ओएमआर शीट घोटाला: लाखों रूपए लेकर बोर्ड अधिकारियों ने की अंकों की हेरफेर, जानिए पूरा मामला

राजस्थान में ओएमआर शीट घोटाले में एसओजी की जांच में नया खुलासा हुआ है। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के तकनीकी प्रमुख संजय माथुर और प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल ने लाखों रूपए लेकर माइनस नम्बरों में हेरफेर कर नियुक्तियां दिलवा दी।

author-image
Purshottam Kumar Joshi
New Update
omr sheet

Photograph: (the sootr)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

News In Short

  1. राजस्थान में ओएमआर शीट घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ।

  2. एसओजी ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख शामिल हैं।

  3. घोटाले में अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराने के लिए ओएमआर शीट्स और अंकों में हेरफेर किया गया।

  4. 38 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, जिनसे पूछताछ की जाएगी।

  5. इस घोटाले को लेकर एसओजी ने कहा कि मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

News In Detail

राजस्थान में सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षा में बड़े स्तर पर घोटाले का खुलासा हुआ है। एसओजी ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख भी शामिल हैं। आरोपियों ने ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग और डाटा प्रोसेसिंग के दौरान अंकों में हेरफेर कर अयोग्य अभ्यर्थियों को चयनित किया। अब तक 38 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं और एसओजी इस मामले में आगे की कार्रवाई कर रहा है।

एसओजी ने ऐसे पकड़ा मामला

राजस्थान में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के साथ एक बड़े स्तर पर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी) ने ओएमआर शीट्स और अंकों में हेरफेर कर अयोग्य अभ्यर्थियों को पास कराने का मामला पकड़ा। इस घोटाले में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तत्कालीन तकनीकी प्रमुख सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

घोटाले का तरीका

एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के अनुसार आरोपियों ने परीक्षा के परिणाम तैयार करते समय ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग और डेटा प्रोसेसिंग के बाद कंप्यूटर सिस्टम में छेड़छाड़ की। इसके माध्यम से कई अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाए गए और अयोग्य उम्मीदवारों को चयनित किया गया। अब तक 38 ऐसे अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं जिनसे पूछताछ की जाएगी।

आउटसोर्स फर्म से मिलीभगत

तीनों भर्तियों की परीक्षा 2019 में हुई थी और ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग और डाटा प्रोसेसिंग का काम दिल्ली की आउटसोर्स फर्म राभव लिमिटेड को सौंपा गया था। जांच में यह सामने आया कि फर्म के कर्मचारी और बोर्ड के तकनीकी अधिकारियों ने मिलकर ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग के बाद डिजिटल डाटा में हेरफेर किया। कई मामलों में फोटोशॉप का इस्तेमाल करके सही उत्तरों को भरकर अंकों को बढ़ाया गया।

बोर्ड के तकनीकी प्रमुख और उनके रिश्तेदार की गिरफ्तारी 

आरोपियों की जांच में यह भी सामने आया कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख संजय माथुर और उनके सहयोगी प्रवीण गंगवाल ने इस घोटाले में मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, संजय माथुर की रिश्तेदार पूनम माथुर को भी गिरफ्तार किया गया, जिनके 63 अंक थे, जिन्हें बढ़ाकर 185 कर दिया गया। हालांकि, उनका अंतिम चयन नहीं हो पाया।

एसओजी की बड़ी कार्रवाई 

इस घोटाले में अब तक एसओजी ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, और 38 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं जिनसे आगे पूछताछ की जाएगी। इस घोटाले का खुलासा राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षाओं के मामले में एक बड़ा झटका माना जा रहा है। एसओजी ने यह भी पुष्टि की कि आगामी दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

मुख्य बिंदु : 

  • एसओजी कार्रवाई: राजस्थान ओएमआर शीट घोटाले में अब तक पांच आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तकनीकी प्रमुख भी शामिल हैं।
  •  एसओजी जांच: इस घोटाले में ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग और डाटा प्रोसेसिंग के दौरान डिजिटल डाटा में छेड़छाड़ की गई थी और फोटोशॉप के जरिए अंकों को बढ़ाया गया था।
  • अब तक 38 अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं जिनसे पूछताछ की जाएगी और कई को पहले ही नौकरी मिल चुकी है।

जनवरी 2026 में SOG ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की तीन बड़ी भर्तियों (2018-19) में ओएमआर छेड़छाड़ का खुलासा किया है:
बोर्ड के पूर्व तकनीकी प्रमुख संजय माथुर सहित कई प्रोग्रामर और प्राइवेट फर्म के कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है।
कार्रवाई का आधार: जांच में पाया गया कि फोटोशॉप सॉफ्टवेयर के जरिए ओएमआर स्कैनिंग के दौरान डेटा बदला गया। एक उम्मीदवार के नंबर -6 से बढ़ाकर 259 कर दिए गए थे।

अभ्यर्थियों पर एक्शन: घोटाले के जरिए नौकरी पाने वाले 39 संदिग्धों की पहचान की गई है, जिनमें से कई को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनकी नियुक्तियां रद्द करने की प्रक्रिया जारी है।

कानूनी और तकनीकी कदम

सरकारों और जांच एजेंसियों ने भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। 

कार्बन कॉपी का मिलान: अब लगभग सभी परीक्षाओं में उम्मीदवार को ओएमआर की एक कार्बन कॉपी दी जाती है। अदालतों ने आदेश दिया है कि अगर किसी के स्कोर में विसंगति पाई जाती है, तो मूल ओएमआर का मिलान कार्बन कॉपी और ट्रेजरी में रखी तीसरी कॉपी से किया जाए।

डिजिटल लॉकिंग: ओएमआर शीट्स की स्कैनिंग अब लाइव सीसीटीवी निगरानी में की जा रही है और डेटा को 'डिजिटल सिग्नेचर' के साथ सुरक्षित किया जा रहा है ताकि बाद में बदलाव न हो सके।

नया कानून (Anti-Paper Leak Law): केंद्र और कई राज्य सरकारों ने सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम लागू किया है, जिसमें ओएमआर से छेड़छाड़ करने वाले दोषियों को 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

खबरें यह भी पढ़िए..

उत्तर-पश्चिमी भारत में सक्रिय हुआ पश्चिमी विक्षोभ, एमपी, सीजी और राजस्थान में आंधी, बारिश और ओलों की संभावना

राजस्थान सरकार 11 फरवरी को पेश करेेगी बजट, मंत्री जोगाराम पटेल दी जानकरी

गणतंत्र दिवस 2026: राजस्थान की बेटी को राष्ट्रपति भवन से मिला विशेष आमंत्रण, यह है खास

राजस्थान की वुशू-आर्चरी टीम से मणिपुर में लूट, सरकार ने दिए जांच के आदेश

राजस्थान एसओजी जांच एसओजी कार्रवाई ओएमआर शीट
Advertisment