7 हजार से अधिक स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी, शिक्षा विभाग ने मांगी जानकारी
News In Short
- राजस्थान में बेहद कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी।
- रडार पर हैं ऐसे प्राथमिक स्कूल, जहां 14 बच्चों से कम है नामांकन।
- ऐसे मिडिल स्कूल भी, जहां 14 से कम बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
- महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के नामांकन के बारे में मांगी जानकारी।
- कांग्रेस और शिक्षक संगठनों के सरकार के इरादों की आलोचना।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी है। शिक्षा विभाग ने प्रदेश भर में ऐसे स्कूलों की जानकारी मांगी है, जहां छात्र संख्या नगण्य या बेहद कम है। इस कदम के बाद विपक्षी दल कांग्रेस और शिक्षक संगठनों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए मोर्चा खोल दिया है।
क्या है विभाग की योजना?
शिक्षा विभाग ने प्रदेश में ऐसे प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की सूची मांगी है, जहां नामांकन की स्थिति चिंताजनक है। सूत्रों के अनुसार प्रदेश में 7,352 स्कूलों में बेहद कम नामांकन है। इनके बारे में जानकारी मांगी गई है।
रडार पर हैं ऐसे स्कूल
शिक्षा विभाग ने जिलों में भेजे सर्कुलर में कहा है कि ऐसे प्राथमिक स्कूलों की सूची साझा की जाए, जहां नामांकन 0 से 14 के बीच है। साथ ही ऐसे उच्च प्राथमिक स्कूलों के बारे में सूचना मांगी है, जहां नामांकन 0 से 24 के बीच है।
इतना ही नहीं, महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। विभाग ने उन अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का डेटा भी मांगा है, जहां कक्षा 9 से 12 तक नामांकन शून्य है या कक्षा 1 से 8 तक नामांकन 30 से कम है। इन स्कूलों को नजदीकी स्कूलों में मर्ज करने की योजना बनाई जा रही है।
कांग्रेस ने कहा, शिक्षा का अधिकार छीन रही भाजपा
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों पर ताले लटकाकर भाजपा सरकार बच्चों से शिक्षा का मूल अधिकार छीन रही है। डोटासरा का कहना है कि स्कूल बंद करना और रोजगार छीनना भाजपा की नीति बन गई है।
कांग्रेस ने याद दिलाया कि 2013 से 2018 के बीच भी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने मर्ज के नाम पर 20 हजार से अधिक स्कूल बंद किए थे, जिससे करीब 20 हजार पद खत्म हो गए थे। कांग्रेस का दावा है कि वर्तमान सरकार सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने के बजाय उसे बर्बाद करने पर तुली है।
पहले नामांकन बढ़ाएं, फिर मर्ज करें
राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ ने भी सरकार के इस संभावित निर्णय का विरोध किया है। संघ के प्रदेश मुख्य महामंत्री महेंद्र पाण्डे और प्रदेशाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा का तर्क है कि 1 अप्रैल से नया सत्र शुरू होने जा रहा है। ऐसे समय में स्कूल मर्ज करने के बजाय सरकार को नामांकन बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए। उन्होंने मांग की है कि नामांकन वृद्धि के परिणाम आने तक मर्ज के आदेश जारी न किए जाएं।
सिर्फ बोर्ड बदले गए, शिक्षा नहीं
दूसरी ओर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कई अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में नामांकन बेहद कम या शून्य है। पिछली सरकार ने हिंदी माध्यम के स्कूलों पर केवल अंग्रेजी माध्यम का बोर्ड लगा दिया, लेकिन न तो नए स्कूल खोले और न ही अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों की भर्ती की। उनके अनुसार ये स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं और केवल वाहवाही लूटने के लिए खोले गए थे।
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