राजस्थान की चिट्ठी: कहीं अरावली का उठा सवाल, कहीं सियासत का बवाल
Saurabh Mishra | Sept 12, 2026, 17:00 IST
राजस्थान की चिट्ठी
राजस्थान की सियासत को निकाय चुनाव ने पूरे हफ्ते दौड़ाए रखा, तो मिर्जापुर फिल्म के 'शूरवीर' गाने ने भी माहौल गरमाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अरावली पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती.. राजस्थान की चिट्ठी में इस बार इन सभी खबरों पर बात।
राजस्थान की चिट्ठी
प्रिय राजस्थान,
इस हफ्ते तुम्हें दूर से देखो तो लगता है जैसे एक साथ कई कहानियां किरदारों के बीच दौड़ रही हों। कहीं अरावली पहाड़ियां सुप्रीम कोर्ट में अपनी उम्र और पहचान का हिसाब दे रही थीं, कहीं सचिन पायलट राजस्थान से पंजाब की सियासत में नई जिम्मेदारी लेकर निकल पड़े।
उधर ‘शूरवीर’ के सुरों ने महाराणा प्रताप की धरती पर ऐसी तान छेड़ी कि बात सिल्वर स्क्रीन से निकलकर मरुधरा की संस्कृति और सम्मान तक पहुंच गई। और जयपुर की जेल से लेकर करधनी के एक घर तक ऐसी खबर आई, जिसने ठहरकर सोचने पर मजबूर कर दिया।
चलो, एक-एक करके तुम्हारी इस हफ्ते की कहानी सुनते हैं...
राजस्थान, तुम्हारी अरावली कोई साधारण पर्वत श्रृंखला नहीं। यह मरुधरा की सदियों पुरानी पहचान है। रेगिस्तान के फैलाव को रोकने से लेकर पर्यावरण और पानी तक, इसकी कहानी बहुत लंबी है। अब इसी अरावली की परिभाषा और हद तय करने का मामला सुप्रीम कोर्ट में है और सर्वोच्च न्यायालय ने इस बार हाई पावर्ड कमेटी को साफ कर दिया कि अब और मोहलत नहीं मिलेगी।
हाई-पावर्ड कमेटी ने अरावली पर्वतमाला को लेकर तैयार हो रही रिपोर्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने की मोहलत और मांगी थी। यानी फरवरी 2027 तक का वक्त। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूर नहीं किया और 30 नवंबर 2026 तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश सुना दिया।
अदालत ने यह भी साफ किया कि आगे कोई विस्तार नहीं मिलेगा। CJI जस्टिस सूर्यकांत ने साफ कर दिया कि अगर कमेटी सक्षम नहीं तो हम नए सिरे से इसका गठन कर सकते हैं। बात साफ थी कि आगे कोई विस्तार नहीं मिलेगा।
मतलब कहानी अब सिर्फ पहाड़ों की नहीं। रिपोर्ट तय करेगी कि अरावली की पहचान किस हद तक मानी जाए और उसका असर खनन, निर्माण, जमीन के इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण पर कितना पड़ेगा। राजस्थान में अरावली का मतलब सिर्फ पत्थर और पहाड़ नहीं। यह पानी, जंगल, जमीन और आने वाली पीढ़ियों का सवाल भी है। इस कहानी की अगली तारीख 30 नवंबर है। और इस बार कोर्ट ने कैलेंडर में जगह भी खुद तय कर दी।
![In pictures: Wonders of India's Aravalli mountain range | Times of India Travel]()
राजस्थान की सियासत में सचिन पायलट का नाम किसी पहचान का मोहताज नहीं। कभी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में दिखे, कभी प्रदेश कांग्रेस के मुखिया रहे, फिर राष्ट्रीय राजनीति में पहुंचे। अब उनके पास एक और बड़ी जिम्मेदारी है और वो है पंजाब कांग्रेस।
कांग्रेस ने सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया है। यानी अब राजस्थान के इस सियासी चेहरे को पंजाब की अंदरूनी खींचतान सुलझाने और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी संभालनी है। पंजाब में चुनौती छोटी नहीं है।
प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमों के बीच खींचतान की खबरें लगातार आती रही हैं। ऐसे में हाईकमान ने पायलट को शायद यही काम दिया है- पहले संभालो घर, फिर चुनाव।
दिलचस्प बात यह भी भी रही कि जिम्मेदारी मिलते ही पायलट की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी मुलाकात भी हो गई। राजस्थान की राजनीति के लिए भी यह खबर छोटी नहीं। पायलट अब सिर्फ राजस्थान के नेता नहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन में एक और अहम जिम्मेदारी वाले चेहरे हैं। देखना यही है कि पंजाब की सियासी मिट्टी में राजस्थान का यह नेता कितनी जल्दी अपनी जमीन बना पाता और 2027 के सियासी रनवे पर पायलट कांग्रेस के प्लेन को उड़ान दे पाते या नहीं।
राजस्थान का इतिहास सिर्फ किताबों तक कैद नहीं। यहां लोकगीतों में भी इतिहास सांस लेता। महाराणा प्रताप का नाम आते ही शौर्य, स्वाभिमान और मेवाड़ की मिट्टी की कहानी साथ हो चलती है। शायद यही वजह है कि 'मिर्जापुर: द मूवी' में 'शूरवीर' गाने के इस्तेमाल ने राजस्थान में बात को इतना गरमा दिया।
फिल्म में इस गीत के इस्तेमाल और उसके संदर्भ को लेकर चौतरफा शोर उठा। आरोप है कि महाराणा प्रताप के शौर्य से जुड़ी भावना वाले गीत को गैंगवार के दृश्यों के साथ इस्तेमाल किया गया।
![Mirzapur The Movie: Rapperiya Baalam demands removal of song Shoorveer]()
गायक रैपरिया बालम ने भी गाने के इस्तेमाल और मंजूरी को लेकर नाराजगी जताई। मामला इतना बढ़ा कि श्री राष्ट्रीय करणी सेना ने निर्माताओं को अल्टीमेटम दे दिया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को चिठ्ठी लिख दी। यानी मामला अब सिर्फ यह नहीं रह गया कि गाना किसने लिखा और किसने इस्तेमाल किया?
सवाल यह भी है कि राजस्थान के सांस्कृतिक प्रतीकों को किस संदर्भ में पेश किया जाए क्योंकि यहां महाराणा प्रताप सिर्फ इतिहास का एक अध्याय नहीं। वे राजस्थान की सामूहिक स्मृति का हिस्सा हैं। और राजस्थान में जब बात सम्मान की हो, तो सुर भी सियासी हो जाते।
![राजेंद्र राठौड़ ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को लिखा पत्र।]()
जयपुर सेंट्रल जेल ने इस हफ्ते ऐसा सवाल अपने सामने खड़ा कर दिया, जिसका जवाब जेल प्रशासन को देना ही होगा। बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव के पास तलाशी में मोबाइल फोन मिला। आरोप है कि फोन कंबल के नीचे छिपाकर रखा गया था। इसके बाद उनके खिलाफ अलग मामला दर्ज किया गया।
अब असली सवाल फोन मिलने से थोड़ा बड़ा है। मोबाइल जेल के अंदर पहुंचा कैसे? किसने पहुंचाया? कब पहुंचाया? और क्या जेल के भीतर बैठे किसी शख्स ने बाहर किसी नेटवर्क से संपर्क किया? इन सवालों के जवाब तलाशे भी जा रहे होंगे।
राजस्थान जेल विभाग की जिम्मेदारी ही यह है कि जेल में बंद शख्स सुरक्षित निगरानी में रहें और प्रतिबंधित सामान की एंट्री पूरी तरह रोकी जाए। ऐसे में हाई-सिक्योरिटी जेल में पूर्व विधायक के पास मोबाइल मिलना सिर्फ एक कैदी के पास फोन मिलने की घटना नहीं। यह जेल की निगरानी व्यवस्था की परीक्षा भी है। इस बीच पूर्व विधायक ने अपनी सफाई पेश कर दी और सीधे कह दिया कि मेरी कोई गलती नहीं, मुझे तो फंसाया जा रहा। अब इसमें कितनी सच्चाई है, ये तो आप ही लोग तय करें।
![बहरोड़ विधायक बलजीत यादव ने जसवंत यादव पर किया पलटवार, कहा-बहरोड़ की जनता दिला देगी सन्यास | Behror Mla Baljeet Yadav Answers Jaswant Yadav In Behror]()
और फिर जयपुर के करधनी इलाके से आई वह खबर, जिसने पूरे शहर को सन्न कर दिया। गोविंद वाटिका के एक घर में गीता झा और उनकी तीन बेटियों के शव मिले। पुलिस को शुरुआती जांच में सिर और चेहरे पर चोट के निशान मिले। पुलिस ने सीमेंट के एक भारी टुकड़े को भी बरामद किया, जिसे वारदात में इस्तेमाल किए जाने का संदेह है।
संदेह गीता के पति राहुल झा पर है। पुलिस उसकी तलाश कर रही। लेकिन इस कहानी का सबसे विचलित करने वाला हिस्सा वारदात के बाद का है। पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद राहुल ने सामान्य तरीके से सुबह की शुरुआत की। दूध लिया, बुजुर्ग पिता के लिए चाय बनाई और फिर फरार हो गया।
एक ही घर में मां और तीन बेटियों की मौत ने पूरे जयपुर को हिला दिया। मकसद क्या था? परिवार के भीतर ऐसा क्या चल रहा था? क्या आर्थिक परेशानी थी, पारिवारिक विवाद था या कोई और वजह? इन सवालों के जवाब तो पुलिस की जांच दे ही देगी। लेकिन फिलहाल इस घटना ने एक बहुत असहज सवाल हमारे सामने छोड़ दिया कि जिस घर को सबसे सुरक्षित जगह माना जाता, अगर वहीं रिश्तों की दीवारें टूट जाएं तो इंसान आखिर जाए तो जाए कहां?
![4 people murdered at kardhani in Japiur]()
राजस्थान, इस हफ्ते तुम्हारी कहानी में पहाड़ भी थे, राजनीति भी, और समाज का वह चेहरा भी जिसे देखकर नजरें ठहर जाती।
अगले हफ्ते फिर होगी आपसे मुलाकात एक नई चिठ्ठी के साथ।
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प्रिय राजस्थान,
इस हफ्ते तुम्हें दूर से देखो तो लगता है जैसे एक साथ कई कहानियां किरदारों के बीच दौड़ रही हों। कहीं अरावली पहाड़ियां सुप्रीम कोर्ट में अपनी उम्र और पहचान का हिसाब दे रही थीं, कहीं सचिन पायलट राजस्थान से पंजाब की सियासत में नई जिम्मेदारी लेकर निकल पड़े।
उधर ‘शूरवीर’ के सुरों ने महाराणा प्रताप की धरती पर ऐसी तान छेड़ी कि बात सिल्वर स्क्रीन से निकलकर मरुधरा की संस्कृति और सम्मान तक पहुंच गई। और जयपुर की जेल से लेकर करधनी के एक घर तक ऐसी खबर आई, जिसने ठहरकर सोचने पर मजबूर कर दिया।
चलो, एक-एक करके तुम्हारी इस हफ्ते की कहानी सुनते हैं...
अरावली ने फिर दी दस्तक
हाई-पावर्ड कमेटी ने अरावली पर्वतमाला को लेकर तैयार हो रही रिपोर्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने की मोहलत और मांगी थी। यानी फरवरी 2027 तक का वक्त। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूर नहीं किया और 30 नवंबर 2026 तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश सुना दिया।
अदालत ने यह भी साफ किया कि आगे कोई विस्तार नहीं मिलेगा। CJI जस्टिस सूर्यकांत ने साफ कर दिया कि अगर कमेटी सक्षम नहीं तो हम नए सिरे से इसका गठन कर सकते हैं। बात साफ थी कि आगे कोई विस्तार नहीं मिलेगा।
मतलब कहानी अब सिर्फ पहाड़ों की नहीं। रिपोर्ट तय करेगी कि अरावली की पहचान किस हद तक मानी जाए और उसका असर खनन, निर्माण, जमीन के इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण पर कितना पड़ेगा। राजस्थान में अरावली का मतलब सिर्फ पत्थर और पहाड़ नहीं। यह पानी, जंगल, जमीन और आने वाली पीढ़ियों का सवाल भी है। इस कहानी की अगली तारीख 30 नवंबर है। और इस बार कोर्ट ने कैलेंडर में जगह भी खुद तय कर दी।
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पायलट ने भर ली पंजाब की उड़ान
कांग्रेस ने सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया है। यानी अब राजस्थान के इस सियासी चेहरे को पंजाब की अंदरूनी खींचतान सुलझाने और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी संभालनी है। पंजाब में चुनौती छोटी नहीं है।
प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमों के बीच खींचतान की खबरें लगातार आती रही हैं। ऐसे में हाईकमान ने पायलट को शायद यही काम दिया है- पहले संभालो घर, फिर चुनाव।
दिलचस्प बात यह भी भी रही कि जिम्मेदारी मिलते ही पायलट की राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी मुलाकात भी हो गई। राजस्थान की राजनीति के लिए भी यह खबर छोटी नहीं। पायलट अब सिर्फ राजस्थान के नेता नहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन में एक और अहम जिम्मेदारी वाले चेहरे हैं। देखना यही है कि पंजाब की सियासी मिट्टी में राजस्थान का यह नेता कितनी जल्दी अपनी जमीन बना पाता और 2027 के सियासी रनवे पर पायलट कांग्रेस के प्लेन को उड़ान दे पाते या नहीं।
Congress President Shri @kharge has reassigned/appointed the following party functionaries as AICC General Secretary/ Incharge of the following states, with immediate effect. pic.twitter.com/gt9GrKbgBF
— Congress (@INCIndia) September 5, 2026
'शूरवीर' पर छिड़ी जंग
फिल्म में इस गीत के इस्तेमाल और उसके संदर्भ को लेकर चौतरफा शोर उठा। आरोप है कि महाराणा प्रताप के शौर्य से जुड़ी भावना वाले गीत को गैंगवार के दृश्यों के साथ इस्तेमाल किया गया।
Mirzapur The Movie: Rapperiya Baalam demands removal of song Shoorveer
गायक रैपरिया बालम ने भी गाने के इस्तेमाल और मंजूरी को लेकर नाराजगी जताई। मामला इतना बढ़ा कि श्री राष्ट्रीय करणी सेना ने निर्माताओं को अल्टीमेटम दे दिया। बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने भी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को चिठ्ठी लिख दी। यानी मामला अब सिर्फ यह नहीं रह गया कि गाना किसने लिखा और किसने इस्तेमाल किया?
सवाल यह भी है कि राजस्थान के सांस्कृतिक प्रतीकों को किस संदर्भ में पेश किया जाए क्योंकि यहां महाराणा प्रताप सिर्फ इतिहास का एक अध्याय नहीं। वे राजस्थान की सामूहिक स्मृति का हिस्सा हैं। और राजस्थान में जब बात सम्मान की हो, तो सुर भी सियासी हो जाते।
राजेंद्र राठौड़ ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को लिखा पत्र।
जेल में 'माननीय' को मिला मोबाइल
अब असली सवाल फोन मिलने से थोड़ा बड़ा है। मोबाइल जेल के अंदर पहुंचा कैसे? किसने पहुंचाया? कब पहुंचाया? और क्या जेल के भीतर बैठे किसी शख्स ने बाहर किसी नेटवर्क से संपर्क किया? इन सवालों के जवाब तलाशे भी जा रहे होंगे।
राजस्थान जेल विभाग की जिम्मेदारी ही यह है कि जेल में बंद शख्स सुरक्षित निगरानी में रहें और प्रतिबंधित सामान की एंट्री पूरी तरह रोकी जाए। ऐसे में हाई-सिक्योरिटी जेल में पूर्व विधायक के पास मोबाइल मिलना सिर्फ एक कैदी के पास फोन मिलने की घटना नहीं। यह जेल की निगरानी व्यवस्था की परीक्षा भी है। इस बीच पूर्व विधायक ने अपनी सफाई पेश कर दी और सीधे कह दिया कि मेरी कोई गलती नहीं, मुझे तो फंसाया जा रहा। अब इसमें कितनी सच्चाई है, ये तो आप ही लोग तय करें।
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एक ही घर में मां और तीन बेटियों की मौत ने पूरे जयपुर को हिला दिया। मकसद क्या था? परिवार के भीतर ऐसा क्या चल रहा था? क्या आर्थिक परेशानी थी, पारिवारिक विवाद था या कोई और वजह? इन सवालों के जवाब तो पुलिस की जांच दे ही देगी। लेकिन फिलहाल इस घटना ने एक बहुत असहज सवाल हमारे सामने छोड़ दिया कि जिस घर को सबसे सुरक्षित जगह माना जाता, अगर वहीं रिश्तों की दीवारें टूट जाएं तो इंसान आखिर जाए तो जाए कहां?
4 people murdered at kardhani in Japiur
राजस्थान, इस हफ्ते तुम्हारी कहानी में पहाड़ भी थे, राजनीति भी, और समाज का वह चेहरा भी जिसे देखकर नजरें ठहर जाती।
अगले हफ्ते फिर होगी आपसे मुलाकात एक नई चिठ्ठी के साथ।
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राजस्थान की सियासत में भी 80s Retro फोटो ट्रेंड छाया, गहलोत-पायलट के लुक ने चौंकाया
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