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Photograph: (the sootr)
News in Short
- राजस्थान सरकार को 62,818 करोड़ निवेश पर मिला मात्र 6 करोड़ का लाभ।
- कैग रिपोर्ट में खुलासा, हर साल कर्ज बढ़ा, लेकिन विकास पर आधा भी खर्च नहीं।
- 2024-25 के दौरान सरकार ने 1025 करोड़ का निवेश किया मात्र दो कंपनियों में।
- सरकार ने 133 बार खर्च चलाने को लिया रिजर्व बैंक से 91,251 करोड़ एडवांस।
- सरकार ने 2024-25 में 65 बार में लिया 75 हजार करोड़ के लांग टर्म कर्ज।
News in Detail
राजस्थान सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के अपने उपक्रमों में अंश पूंजी के रुप में 62 हजार 818 करोड़ का निवेश किया हुआ है। लेकिन, इस भारी-भरकम निवेश से सरकार को 2024-25 में महज 6 करोड़ का ही लाभ हुआ है। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक(कैग) की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में सरकार ने सरकारी कंपनियों, संयुक्त उपक्रम और सहकारी समितियों में 1047 करोड़ का निवेश किया। इनमें सबसे ज्यादा पैसा सरकार ने राजस्थान स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में 855 करोड़ रुपए और राजस्थान पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड में 170 करोड रुपए किया है।
कर्ज वसूली से सुधरेगी आर्थिक सेहत
रिपोर्ट में बताया है कि 2024-25 के अंत तक सरकार ने 7,712 करोड़ रुपए कुल कर्ज व अग्रिम के रुप में दिए हुए थे। सरकार को इसमें 2024-25 में मात्र 517 करोड़ रुपए की वापस मिले हैं। इसमें विभिन्न बिजली कंपनियों से 419 करोड़, जयपुर मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से 54 करोड़, राजस्थान राज्य भंडारण निगम से 23 करोड़ तथा जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी से 10 करोड़ मिले हैं।
रिपोर्ट में कहा है कि बकाया की प्रभावी वसूली होने से सरकार की आर्थिक सेहत बेहतर होगी। रिपोर्ट में यह भी बताया है कि सरकार के सभी विभागों को हर साल जून महीने तक मूल तथा ब्याज की बकाया वसूलियों की जानकारी देनी होती है। लेकिन, वर्ष 2024-25 के दौरान 29 विभाग ने 92 विवरण नहीं दिए हैं।
रिजर्व बैंक से लिया 91,251 करोड़ एडवांस
कैग रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान सरकार ने 133 बार 271 दिन के लिए 91,251 करोड़ रिजर्व बैंक से विशेष एडवांस के तौर पर लिए और इसके लिए 161 करोड़ रुपए ब्याज के अदा किए। 57 अवसरों पर सरकार ने 100 दिन के लिए 31,029 करोड़ रुपए एडवांस लिए और इसके लिए 19 करोड़ रुपए ब्याज अदा किया।
हर साल लिया कर्ज लेकिन विकास और संपत्तियां बनाने में कर्ज का आधे से भी कम खर्चा..
रिपोर्ट के अनुसार 2020-21 से 2024-25 तक सरकार ने हर साल कर्ज लिया। लेकिन, ठोस विकास और भविष्य की संपत्तियां बनाने में इसका आधा भी खर्चा नहीं किया। क्योंकि, कर्ज का आधा हिस्सा प्रशासनिक और दूसरे खर्चों में खत्म हो गया।
रिपेार्ट के अनुसार सरकार ने 2024-25 में 59,098 करोड़ का कर्ज लिया और उसमें से पूंजीगत खर्च 30,777 करोड़ ही किया। साल 2020-21 में सरकार ने 48,941 करोड़ का कर्ज लिया लेकिन पूंजीगत खर्च 15,271 करोड़ ही रहा था।
65 बार में लिया 75 हजार करोड़ के लांग टर्म कर्ज
कैग के अनुसार 2024-25 में सरकार ने 65 अलग अलग कर्ज लिए। कुल 75,185 करोड़ का कर्जा 7.4% से 7.65% की अलग-अलग ब्याज दर पर लिए गए। यह कर्ज 2032 से लेकर 2051 के बीच में चुकाए जाएंगे
अनुदान में 15,000 करोड़ की बढ़ोतरी
रिपोर्ट में बताया है कि पांच साल के दौरान स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं को दिए जाने वाले अनुदान में करीब 15,000 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020-21 में 39,745 करोड़ रुपए दिए गए थे जो 2024-25 में बढ़कर 54,819 करोड रुपए हो गए। पंचायत समितियां,नगर पालिकाओं और जिला परिषदों को 2024-25 में 4,819 करोड रुपए दिए गए। इसमें से जिला परिषदों को 7,940 करोड़, नगर पालिका और नगर निगम को 7,355 करोड़, ग्राम पंचायत और पंचायत समितियां को 12,313 करोड़ का अनुदान दिया गया।
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