पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल बन गए थे भ्रष्टाचार के सिंडिकेट का मुख्य चेहरा, ​जानिए कैसे दिया घोटाले को अंजाम

जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाना था, राजस्थान में पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल जैसे अफसरों ने इसे 'धन उगाही मिशन' बना दिया। 'द सूत्र' को मिली ईडी की रिपोर्ट में बताया गया कि किस तरह अग्रवाल भ्रष्टाचार के सिंडीकेट का अहम चेहरा बन गए।

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Mukesh Sharma
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News In Short

  • ईडी की रिपोर्ट के बाद ही पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल एसीबी की रडार पर आए।
  • ईडी ने सरकार को भेजी रिपोर्ट में माना कि सुबोध हैं भ्रष्टाचार की अहम कड़ी।
  • जल जीवन मिशन घोटले में सुबोध अग्रवाल दागी कंपनियों पर पूरे मेहरबान रहे।  
  • रिटायर्ड जलदाय अभियंता के बयान के बाद ही सुबोध पर एसीबी ने शिकंजा कसा।
  • 'द सूत्र' के हाथ आए ईडी की रिपोर्ट के महत्वपूर्ण पेज।

News In Detail

राजस्थान के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाला में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट के बाद ही रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के रडार पर आए। ईडी ने सरकार को भेजी अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल की भूमिका को मुख्य घेरे में लिया। जांच में यह अहम तथ्य आया कि अग्रवाल को घोटाले की स्पष्ट जानकारी मिल गई थी, लेकिन उन्होंने न केवल भ्रष्टाचार से आंखें मूंद लीं, बल्कि दागी कंपनियों पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये लुटाने का रास्ता भी साफ किया। रिपोर्ट के कुछ अहम हिस्से 'द सूत्र' के पास हैं।

चेतावनी दरकिनार, फाइलों पर दबाया सच

​ईडी दस्तावेजों के अनुसार मार्च 2023 में वकील महेश कुमार कलवानिया ने तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल को तीन अलग-अलग कानूनी नोटिस भेजे थे। इन नोटिसों में श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी द्वारा निविदा प्रक्रिया में की गई भारी गड़बड़ियों और फर्जी प्रमाणपत्रों के उपयोग का विस्तार से उल्लेख किया गया था।

हैरानी की बात यह है कि इन स्पष्ट चेतावनियों के बावजूद सुबोध अग्रवाल ने उन विसंगतियों की पूर्ण जांच कराने के बजाय मामले को केवल औपचारिकता के लिए आगे बढ़ा दिया। रिपोर्ट कहती है कि अग्रवाल ने इन नोटिसों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे फर्जीवाड़े को फलने-फूलने का मौका मिला।

​277 करोड़ के टेंडर और 'मैनेज्ड' वेरिफिकेशन का खेल

​दस्तावेजों में एक चौंकाने वाला खुलासा शहपुरा के तत्कालीन अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना के बयान से हुआ है। सक्सेना ने पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयान में स्वीकार किया कि उन पर सुबोध अग्रवाल, रमेश चंद मीणा और अन्य वरिष्ठ अफसरों द्वारा दबाव बनाया गया था। 

​सक्सेना को निर्देश दिया गया था कि वह श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी द्वारा जमा किए गए प्रमाणपत्र की पॉजिटिव वेरिफिकेशन रिपोर्ट दें। ​इसी मनगढ़ंत और दबाव में तैयार की गई रिपोर्ट के आधार पर सुबोध अग्रवाल की अध्यक्षता वाली वित्तीय समिति ने इस दागी फर्म को 277.8 करोड़ रुपये के चार बड़े टेंडर जारी कर दिए।

​नोटिस के बाद भी जारी रही करोड़ों की बंदरबांट

ईडी की जांच में सबसे गंभीर वित्तीय अनियमितता यह सामने आई है कि कानूनी नोटिस मिलने के बाद भी इन कंपनियों को भुगतान रोका नहीं गया। बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण से पता चला कि 16 मार्च 2023 (नोटिस प्राप्ति की तिथि) के बाद भी पीएचईडी विभाग द्वारा इन फर्मों को नियमित रूप से धन वितरित किया गया। 

श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी को 123.66 करोड़ रुपये और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी को 23.61 करोड़ रुपए दिए गए। ​रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि सुबोध अग्रवाल ने उन अन्य कार्य अनुभव प्रमाणपत्रों के सत्यापन का कोई प्रयास नहीं किया, जिन्हें कानूनी नोटिस में फर्जी बताया गया था। यह सीधे तौर पर लापरवाही और घोटालेबाजों को संरक्षण देने की ओर इशारा करता है

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​नेताओं और अफसरों का अपवित्र गठबंधन

​ईडी की रिपोर्ट सिर्फ सुबोध अग्रवाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभाग के तत्कालीन मंत्री महेश जोशी और उनके करीबियों की भूमिका पर भी सवाल उठाती है। रिपोर्ट के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में फर्जीवाड़े के लिए ऊपर से नीचे तक एक तंत्र काम कर रहा था, जिसमें निजी बिचौलियों की भी अहम भूमिका थी।

सुबोध अग्रवाल की भूमिका संदिग्ध

ईडी के इस दस्तावेज ने साफ कर दिया है कि जेजेएम घोटाला केवल तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि शीर्ष स्तर पर बैठे अधिकारियों की मिलीभगत का परिणाम था। सुबोध अग्रवाल भ्रष्टाचार के सिंडीकेट का वो चेहरा बन गए, जिन्होंने भ्रष्टाचार की सारी सीमाएं लांघ दी। ​वर्तमान में यह रिपोर्ट राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों के पास है। अग्रवाल  अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए एसीबी जगह-जगह छापे मार रही है। इस मामले में अब तक 10 बड़े अधिकारी एसीबी की गिरफ्त में आ गए हैं।

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भ्रष्टाचार के सिंडीकेट एसीबी सरकार जल जीवन मिशन घोटाला प्रवर्तन निदेशालय रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल
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