चतुर्थ श्रेणी भर्ती में 0.0033 कट-ऑफ पर तमतमाया कोर्ट, सरकार से पूछा-क्या बिना दिमाग वाले कर्मचारी चाहिए?

राजस्थान में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में जीरो नंबर पाने वाला एक कैंडीडेट नौकरी के लिए हाई कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने इसे हैरानी वाला मामला बताया है।

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Mukesh Sharma
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Photograph: (the sootr)

News In Short

  • चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में 0.0033 कट-ऑफ पर भड़का हाई कोर्ट। 
  • जीरो नंबर वाला कैंडीडेट नौकरी पाने के लिए पहुंचा हाई कोर्ट।   
  • कोर्ट ने सरकार से पूछा- क्या आपको बिना दिमाग वाले कर्मचारी चाहिए।  
  • कोर्ट की नसीहत-सरकार को न्यूनतम मापदंड की पालना तो करनी ही चाहिए 
  • कोर्ट की टिप्पणी-नेगेटिव या शून्य अंक वाले को कैसे मान सकते हैं योग्य ! 

News In Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने कर्मचारी चयन बोर्ड की चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में कुछ रिजर्व कैटेगरी की कट-ऑफ जीरो से भी नीचे 0.0033 होने पर आश्चर्य जताया है। कोर्ट के लिए इससे भी ज्यादा हैरानी की स्थिति तब हुई, जब नेगेटिव यानी जीरो से भी कम अंक वाला रिजर्व कैटेगरी का एक कैंडीडेट नौकरी नहीं मिलने पर शिकायत लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया।    

​'ज़ीरो' नंबर पर सरकारी नौकरी की रेस

याचिकाकर्ता विनोद कुमार का कहना था कि कुछ रिजर्व कैटेगरी के कट ऑफ 0.0033 आई है। उसे नेगटिव यानी जीरो से भी कम नंबर मिलने के आधार पर नियुक्ति के लायक नहीं माना है। दूसरी ओर, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती परीक्षा में न्यूनतम प्राप्तांक तय ही नहीं है। ऐसे में वह भी नियुक्ति के योग्य है, इसलिए बोर्ड को नियुक्ति देने के आदेश दिए जाएं। कोर्ट ने इस मामले को सरकारी भर्तियों के गिरते स्तर और चयन प्रक्रिया की विसंगतियों का गंभीर मामला माना है।

कुछ तो बेसिक स्टैंडर्ड रखने होंगे

​जस्टिस आनंद शर्मा ने इसे बेहद चौंकाने वाला मामला बताते हुए कहा है कि चाहे पद चतुर्थ श्रेणी का ही क्यों न हो, लेकिन सरकारी सेवा में एक 'बेसिक स्टैंडर्ड' होना अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार से यह अपेक्षा की जाती है कि वह भर्ती में न्यूनतम मानक तो सुनिश्चित करे। जो व्यक्ति शून्य या नेगेटिव अंक लाता है, उसे किसी भी पद के लिए उपयुक्त कैसे माना जा सकता है? सरकार को न्यूनतम मापदंडों की पालना तो करनी ही चाहिए, जिससे चयन होने वाला कैंडीडेट मूल काम तो संतोषजनक तरीक से कर सके। 

या तो पेपर बहुत कठिन या मानक बहुत कमजोर

​कोर्ट ने कहा है कि इस विसंगति के दो संभावित कारण हो सकते हैं। या तो परीक्षा का पेपर बेवजह कठिन था या फिर भर्ती के मानक जानबूझकर इतने नीचे रखे गए कि योग्यता का कोई अर्थ ही न रहे। कोर्ट ने दोनों ही स्थितियों को अस्वीकार्य बताया है। न्यूनतम उत्तीर्ण अंक तय न करने के पीछे सरकार ने कोई ठोस कारण भी नहीं बताया है।

प्रमुख सेक्रेटरी को शपथ पत्र पेश करने का आदेश

कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर को जीएडी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी के शपथ पत्र पर ऐसी आपत्तिजनक स्थिति उत्पन्न होने के कारण और इनमें सुधार के उपाय बताने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि यदि जवाब संतोषप्रद नहीं हुआ तो विपरीत निष्कर्ष निकालकर सख्त आदेश देगी। मामले में अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी।

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आनंद शर्मा राजस्थान हाई कोर्ट जीरो नंबर वाला कैंडीडेट चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती
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