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Photograph: (the sootr)
News In Short
- घटिया दवा विक्रेता को बचाने वाले ड्रग कंट्रोलर को हाई कोर्ट से राहत नहीं।
- चार्जशीट देने के स्तर पर अदालतें नहीं कर सकतीं मिनी ट्रायल।
- अमानक दवा बेचने वाले को बचाने और क्षेत्राधिकार से बाहर काम करने के आरोप
- हाई कोर्ट ने राजाराम की दोनों याचिकाओं को किया खारिज।
- राजाराम ने अपने खिलाफ जांच को हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
News In Detail
राजस्थान हाई कोर्ट ने अमानक दवा बेचने वाली फर्म की जांच नहीं करने के आरोपी तत्कालीन ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने अमानक दवाओं के मुकदमे चलाने में केंद्र सरकार की गाइडलाइन में छूट देने की सिफारिश के मामले में चल रही कार्यवाही में भी दखल देने से मना कर दिया। जस्टिस आनंद शर्मा ने राजाराम शर्मा की दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
अमानक दवा बेचने वाले को बचा रहा था
तत्कालीन ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा पर आरोप है कि उसने श्रीगंगानगर में अमानक दवा बेचने वाली 31 फर्म की जांच के निर्देश नहीं दिए। उल्टे इस फर्म से दवाएं नहीं खरीदने वाली जोधपुर की फर्म अजूता एंटरप्राइजेज और इससे दवा खरीदने वाली फर्मों की जांच करवा दी। असलियत में अजूता एंटरप्राइजेज ने श्रीगंगानगर की न्यू मेडिसिन पाइंट से कोई दवा खरीदी ही नहीं थी और ना ही उसके पास से अमानक दवाओं का स्टॉक ​बरामद हुआ था। इस मामले में राजाराम को चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग ने 18 सितंबर, 2023 को चार्जशीट दी। बाद में 29 अक्टूबर, 2025 को इस मामले में जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
इसलिए रद्ध हो चार्जशीट
राजाराम शर्मा ने याचिका दायर कर कहा कि मामले में पहले ही जांच हो चुकी है। एसीबी भी इस मामले को बंद कर चुकी है। मामले में कोई गड़बड़ी नहीं थी। पांच साल की देरी से फिर उसी मामले में चार्जशीट देना व जांच करना पूर्वाग्रह है। इसलिए चार्जशीट व जांच अधिकारी की नियुक्ति को निरस्त किया जाए।
कोई गलती नहीं है
सरकार की ओर से एडवोकेट अर्चित बोहरा ने कोर्ट को कहा कि इस मामले में नोटिस व अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरु करने में देरी से प्रा​र्थी के बचाव के अवसरों में कोई कमी नहीं हुई है। ना ही कार्यवाही में पूर्वाग्रह होने के बारे में पुख्ता कारण बता सका है। अमानक दवा बेचने वाले दवा विक्रेता के खिलाफ जांच व कार्रवाई के आदेश नहीं देना घोर लापरवाही व गंभीर दुराचरण है। कोर्ट ने मामले में कोई राहत देने से इनकार करते हुए यह याचिका खारिज कर दी है।
ड्रग कंट्रोलर नहीं हड़प सकता सरकार की शक्तियां
केंद्र सरकार ने अमानक दवा विक्रेताओं के विरुद्ध मुकदमे चलाने के लिए राज्यों को गाइडलाइन जारी कर रखी हैं। इनको मानना व इनके अनुसार काम करना राज्य सरकारों के लिए बाध्यकारी है। राजाराम शर्मा ने ड्रग कंट्रोलर की हैसियत से बिना किसी सरकारी मंजूरी के इन गाइडलाइन पर पुनर्विचार के लिए एक कमेटी गठित कर दी।
कमेटी ने गाइडलाइन में छूट देने की सिफारिश कर दी। एक जुलाई, 2020 को राज्य सरकार की मंजूरी व जानकारी बिना सीधे ही ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के जरिए सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन को भेज दी। इसके साथ ही अमानक व घटिया दवा के पहले से चल रहे मुकदमों में भी सिफारिश के अनुरुप ही काम करने को कहा।
सरकार ने थमाई चार्जशीट
सरकार ने माना कि राजाराम ने न केवल क्षेत्राधिकार से बाहर काम किया है, बल्कि पद का दुरुपयोग करके मुकदमे चलाने की मंजूरी नहीं देकर घटिया दवा बेचने वालों को सीधा फायदा पहुंचाया है। 2021 में सरकार ने शर्मा को कारण बताओ नोटिस दिया। जवाब मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर विचार के बाद 19 दिसंबर, 2022 को चार्जशीट दी।
सरकार ने मामले में 29 अक्टूबर,2025 को जांच अधिकारी नियुक्त किया। शर्मा ने याचिका में चार्जशीट व जांच अधिकारी नियुक्ति रद्ध करने की गुहार की। इसके लिए उसे देरी को मुख्य कारण बताते हुए कहा कि केंद्र की गाइड लाइन बाध्यकारी नहीं है। इसलिए बतौर ड्रग कंट्रोलर उनके संशोधन किया जा सकता है।
सरकार की भूमिका नहीं हड़प सकता
सरकार की ओर से एडवोकेट अर्चित बोहरा ने कोर्ट को बताया कि अमानक दवाओं के मामले में कार्यवाही करने की केंद्र सरकार की गाइड लाइन राज्यों के लिए बाध्यकारी है। इसमें मनमर्जी नहीं हो सकती। किसी ड्रग कंट्रोलर को इन गाइड लाइन में छूट देने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद राजाराम ने बिना राज्य सरकार की मंजूरी के गाइड लाइन पर पुनर्विचार के लिए ना केवल कमेटी बनाई, बल्कि सीधे ही केंद्रीय एजेंसी को भी सिफारिशें भेज दी।
ड्रग कंट्रोलर राज्य सरकार की भूमिका व अधिकार नहीं हड़प सकता। सरकार से अर्थ प्रमुख सचिव या सचिव स्तर का अधिकार होता है ना की किसी विभाग का मुखिया। इसलिए राजाराम का केंद्रीय गाइड लाइन पर पुनर्विचार के लिए कमेटी गठित करने व केंद्रीय ऐजेंसी को भेजना गैर-कानूनी है।
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