राजस्थान हाई कोर्ट सख्त: 12 साल पुराने आदेश की पालना नहीं, पंचायती राज सचिव को बुलाया
Jageshwar prasad | Sept 20, 2026, 08:14 IST
पंचायती राज सचिव को हाजिर होने का आदेश
पंचायती राज सचिव को हाजिर होने का आदेश
राजस्थान हाई कोर्ट ने 12 साल पुराने आदेश की पालना न होने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने दो सप्ताह में पालना रिपोर्ट मांगी है। ऐसा न होने पर पंचायती राज सचिव को हाजिर होना पड़ेगा। मामला एक पूर्व ग्राम सेवक की वरिष्ठता से जुड़ा है।
समझें क्या है पूरा मामला
- 12 साल से आदेश की पालना नहीं, हाई कोर्ट सख्त।
- पंचायती राज सचिव को हाजिर होने का आदेश।
- पूर्व ग्राम सेवक की वरिष्ठता का मामला।
- दो सप्ताह में पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा।
- जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने दिया आदेश।
अदालत ने साफ कहा है कि अगर इस दौरान आदेश की पालना नहीं होती है तो पंचायती राज सचिव को हाजिर होकर जवाब देना पड़ेगा। यह आदेश जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने दिया है। पीठ ने यह फैसला अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
क्या है पूरा मामला?
इस गलती का बड़ा असर हुआ। प्रार्थी से जूनियर ग्राम सेवक सीनियर हो गए। इसी आधार पर उन्हें पदोन्नति भी दी गई। इससे प्रार्थी को नुकसान उठाना पड़ा। उसने 2013 में इस फैसले को चुनौती दी।
अधिकरण ने सुनाया था फैसला
लेकिन आदेश की पालना नहीं हुई। इस पर अधिकरण ने इसे अवमानना माना। अधिकरण ने 2023 में मामला हाई कोर्ट को रेफर कर दिया। इस बीच राज्य सरकार ने उसकी सीनियरिटी तो निर्धारित कर दी। लेकिन पदोन्नति नहीं दी गई।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि उससे जूनियर कई कर्मचारी पदोन्नत हो गए। वे विकास अधिकारी बन गए। लेकिन उसे 12 साल से पदोन्नति नहीं मिल पाई। उसने कोर्ट से आदेश का पालन कराने की मांग की। कोर्ट ने इस मांग को सही माना।
कोर्ट का सख्त रुख
अब सरकार को दो सप्ताह में जवाब देना है। उसे पालना रिपोर्ट पेश करनी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पंचायती राज सचिव को कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।
अवमानना का मतलब
12 साल का इंतजार
यह मामला कर्मचारियों के लिए बड़ा संदेश है। कोर्ट के आदेश की पालना जरूरी है। विभागीय लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। अगर आदेश नहीं माना गया तो अधिकारियों को कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।
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