खनन से अरावली हो रही खोखली, पूर्वी राजस्थान के रेगिस्तान बनने का खतरा, रिपोर्ट में खुलासा

राजस्थान में अरावली पहाड़ियों में हो रहे खनन को लेकर संकला फाउंडेशन ने रिपोर्ट जारी कर दावा किया है कि अरावली पर्वतमाला में हो रही क्षति के कारण पूर्वी राजस्थान अर्ध-रेगिस्तान बन सकता है। खनन, अतिक्रमण और जंगल की कटाई से 25% क्षेत्र नष्ट हो चुका है।

author-image
Purshottam Kumar Joshi
New Update
arawali

Photograph: (the sootr)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

News In Short

  • संकला फाउंडेशन ने दिल्ली में 'इको रिस्टोरेशन ऑफ द अरावली लैंडस्केप' रिपोर्ट जारी की।

  • रिपोर्ट के अनुसार, अरावली पर्वतमाला का 60 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में स्थित है।

  • अरावली क्षेत्र जल सुरक्षा, कृषि और भविष्य की आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • खनन और अतिक्रमण के कारण अरावली के संरक्षण में भारी कमी आई है।

  • इसके परिणामस्वरूप पूरे क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

News In Detail

Jaipur. संकला फाउंडेशन ने दिल्ली में बुधवार को अपनी रिपोर्ट 'इको रिस्टोरेशन ऑफ द अरावली लैंडस्केप' जारी की, जिसमें राजस्थान के अरावली पर्वतमाला की गंभीर स्थिति को उजागर किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अरावली का 60 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में स्थित है और यह क्षेत्र जल सुरक्षा, कृषि, और भविष्य की आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण पर्वतमाला के संरक्षण में भारी कमी आई है, जिससे पूरे क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र पर बुरा असर पड़ रहा है।

अरावली क्षेत्र में क्षति और इसके कारण

रिपोर्ट के अनुसार, 1967-68 से अब तक राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के 25 प्रतिशत हिस्से में क्षति हो चुकी है। इसके कारण 31 पहाड़ियां पूरी तरह से समाप्त हो चुकी हैं। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की 2024 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि इस नुकसान के प्रमुख कारण खनन, अतिक्रमण, और वनों की अंधाधुंध कटाई हैं। ये कारक केवल अरावली पर्वतमाला को ही नहीं, बल्कि राजस्थान की जलवायु और जैव विविधता को भी प्रभावित कर रहे हैं।

अरावली पर्वतमाला का जल संसाधनों पर प्रभाव

अरावली क्षेत्र की क्षति से राजस्थान के प्रमुख जल स्रोतों पर असर पड़ा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अरावली नदियों जैसे चंबल, बनास, लूणी, माही और साबरमती की जननी है। इन पहाड़ियों के क्षरण से जल धाराओं की गति में कमी आई है, जिससे भू-जल रिचार्ज में गिरावट आई है और पानी की समस्या और भी गहरी हो गई है। इसके अलावा, सरिस्का टाइगर रिजर्व, कुंभलगढ़ और माउंट आबू जैसे प्रमुख अभयारण्यों की जैव विविधता भी प्रभावित हो रही है।

राजस्थान के लिए पुनर्जीवन की संभावनाएं

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राजस्थान में 5.5 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को इको-रिस्टोरेशन के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा सकता है। ओरण और देवबणी जैसी पारंपरिक संरक्षण प्रणालियां आज भी प्रभावी मॉडल के रूप में काम कर रही हैं। अगर इन प्रणालियों का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो अरावली पर्वतमाला को पुनः जीवन मिल सकता है।

अरावली ग्रीन वॉल परियोजना और इसका महत्व

रिपोर्ट में अरावली ग्रीन वॉल परियोजना का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें राजस्थान को 'कोर स्टेट' के रूप में चिन्हित किया गया है। ग्रीन वॉल का उद्देश्य अरावली पर्वतमाला को कमजोर होने से बचाना है। यदि ग्रीन वॉल कमजोर पड़ी तो पूरा कॉरिडोर टूट सकता है, जिससे मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ जाएगा।

खनन गतिविधियों के कारण नुकसान

राजस्थान में 2,400 से अधिक खनन लीजों के कारण अरावली क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। इन खनन लीजों से जल स्रोत टूटे, झीलें सूख गईं और पहाड़ियों का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ा। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही कई क्षेत्रों में खनन गतिविधियां बंद की गईं, लेकिन इससे पहले ही भारी नुकसान हो चुका था।

संकला फाउंडेशन की चेतावनी: मरुस्थलीकरण का खतरा

रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि अगर समय रहते इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए तो अरावली के कमजोर होने से थार मरुस्थल की रेत पूर्वी राजस्थान की ओर बढ़ सकती है। यह स्थिति पूरी तरह से अर्ध-रेगिस्तान की ओर अग्रसर हो सकती है। इस प्रकार, राजस्थान को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि इस संकट से बचा जा सके।

मुख्य बिंदू :

  • संकला फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, अरावली पर्वतमाला का 25% हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है और 31 पहाड़ियां पूरी तरह समाप्त हो गई हैं। खनन, अतिक्रमण और वनों की कटाई इसके प्रमुख कारण हैं। 
  • अरावली पर्वतमाला के क्षरण से प्रमुख जलधाराओं की गति धीमी हुई है, जिसके कारण जल स्रोत कमजोर पड़े हैं और भू-जल रिचार्ज में गिरावट आई है, जिससे पानी की समस्या गंभीर हो गई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में 5.5 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि को इको-रिस्टोरेशन के जरिए पुनर्जीवित किया जा सकता है, जिससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारने में मदद मिलेगी।

खबरें यह भी पढ़िए...

Weather Update: मध्यप्रदेश में हल्का कोहरा, राजस्थान में शीतलहर, छत्तीसगढ़ में सर्दी से रहात बरकरार

राजस्थान रोडवेज की बसों में सात दिन करें निःशुल्क यात्रा, परिवहन निगम का बड़ा ऐलान

राजस्थान में कांग्रेस का पीछा नहीं छोड़ रहा भ्रष्टाचार, कई नेताओं या उनके परिवार पर उठी अंगुली

राजस्थान में 20.36 लाख लोगों की पेंशन रोकी, समय पर नहीं हो पाया वेरिफिकेशन

राजस्थान रेगिस्तान अरावली पर्वतमाला संकला फाउंडेशन
Advertisment