पाठक और राजपुरोहित की वापसी के लिए लिखा केंद्र को पत्र, नौकरशाही में बड़े बदलाव की तैयारी

राजस्थान के दो आईएएस कृष्णकांत पाठक और प्रकाश राजपुरोहित को प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखा है।

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Purshottam Kumar Joshi
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IAS Rajasthan

Photograph: (the sootr)

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News In Short

  • आईएएस कृष्णकांत पाठक और प्रकाश राजपुरोहित को केंद्र से वापस बुलाने के लिए लिखा पत्र 
  • पाठक अभी पीएनजीआरबी के सचिव, जबकि राजपुरोहित पीएमओ में हैं संयुक्त सचिव
  • योजनाओं को धरातल पर लाने के लिए दोनों अफसरों की जरूरत
  • दोनों अफसर आते हैं तो भजनलाल सरकार को मिलेगी मजबूती
  • राजस्थान की नौकरशाही में निकट भविष्य बड़े बदलाव किए जाने की तैयारी

News in detail

जयपुर। राजस्थान सरकार ने दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर गए दो आईएएस अधिकारियों कृष्णकांत पाठक और प्रकाश राजपुरोहित को वापस बुलाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए कार्मिक विभाग ने केंद्र सरकार को चिट्ठी भेजी है। यह प्रदेश की टॉप नौकरशाही में बड़े बदलाव और सत्ता के गलियारों में शक्ति संतुलन की नई तैयारी का स्पष्ट संकेत है।

पाठक अभी पीएनजीआरबी के सचिव

तेजतर्रार अधिकारी की पहचान रखने वाले 2001 बैच के आईएएस अधिकारी केके पाठक अभी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के सचिव हैं। उन्हें फरवरी 2024 में प्रतिनियुक्ति पर केंद्र भेजा गया था। पाठक के पास वित्त, राजस्व और उद्योग जैसे भारी-भरकम विभागों को संभालने का लंबा अनुभव है। बताया जाता है कि भजनलाल सरकार को इनकी कमी महसूस हो रही है।

राजपुरोहित पीएमओ में हैं संयुक्त सचिव

दूसरी ओर, 2010 बैच के आईएएस प्रकाश राजपुरोहित वर्तमान में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में संयुक्त सचिव हैं। उनकी गिनती राजस्थान में सबसे सक्षम युवा अधिकारियों में रही है। जून 2024 में दिल्ली जाने से पहले उन्होंने जयपुर कलेक्टर के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई थी। वे तकनीकी प्रबंधन और डेटा-आधारित प्रशासन में बेहद दक्ष माने जाते हैं। उनकी कौशलता को देखते हुए राज्य सरकार उन्हें वापस बुलाकर सीएमओ या किसी बड़े प्रोजेक्ट की कमान सौंपने की योजना बना रही है।

एमओयू को धरातल पर लाने का समय

वरिष्ठ पत्रकार महेश झालानी का कहना है कि मौजूदा समय राजस्थान के लिए प्रशासनिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रदेश में 'राइजिंग राजस्थान' जैसे कार्यक्रमों के बाद अब समय उन एमओयू को धरातल पर लाने का है, जिसके लिए पाठक जैसे अनुभवी नीति-निर्माताओं की जरूरत है। साथ ही राज्य में चल रहे विभागीय पुनर्गठन और नई फ्लैगशिप योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए प्रकाश राजपुरोहित जैसे फील्ड एक्सपर्ट की कमी खल रही है। उधर, सरकार को भी उम्मीद है कि दिल्ली का अनुभव प्राप्त कर चुके ये अधिकारी अब राज्य के विकास की गति को दोगुना करने में सेतु का कार्य करेंगे।

दोनों अफसर आते हैं तो मिलेगी मजबूती

झालानी के मुताबिक पत्र भेजने से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में राजस्थान की नौकरशाही और सीएमओ में एक बड़ा फेरबदल तय है। अगर केंद्र सरकार इन्हें समय से पूर्व कार्यमुक्त करती है, तो यह राज्य की 'कोर टीम' को मजबूती देगा। साथ ही शासन की कार्यशैली में एक नई ऊर्जा का संचार होगा। 

प्रशासनिक कसावट की तैयारी

पाठक और राजपुरोहित की वापसी के लिए प्रयास प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी को अधिक धार देने की दिशा में अहम कदम है। प्रदेश में जल्द ही बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हो सकता है। इसी दृष्टि से दोनों अधिकारियों का प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाने की प्रक्रिया अपनाई गई है। स़ूत्रों के अनुसार बजट सत्र से पहले या इसके बाद टॉप आईएएस की जिम्मेदारियों में बदलाव ला सकती है।

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