पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल बन गए थे भ्रष्टाचार के सिंडिकेट का मुख्य चेहरा, जानिए कैसे दिया घोटाले को अंजाम
Mukesh Sharma | Feb 25, 2026, 17:45 IST
Photograph: (the sootr)
जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाना था, राजस्थान में पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल जैसे अफसरों ने इसे 'धन उगाही मिशन' बना दिया। 'द सूत्र' को मिली ईडी की रिपोर्ट में बताया गया कि किस तरह अग्रवाल भ्रष्टाचार के सिंडीकेट का अहम चेहरा बन गए।
News In Short
- ईडी की रिपोर्ट के बाद ही पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल एसीबी की रडार पर आए।
- ईडी ने सरकार को भेजी रिपोर्ट में माना कि सुबोध हैं भ्रष्टाचार की अहम कड़ी।
- जल जीवन मिशन घोटले में सुबोध अग्रवाल दागी कंपनियों पर पूरे मेहरबान रहे।
- रिटायर्ड जलदाय अभियंता के बयान के बाद ही सुबोध पर एसीबी ने शिकंजा कसा।
- 'द सूत्र' के हाथ आए ईडी की रिपोर्ट के महत्वपूर्ण पेज।
News In Detail
चेतावनी दरकिनार, फाइलों पर दबाया सच
हैरानी की बात यह है कि इन स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद सुबोध अग्रवाल ने उन विसंगतियों की पूर्ण जांच कराने के बजाय मामले को केवल औपचारिकता के लिए आगे बढ़ा दिया। रिपोर्ट कहती है कि अग्रवाल ने इन नोटिसों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे फर्जीवाड़े को फलने-फूलने का मौका मिला।
277 करोड़ के टेंडर और 'मैनेज्ड' वेरिफिकेशन का खेल
सक्सेना को निर्देश दिया गया था कि वह श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्र की पॉजिटिव वेरिफिकेशन रिपोर्ट दें। इसी मनगढ़ंत और दबाव में तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर सुबोध अग्रवाल की अध्यक्षता वाली वित्तीय समिति ने इस दागी फर्म को 277.8 करोड़ रुपये के चार बड़े टेंडर जारी कर दिए।
नोटिस के बाद भी जारी रही करोड़ों की बंदरबांट
श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी को 123.66 करोड़ रुपये और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी को 23.61 करोड़ रुपए दिए गए। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि सुबोध अग्रवाल ने उन अन्य कार्य अनुभव प्रमाणपत्रों के सत्यापन का कोई प्रयास नहीं किया, जिन्हें कानूनी नोटिस में फर्जी बताया गया था। यह सीधे तौर पर लापरवाही और घोटालेबाजों को संरक्षण देने की ओर इशारा करता है
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नेताओं और अफसरों का अपवित्र गठबंधन
सुबोध अग्रवाल की भूमिका संदिग्ध
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