इस साल की वैकेंसी नहीं कर पाएंगी स्कूलों का संकट दूर, शिक्षकों की भारी-भरकम कमी

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 1.19 लाख शिक्षकों की कमी है। सरकार ने इस साल भर्ती परीक्षों के लिए जो कैलेंडर जारी किया है, उसमें 18 फीसदी पद ही भर पाएंगें

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Purshottam Kumar Joshi
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Photograph: (the sootr)

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News In Short

  • राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कुल 1.19 लाख शिक्षकों की कमी
  • शिक्षा विभाग में 410485 शिक्षकों की स्ट्रेंथ, लेकिन 292263 कार्मिक ही कार्यरत
  • स्कूलों में सबसे अधिक वरिष्ठ अध्यापकों के 42170 पद खाली
  • स्कूलों में विभिन्न विषयों के 16828 लेक्चरार ही नहीं

News In Detail

राजस्थान के सरकारी स्कूल शिक्षकों की जबर्दस्त कमी से जूझ रहे हैं। गंभीर बात यह है कि इन्हें भरने के लिए शिक्षा विभाग कोई ठोस उपाय नहीं अपना रहा है। हालात यह है कि इस साल सरकार ने शिक्षा विभाग में भर्ती का जितना लक्ष्य रखा है, उसमें भी दूर—दूर तक यह कमी पूरी होती नहीं दिख रही है। सरकारी आकंड़ों के अनुसार प्रदेश के स्कूलों में 1.19 लाख शिक्षकों की कमी बनी हुई है। सवाल है कि शिक्षकों की भारी कमी के कारण स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बढ़ाने की उम्मीद कैसे की जाए।

यह स्थिति है सरकारी स्कूलों में शिक्षकों

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इस समय 410485 शिक्षकों की स्ट्रेंथ है। वर्तमान में इनमें से 292263 कार्मिक ही सेवारत हैं। इस तरह से प्रदेश के स्कूलों में 1 लाख 19 हजार 148 शिक्षकों की कमी है। देखा जाए तो इनमें वरिष्ठ अध्यापक और विभिन्न विषयों के लेक्चरारों का अधिक संकट है। 

सबसे अधिक पद वरिष्ठ अध्यापकों के खाली

शिक्षा विभाग में सबसे अधिक कमी वरिष्ठ अध्यापकों की है। इसके बाद स्कूल शिक्षा के लेक्चरारों की कमी है। सरकारी आंकड़ों को देखा जाए तो वर्तमान में वरिष्ठ अध्यापकों के 42170 पद खाली चल रहे हैं। इसी तरह स्कूलों में विभिन्न विषयों में 16828 लेक्चरारों की कमी है। बहुत सारे माध्यमिक स्कूलों में लेक्चरार नहीं होने से बच्चों को अपने स्तर पर ही संबंधित विषयों की पढ़ाई करनी पड़ रही है।

शाला प्रधान तक पूरे नहीं

प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्राचार्य और उसके समकक्ष के 19408 पद स्वीकृ​त हैं। लेकिन, स्थिति यह है कि वर्तमान में सिर्फ 13416 पद ही भरे हुए हैं। ऐसे में प्राचार्य के 5992 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह उप प्राचार्य के 12400 पद मंजूर हैं। इसकी तुलना में अभी सिर्फ 4934 पद ही भरे हुए हैं। उप प्राचार्य के 7466 पद रिक्त हैं। इसका मतलब यह हुआ कि रिक्त पदों पर इनसे नीचे के शिक्षकों को ही जिम्मेदारी दे रखी है। 

ज्यादातर स्कूलों में शिक्षक की कमी

प्रदेश में 70 हजार से अधिक सरकारी स्कूल हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि अधिकांश स्कूलों में स्ट्रेंथ के बराबर शिक्षक नहीं हैं। ज्यादातर स्कूल में किसी न किसी लेवल के शिक्षकों की कमी है। बहुत सारे माध्यमिक स्कूलों में वाइस प्रिंसिपल को प्रिंसिपल की प्रभार दे रखा है।

आगे क्या

सरकार ने इस साल के लिए भर्ती परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किया है। इस कैलेंडर के जरिए शिक्षा विभाग में विभिन्न कैडर के लगभग 20 हजार पदों के लिए वैकेंसी निकाली है। शिक्षा विभाग में जिस तरह से शिक्षकों की भारी—भरकम कमी है, उसमें सिर्फ 17 फीसदी ही पद भर पाएंगे। शिक्षक संगठनों का कहना है कि शिक्षा विभाग में खाली पदों को भरने के लिए जिस तरह की कवायद चल रही है, उसमें अगले पांच वर्ष में भी भरना मुश्किल हैं। वजह भी है, इस अवधि में रिटायर होने वाले शिक्षकों की संख्या भी काफी है। ऐसे में सरकार को इन पदों को भरने के लिए चरणबद्ध प्रयास करने होंगे। 

अभी बहुत चलना है आगे

हालांकि, पिछले परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 में राजस्थान के विद्यार्थियों के परिणाम ठीक—ठीक आए हैंं शैक्षिक आकलन में प्रदेश के विद्यार्थी भाषा व गणित में राष्ट्रीय स्तर से ऊपर रहे हैं। लेकिन, शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि विद्यार्थियों की ओवर ऑल परफोरमेंस सुधारने के लिए अधिक मेहनत की जरूरत है। इसके लिए न सिर्फ शिक्षकों की कमी को पूरा करना है, ​बल्कि बच्चों की उपस्थिति पर भी खास ध्यान देना होगा।

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राजस्थान शिक्षा विभाग सरकारी स्कूल शिक्षक की कमी
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