हुए तबादलों को लेकर शिक्षा निदेशालय की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए गए। कुछ विपक्षी दलों ने इन तबादलों को सियासी मुद्दा बनाकर सरकार के खिलाफ निर्वाचन आयोग में शिकायत भेजी। कांग्रेस का आरोप था कि चुनाव आयोग के अनुमोदन के बगैर व्याख्याताओं के थोक तबादले कर दिए। इस बीच, सरकार को अपनी गलती का एहसास हुआ। निर्वाचन आयोग के डंडे से बचने के लिए शिक्षा निदेशालय ने मंगलवार को अपनी गलती को सुधारने का एक आदेश जारी किया।
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शिक्षा निदेशालय ने आदेश में यह लिखा
शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी आदेश में कहा कि एसआईआर के काम में लगे सभी कार्मिकों के तबादलों पर रोक लगाई जाती है। ऐसे सभी कार्मिक अपने पुराने पद पर ही कार्य करते रहेंगे। तबादला आदेश की अनुपालना में जिन शिक्षकों ने नई जगह ज्वॉइन कर लिया है, वे भी अपनी पुरानी जगह लौटेंगे। निदेशक ने आदेश में कहा है कि एसआईआर में लगे सभी शिक्षक तबादले से पहले वाली अपनी जगह पर लौटना सुनिश्चित करेंगे।
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डोटासरा ने सीएमओ पर ये लगाए आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि तबादला करने से पहले सूची का निर्वाचन आयोग से अनुमोदन करना जरूरी था। लेकिन, सरकार ने इन तबादलों पर ऐसा नहीं किया। ये तबादले नियमों के पूरी तरह खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने तबादल उद्योग चला रखा है। इसमें शिक्षा मंत्री, सीएमओ और अधिकारी संलिप्त हैं। ऐसी क्या नौबत आ गई, जब स्कूली बच्चों के प्रैक्टिकल परीक्षा चल रही हैं। इन तबादलों को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।
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व्याख्याताओं के तबादलों के मुख्य बिंदू:
- राजस्थान में शिक्षा विभाग ने एक ही दिन में 6500 से अधिक व्याख्याताओं के तबादले किए थे, हालांकि इसमें चुनाव आयोग का अनुमोदन नहीं लिया गया था, जिससे विवाद हुआ।
- शिक्षा निदेशालय ने 1500 व्याख्याताओं के तबादले को वापस करने का आदेश जारी किया, खासकर उन शिक्षकों के लिए जिनकी ड्यूटी एसआईआर कार्य में लगी थी।
- कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इन तबादलों के लिए चुनाव आयोग से अनुमोदन नहीं लिया गया था, और तबादल उद्योग के तहत सरकार ने नियमों का उल्लंघन किया।
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