राजस्थान में 95 लाख लोगों के नाम राशन सूची से हटे, जयपुर में सबसे ज्यादा नाम कटे, अब घर-घर जांच
Raghvendra Singh Rathore | Oct 16, 2026, 16:58 IST
राजस्थान में NFSA से 95.49 लाख राशन यूनिट हटाई गईं और 93.44 लाख जोड़ी गईं।
राजस्थान में खाद्य सुरक्षा योजना से 95 लाख से ज्यादा लोगों के नाम हटाए गए, जबकि 93 लाख से ज्यादा नए नाम जोड़े गए। जयपुर में नए जुड़े लोगों के मुकाबले 1.83 लाख ज्यादा नाम हटे। अब सरकार अक्टूबर से दिसंबर तक चयनित शहरी वार्डों में घर-घर जांच करेगी। पात्र परिवारों को योजना से जोड़ा जाएगा।
राजस्थान में मुफ्त राशन पाने वालों की सूची में बड़ा बदलाव हुआ है। प्रदेश के 41 जिलों में खाद्य सुरक्षा योजना से 95 लाख 49 हजार 132 लोगों के नाम हटाए गए हैं। वहीं, 93 लाख 44 हजार 503 नए नाम जोड़े गए हैं। यानी जितने नए लोग योजना में जुड़े, उनसे करीब 2 लाख ज्यादा लोगों के नाम हटाए गए।
जयपुर में सबसे ज्यादा अंतर सामने आया है। यहां 5 लाख 85 हजार 645 लोगों के नाम राशन सूची से हटाए गए, जबकि 4 लाख 1 हजार 711 नए नाम जोड़े गए। यानी जयपुर में जितने नए नाम जुड़े, उनसे 1 लाख 83 हजार 934 ज्यादा नाम हटाए गए।
अब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक शहरों में घर-घर जाकर राशन पाने वालों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए ऐसे वार्ड चुने जाएंगे, जहां 2011 की जनगणना में दर्ज आबादी के मुकाबले 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल हैं।
प्रदेश के दूसरे जिलों के मुकाबले जयपुर में राशन सूची से हटाए गए और जोड़े गए नामों के बीच सबसे ज्यादा अंतर है। जयपुर में 5,85,645 नाम हटाए गए और 4,01,711 नए नाम जोड़े गए। यानी नए जुड़े लोगों के मुकाबले 1,83,934 ज्यादा नाम सूची से हटाए गए।
उदयपुर में भी नए जुड़े लोगों के मुकाबले 1,71,559 ज्यादा नाम हटाए गए। बीकानेर में यह अंतर 1,00,459 और झुंझुनूं में 77,821 रहा। नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों का राशन गलत तरीके से बंद किया गया है। विभागीय रिकॉर्ड से ही पता चलेगा कि किसका नाम किस वजह से हटाया गया।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने अक्टूबर से दिसंबर तक विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान विभाग की टीमें चयनित शहरी वार्डों में घर-घर जाकर जांच करेंगी कि कौन खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ लेने का हकदार है और कौन नहीं।
इसके साथ ऐसे गरीब और जरूरतमंद परिवारों की पहचान भी की जाएगी, जो पात्र होने के बावजूद अभी मुफ्त राशन नहीं ले पा रहे हैं।
इस जांच के लिए विभाग ने वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाया है।ऐसे शहरी वार्ड चुने जाएंगे, जहां 2011 में दर्ज कुल आबादी के मुकाबले 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग आज खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल हैं।
लेकिन पिछले 15 साल में जयपुर समेत प्रदेश के कई शहरों की आबादी बढ़ी है। नई कॉलोनियां बनी हैं और दूसरे इलाकों से भी लोग आकर बसे हैं। ऐसे में सवाल है कि पुरानी आबादी के आधार पर वार्ड चुनते समय आज की आबादी का ध्यान कैसे रखा जाएगा?
2011 की जनगणना का इस्तेमाल केवल जांच के लिए वार्ड चुनने में किया जा रहा है। किसी व्यक्ति का राशन सिर्फ इसलिए बंद नहीं किया जा सकता कि उसके वार्ड की आबादी 2011 के बाद बढ़ गई है। नाम हटाने से पहले उसकी पात्रता की जांच जरूरी है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के उपायुक्त एवं उप शासन सचिव सुनील पूनिया ने जिला रसद अधिकारियों को इस अभियान के निर्देश दिए हैं।जांच में जो लोग खाद्य सुरक्षा योजना के नियमों के अनुसार पात्र नहीं मिलेंगे, उन्हें खुद अपना नाम हटवाने के लिए कहा जाएगा। अगर कोई अपात्र व्यक्ति ऐसा नहीं करता है, तो विभाग उसे नियमानुसार नोटिस देकर आगे की कार्रवाई करेगा।
इस अभियान का मकसद केवल राशन सूची से नाम हटाना नहीं है। विभाग ने ऐसे जरूरतमंद परिवारों को भी तलाशने के निर्देश दिए हैं, जो योजना के नियमों के अनुसार पात्र हैं, लेकिन उनका नाम अभी सूची में नहीं है।
इन परिवारों को योजना से जोड़ने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि उन्हें भी मुफ्त राशन का लाभ मिल सके।
बालोतरा में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत जांच अभियान शुरू किया गया है। जिला रसद अधिकारी विनीता शर्मा के सार्वजनिक बयान के अनुसार बालोतरा नगर परिषद, जसोल, समदड़ी और सिवाना के चयनित वार्डों में घर-घर जांच की जाएगी।
इस दौरान सरकारी कर्मचारियों, आयकरदाताओं और नियमों के अनुसार योजना के पात्र नहीं होने वाले लोगों की पहचान की जाएगी। इसी तरह उदयपुर जिले में फतहनगर-सनवाड़ नगर पालिका के वार्ड संख्या 1, 5, 9 और 10 तथा मावली के वार्ड संख्या 1 में भी जांच शुरू होने की जानकारी सामने आई है।
सरकार ने इस अभियान की निगरानी के लिए अधिकारियों को फील्ड में जाने के निर्देश दिए हैं। जिला रसद अधिकारियों को हर महीने कम से कम आठ दिन और प्रवर्तन अधिकारियों तथा प्रवर्तन निरीक्षकों को 12 दिन फील्ड में जाना होगा।
नए प्रवर्तन निरीक्षकों को हर महीने 15 दिन फील्ड में रहकर जांच करनी होगी। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि जांच केवल कागजों में न हो, बल्कि अधिकारी मौके पर जाकर स्थिति देखें।
खाद्य सुरक्षा योजना में एक राशन कार्ड पर परिवार के कई लोगों के नाम दर्ज हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी राशन कार्ड में पांच सदस्य हैं तो उस कार्ड पर पांच लोगों को योजना का लाभ मिल सकता है।
इसलिए 95 लाख नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि 95 लाख परिवारों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गए। यह आंकड़ा योजना की लाभार्थी सूची से हटाए गए सदस्यों की संख्या बताता है।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के निर्देशों के अनुसार इस अभियान में ऐसे लोगों की पहचान की जाएगी, जो नियमों के अनुसार मुफ्त राशन पाने के हकदार नहीं हैं।
इसके साथ पात्र होने के बावजूद योजना से बाहर रह गए परिवारों को भी जोड़ा जाएगा। जयपुर में हटाए गए नामों के कारणों, दोबारा आवेदन करने वालों और फिर से राशन पाने वाले लोगों की संख्या का विस्तृत जवाब अभी उपलब्ध नहीं है।
राजस्थान में लाखों जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा योजना महत्वपूर्ण है। ऐसे में अपात्र लोगों को हटाना जरूरी है, लेकिन यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि किसी जरूरतमंद का राशन गलत तरीके से बंद न हो।
अब दिसंबर तक चलने वाली जांच के बाद ही पता चलेगा कि कितने अपात्र लोगों के नाम हटाए गए, कितने जरूरतमंद परिवार जुड़े और कितने लोगों की शिकायतें दूर हुईं। यही तय करेगा कि सरकार की इस जांच से गरीब परिवारों को राहत मिली या उनकी परेशानी बढ़ी।
जयपुर में सबसे ज्यादा अंतर सामने आया है। यहां 5 लाख 85 हजार 645 लोगों के नाम राशन सूची से हटाए गए, जबकि 4 लाख 1 हजार 711 नए नाम जोड़े गए। यानी जयपुर में जितने नए नाम जुड़े, उनसे 1 लाख 83 हजार 934 ज्यादा नाम हटाए गए।
अब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने अक्टूबर से दिसंबर 2026 तक शहरों में घर-घर जाकर राशन पाने वालों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए ऐसे वार्ड चुने जाएंगे, जहां 2011 की जनगणना में दर्ज आबादी के मुकाबले 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग खाद्य सुरक्षा योजना में शामिल हैं।
जयपुर में 5.85 लाख नाम हटे, 4.01 लाख नए जुड़े
उदयपुर में भी नए जुड़े लोगों के मुकाबले 1,71,559 ज्यादा नाम हटाए गए। बीकानेर में यह अंतर 1,00,459 और झुंझुनूं में 77,821 रहा। नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि सभी लोगों का राशन गलत तरीके से बंद किया गया है। विभागीय रिकॉर्ड से ही पता चलेगा कि किसका नाम किस वजह से हटाया गया।
जानिए, किन जिलों में कितने नाम हटे और जुड़े
| जिला | नए नाम जुड़े | नाम हटाए गए | क्या स्थिति रही |
|---|---|---|---|
| जयपुर | 4,01,711 | 5,85,645 | 1,83,934 ज्यादा नाम हटे |
| उदयपुर | 2,67,876 | 4,39,435 | 1,71,559 ज्यादा नाम हटे |
| बीकानेर | — | — | 1,00,459 ज्यादा नाम हटे |
| झुंझुनूं | 1,99,446 | 2,77,267 | 77,821 ज्यादा नाम हटे |
| बाड़मेर | — | — | 98,372 ज्यादा नाम जुड़े |
| सवाई माधोपुर | 2,50,995 | 1,69,818 | 81,177 ज्यादा नाम जुड़े |
| कोटा | 2,55,189 | 1,84,838 | 70,351 ज्यादा नाम जुड़े |
अब घर-घर जाकर जांचेंगे, कौन राशन पाने का हकदार है
इसके साथ ऐसे गरीब और जरूरतमंद परिवारों की पहचान भी की जाएगी, जो पात्र होने के बावजूद अभी मुफ्त राशन नहीं ले पा रहे हैं।
15 साल पुरानी जनगणना से क्यों चुने जा रहे वार्ड?
लेकिन पिछले 15 साल में जयपुर समेत प्रदेश के कई शहरों की आबादी बढ़ी है। नई कॉलोनियां बनी हैं और दूसरे इलाकों से भी लोग आकर बसे हैं। ऐसे में सवाल है कि पुरानी आबादी के आधार पर वार्ड चुनते समय आज की आबादी का ध्यान कैसे रखा जाएगा?
2011 की जनगणना का इस्तेमाल केवल जांच के लिए वार्ड चुनने में किया जा रहा है। किसी व्यक्ति का राशन सिर्फ इसलिए बंद नहीं किया जा सकता कि उसके वार्ड की आबादी 2011 के बाद बढ़ गई है। नाम हटाने से पहले उसकी पात्रता की जांच जरूरी है।
अपात्र लोगों को पहले खुद नाम हटवाने का मौका मिलेगा
जिन गरीब परिवारों का नाम नहीं, उन्हें भी जोड़ा जाएगा
इन परिवारों को योजना से जोड़ने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि उन्हें भी मुफ्त राशन का लाभ मिल सके।
बालोतरा और उदयपुर में भी जांच की तैयारी
इस दौरान सरकारी कर्मचारियों, आयकरदाताओं और नियमों के अनुसार योजना के पात्र नहीं होने वाले लोगों की पहचान की जाएगी। इसी तरह उदयपुर जिले में फतहनगर-सनवाड़ नगर पालिका के वार्ड संख्या 1, 5, 9 और 10 तथा मावली के वार्ड संख्या 1 में भी जांच शुरू होने की जानकारी सामने आई है।
अधिकारियों को हर महीने गांवों और वार्डों में जाना होगा
नए प्रवर्तन निरीक्षकों को हर महीने 15 दिन फील्ड में रहकर जांच करनी होगी। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि जांच केवल कागजों में न हो, बल्कि अधिकारी मौके पर जाकर स्थिति देखें।
समझें, राशन सूची से नाम हटने का मतलब क्या है?
इसलिए 95 लाख नाम हटने का मतलब यह नहीं है कि 95 लाख परिवारों के राशन कार्ड रद्द कर दिए गए। यह आंकड़ा योजना की लाभार्थी सूची से हटाए गए सदस्यों की संख्या बताता है।
विभाग का पक्ष: जरूरतमंद परिवारों को भी जोड़ा जाएगा
इसके साथ पात्र होने के बावजूद योजना से बाहर रह गए परिवारों को भी जोड़ा जाएगा। जयपुर में हटाए गए नामों के कारणों, दोबारा आवेदन करने वालों और फिर से राशन पाने वाले लोगों की संख्या का विस्तृत जवाब अभी उपलब्ध नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल: जांच से गरीबों को राहत मिलेगी या परेशानी?
अब दिसंबर तक चलने वाली जांच के बाद ही पता चलेगा कि कितने अपात्र लोगों के नाम हटाए गए, कितने जरूरतमंद परिवार जुड़े और कितने लोगों की शिकायतें दूर हुईं। यही तय करेगा कि सरकार की इस जांच से गरीब परिवारों को राहत मिली या उनकी परेशानी बढ़ी।
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