1015 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, कलेक्टर ने खोल दी पोल, जानें पूरा मामला

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में सरकारी भूमि के अवैध आवंटन से जुड़ी जांच में भू माफिया और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत सामने आई है। यह खुलासा जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया की 19 पेज की रिपोर्ट में हुआ है।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

News In Short

  • राजस्थान के प्रतापगढ़ में 1015 बीघा जमीन सरकारी भूमि आवंटन में गड़बड़ी ।
  • जांच में भू माफिया और प्रभावशाली लोगों के गठजोड़ का खुलासा हुआ।
  • कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने दी 19 पन्नो की रिपोर्ट।
  • रिपोर्ट में खुलासा, 87 मामलों में पाई गई अनियमितताएं 

News In Detail

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में सरकारी जमीनों के  आवंटन में अनियमितता का  गंभीर मामला सामने आया है। जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया की 19 पन्नों की रिपोर्ट ने भू माफिया तस्करों और प्रभावशाली लोगों के बीच गठजोड़ का खुलासा किया है। 

1015 बीघा भूमि में अनियमितताएं

जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्रतापगढ़ जिले के विभिन्न हिस्सों में 1015 बीघा सरकारी भूमि के 87 मामलों में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इनमें से कई भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग से सटी हुई थी, इसे कामदार और डमी काश्तकारों के नाम पर आवंटित किया गया। बाद में इन भूमि का उपयोग निजी कॉलोनियों और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया गया। इससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हुआ।

सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग

इस मामले में 'गांवों के संग अभियान' और 'शहरों के संग अभियान', का गलत इस्तेमाल किया गया है। इन अभियानों का हवाला देते हुए नियमों की अनदेखी कर भूमि आवंटन किए गए। इनके परिणामस्वरूप कई आवंटन को अब रद्द किया जा रहा है। यह भी आरोप है कि इन अभियानों के जरिए सत्ता के कुछ लोग और प्रभावशाली व्यक्तियों ने अपने फायदे के लिए सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया।

नगर परिषद क्षेत्र में भी गड़बड़ियां

प्रतापगढ़ नगर परिषद में अवैध पट्टों और निलामी की गड़बड़ियां सामने आई हैं। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर भूमि आवंटन करवा कर बाद में वास्तविक लाभार्थियों से वह भूमि हस्तांतरित कर दी। इस मामले में तत्कालीन सभापति और पार्षदों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।

प्राकृतिक नाले पर अतिक्रमण

इस जांच में एक और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें शहर के बीच से गुजरने वाले प्राकृतिक नाले पर अतिक्रमण किया गया। इस नाले पर निर्माण कर तीन आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों का आवंटन किया गया था, जो अब निरस्त कर दिए गए हैं। इसके अलावा मानपुरा क्षेत्र में 31 अवैध पट्टों को भी रद्द कर दिया गया है।

विशेष शाखा की रिपोर्ट 

राजस्थान पुलिस की विशेष शाखा की रिपोर्ट में इस भूमि घोटाले में पार्षदों, स्थानीय व्यवसायियों और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता का उल्लेख किया गया है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करने के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजा है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर प्रभाव दिखाने के लिए कुछ लोग खुद को पार्षद या सभापति बताकर पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसके खिलाफ पुलिस को एक पत्र भेजा गया है।

आत्महत्या प्रकरण से बढ़ी गंभीरता

इस घोटाले से जुड़ा एक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। इसमें समाजसेवी मुस्तफा बोहरा की आत्महत्या ने इस मामले की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। इस आत्महत्या का कारण भूमि लेनदेन से संबंधित दबाव को बताया गया है। जांच में लापरवाही और उच्च न्यायालय की गाइडलाइंस के पालन न होने के आरोप भी लगाए गए हैं।

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