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Photograph: (the sootr)
News In Shotr
- हाई कोर्ट का मुख्य सचिव को जर्जर स्कूल बिल्डिगों की मरम्मत का रोडमैप पेश करने के निर्देश।
- न्याय मित्र एडवोकेट की दलील, बजट की कमी बताकर दायित्वों से नहीं झाड़ सकते पल्ला।
- शिक्षा का अधिकार संविधान के तहत मौलिक अधिकार, नहीं बच सकती है सरकार।
- जर्जर स्कूल बिल्डिगों में बच्चों का जीवन खतरे में तो संविधानिक अधिकार का हनन।
- झालावाड़ हादसे के बाद कोर्ट दो अलग-अलग याचिकाओं पर कर रही है सुनवाई।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को यह हलफनामा देने को कहा है, जिसमें प्रदेश के जर्जर स्कूल भवनों को ठीक करवाने की टाइमलाइन का स्पष्ट रोड-मैप हो। हाई कोर्ट ने यह निर्देश स्कूलों के जर्जर भवनों पर गुरुवार को स्व:प्रेरणा से दर्ज जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। पिछले साल जुलाई में झालावाड़ में स्कूल भवन गिरने से 7 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद कोर्ट ने अलग-अलग दो प्रसंज्ञान लिए थे। इन पर दर्ज जनहित याचिका पर स्पेशल बैंच सुनवाई कर रही है।
दायित्वों ने नहीं झाड़ सकती है पल्ला
सुनवाई के दौरान न्याय मित्र एडवोकेट एसएस होरा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार बजट की कमी के कारण अपने संविधानिक दायित्वों से पल्ला नहीं झाड़ सकती। संविधान के अनुसार शिक्षा का अधिकार मूलभूत अधिकार है। जर्जर स्कूल भवनों के कारण बच्चों का जीवन खतरे में है। साथ ही यह संविधानिक अधिकार का स्पष्ट रुप से उल्लंघन भी है।
इतनी सुस्त क्यों है सरकार
नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स की ओर से एडवोकेट वागीश सिंह ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार की ओर से अब तक पेश किए गए प्लान संतोषजनक नहीं है। इस पर अदालत ने सरकार की सुस्ती पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को हलफनामे पर प्रदेश के सभी जर्जर स्कूल बिल्डिंग को ठीक करवाने का स्पष्ट रोड—मैप पेश करने के निर्देश दिए।
मौत के साये में नहीं पढ़ें बच्चे इसलिए
सुनवाई के दौरान जस्टिस महेंद्र गोयल व जस्टिस अशोक कुमार जैन ने बच्चों को मौत के साये में पढ़ाई से बचाने के लिए स्कूल बिल्डिगों की वास्तविक स्थिति जानने स्वतंत्र जांच करवाने की मंशा जताई है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों की एक स्वतंत्र पक्ष के से इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट करवाई जाएगी। इसके लिए कोर्ट एक विशेष कमेटी गठित करने पर भी विचार कर रही है। यह कमेटी सीधे कोर्ट को रिपोर्ट करेगी।
अगली सुनवाई 19 मार्च को
पिछले साल जुलाई में झालावाड़ जिले में हुए हादसे में 7 स्कूली बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इस मामले में हाई कोर्ट ने अलग-अलग दो प्रसंज्ञान लिए थे। इन पर दर्ज जनहित याचिका पर स्पेशल बैंच सुनवाई कर रही है। मामले में अगली सुनवाई 19 मार्च केा होगी।
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