एक साल में पलटा राजस्थान का मानसून: 2025 में 64% ज्यादा बारिश, 2026 में करीब 26% की कमी
Ashish Bhardwaj | Sept 15, 2026, 14:15 IST
राजस्थान मानसून
1 जून से मध्य सितंबर तक बारिश सामान्य से काफी नीचे, पश्चिमी राजस्थान से 19 सितंबर के आसपास मानसून की वापसी शुरू होने के आसार, उससे पहले पूर्वी-पश्चिमी राजस्थान में बारिश की संभावना
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में मानसून की बारिश सामान्य से करीब 26% कम।
- 1 जून से 12 सितंबर के आसपास करीब 305 मिमी बारिश दर्ज।
- पाली-जालोर-जैसलमेर जैसे जिलों में सबसे ज्यादा कमी।
- 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से मानसून की विदाई संभव।
यानी सामान्य के मुकाबले राजस्थान को अब तक करीब 105 मिमी बारिश कम मिली है।
हालांकि मानसून की विदाई से ठीक पहले मौसम फिर बदला है। राजस्थान के कई हिस्सों में 13 से 16 सितंबर के बीच बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बनी हुई हैं। IMD ने पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों के लिए बारिश और गरज-चमक की चेतावनी भी जारी की थी।
राजस्थान मानसून
3 सितंबर तक 21% बारिश की कमी, फिर बढ़कर करीब 26%
| अवधि/इलाका | वास्तविक बारिश | सामान्य | कमी |
| राजस्थान, 3 सितंबर तक | 295.30 mm | 374.55 mm | -21.16% |
| जोधपुर संभाग, 3 सितंबर | 171.32 mm | 255.22 mm | -32.87% |
| उदयपुर संभाग | 430.03 mm | 616.09 mm | -30.20% |
| कोटा संभाग | 541.93 mm | 687.28 mm | -21.15% |
| अजमेर संभाग | --- | --- | -16.14% |
| जयपुर संभाग | --- | --- | -15.74% |
| भरतपुर संभाग | --- | --- | -10.26% |
| बीकानेर संभाग | --- | --- | -3.81% |
पाली सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में
दूसरी तरफ डीग में सामान्य से 31.04% ज्यादा और फलोदी में 21.57% ज्यादा बारिश हुई थी। यानी पूरे राजस्थान को एक ही आंकड़े से समझना ठीक नहीं होगा। कुछ जिलों में मानसून सामान्य या उससे बेहतर रहा, जबकि पश्चिमी और दक्षिणी राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश का बड़ा घाटा बना रहा।
जोधपुर-उदयपुर संभाग पर ज्यादा असर
उदयपुर संभाग में 616.09 मिमी सामान्य बारिश के मुकाबले 430.03 मिमी पानी बरसा। यहां कमी करीब 30.20% रही। कोटा संभाग भी सामान्य से करीब 21% पीछे था। अजमेर, जयपुर, भरतपुर और बीकानेर संभाग में भी अलग-अलग स्तर पर कमी दर्ज की गई।
अल नीनो का असर
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आम तौर पर El Niño के दौरान भारतीय मानसून कमजोर रहने की प्रवृत्ति होती है, हालांकि हर El Niño वर्ष में सूखा या कम बारिश होना जरूरी नहीं है। 1950 के बाद के 16 El Niño वर्षों में सात में मानसूनी बारिश below-normal रही।
बांधों में भी पिछले साल जैसी स्थिति नहीं
उस समय 693 बांधों में 57 पूरी तरह भरे, 438 आंशिक रूप से भरे और 198 खाली थे। जोनवार स्थिति में कोटा के बांधों में 73.38%, बांसवाड़ा में 60.08%, जयपुर में 57.84%, भरतपुर में 48.50% और उदयपुर में 44.87% जलभराव था। सबसे खराब स्थिति जोधपुर जोन की थी, जहां बांधों में सिर्फ 17.77% पानी था।
मौसम विभाग के मुताबिक परिस्थितियां 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होने के अनुकूल बन रही हैं। सामान्य तौर पर इसकी वापसी 17 सितंबर के आसपास शुरू होती है, यानी इस बार संभावित शुरुआत करीब दो दिन देर से हो सकती है।
उत्तर गुजरात के आसपास बने निम्न दबाव के प्रभाव से राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बनी हुई हैं। IMD के पूर्वानुमान में पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में 15-16 सितंबर तक thunderstorm activity की संभावना दिखाई गई थी।
पिछले साल से बिल्कुल उलटी तस्वीर
इसके उलट 2026 में मानसून के अंतिम चरण तक राज्य सामान्य बारिश से करीब एक चौथाई पीछे चल रहा है। यही वजह है कि इस साल केवल कुल बारिश का आंकड़ा नहीं, बल्कि जिलेवार वितरण, बांधों की स्थिति और खरीफ फसलों पर असर ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।
19 सितंबर से पहले कितना बरसेगा?
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