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Photograph: (the sootr)
News In Short
- राजस्थान हाईकोर्ट ने काला हिरण शिकार मामले की सुनवाई से जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने इनकार किया।
- मामले की अगली सुनवाई अब दूसरी बेंच करेगी।
- सलमान खान को काले हिरण शिकार मामले में दोषी ठहराया गया था, लेकिन सह-आरोपी बरी हो गए थे।
- राज्य सरकार ने सह-आरोपियों को बरी करने के खिलाफ हाईकोर्ट में 'लीव टू अपील' दायर की थी।
- सलमान खान के वकीलों ने ट्रांसफर पिटीशन दायर कर दोनों मामलों को एक साथ सुनवाई की मांग की थी।
News In Detail
राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने फिल्म अभिनेता सलमान खान से जुड़े चर्चित काला हिरण शिकार मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने सोमवार को कहा कि इस मामले की सुनवाई किसी अन्य बेंच को सौंपी जाए। अब इस मामले की अगली सुनवाई दूसरी बेंच करेगी, जिससे यह मामला कानूनी रूप से और लंबा खींच सकता है।
यह है काले हिरण का शिकार मामला
यह मामला 1998 का है। तब फिल्म अभिनेता सलमान खान और अन्य फिल्मी कलाकारों पर जोधपुर में कांकाणी गांव के पास काले हिरणों का शिकार करने के आरोप लगे। फिल्म 'हम साथ साथ हैं' की शूटिंग के दौरान यह घटना घटित हुई थी, जिसमें सलमान खान पर दो काले हिरणों का शिकार करने का आरोप लगा। निचली अदालत ने सलमान खान को दोषी मानते हुए पांच साल के कारावास और 25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया था।
सह-आरोपियों को किया गया बरी
हालांकि, सह-आरोपियों सैफ अली खान, नीलम, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और दुष्यंत सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था। राज्य सरकार ने इन कलाकारों को बरी किए जाने के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में 'लीव टू अपील' (Leave to Appeal) के माध्यम से चुनौती दी थी।
ट्रांसफर पिटीशन और कोर्ट की कार्यवाही
सलमान खान के वकीलों ने पूर्व में एक ट्रांसफर पिटीशन दायर की थी, जिससे उनकी सजा के खिलाफ लंबित अपील को राज्य सरकार की अपील के साथ जोड़कर एक साथ सुना जा सके। इस पर जस्टिस मनोज कुमार गर्ग ने हाल ही में निर्देश दिया था कि तकनीकी कारणों से रुकी इस प्रक्रिया को पूरा किया जाए और दोनों प्रकरणों को संयुक्त रूप से लिस्ट किया जाए।
राजस्थान सरकार ने दायर की थी लीव टू अपील
सरकार ने इस प्रकरण में अपील करने की समय सीमा के भीतर कोई अपील दायर नहीं की थी। बाद में सरकार द्वारा बरी किए गए इन्हीं कलाकारों के खिलाफ 'लीव टू अपील' (Leave to Appeal) याचिका दायर की गई, जो कोर्ट में स्वीकार की गई।
लीव टू अपील क्या है?
लीव टू अपील वह कानूनी प्रक्रिया है जब किसी केस में अपील की सामान्य समय सीमा बीत चुकी हो। इसमें कोर्ट से अनुमति लेकर ही अपील दायर की जा सकती है। कांकाणी शिकार मामले में यह प्रक्रिया सरकार ने अपनाई है।
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