केन्द्र ने दिया झटका! राजस्थान सरकार को नहीं मिलेंगे कर्मचारियों के 50884 करोड़, जानें पूरा मामला
Nitin Kumar Bhal | Aug 16, 2025, 11:29 IST
Photograph: (The Sootr)
राजस्थान के कर्मचारियों को मोदी सरकार से बड़ा झटका, ओल्ड पेंशन स्कीम के बावजूद NPS फंड का पैसा राज्य सरकार को नहीं मिलेगा। जानिए पूरा विवाद।
राजस्थान (Rajasthan) के कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य में ओल्ड पेंशन स्कीम (Old Pension Scheme, OPS) लागू होने के बाद भी, नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System, NPS) में जमा हुआ पैसा राज्य सरकार को वापस नहीं मिलेगा। केंद्र सरकार ने इस फैसले से संबंधित अपनी स्थिति को स्पष्ट किया है।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी (Pankaj Chaudhary) ने लोकसभा (Lok Sabha) में सीकर सांसद अमराराम के सवाल पर लिखित जवाब में यह स्पष्ट किया कि पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) के पास राजस्थान के कर्मचारियों का कुल 50 हजार 884 करोड़ रुपए (₹50,884 Crore) जमा हैं, लेकिन इस रकम को राज्य सरकार को देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार के लिए यह राशि वापस लेने का कोई अधिकार नहीं है।
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PFRDA (Pension Fund Regulatory and Development Authority) के द्वारा जारी एनपीएस (NPS) संबंधित नियमों और कानूनों के अनुसार, कर्मचारियों द्वारा जमा किए गए फंड को राज्य सरकार को देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। इससे पहले, राजस्थान सरकार ने कई बार एनपीएस फंड (NPS Fund) को वापस देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, लेकिन हर बार उसे कानूनी प्रावधानों के आधार पर खारिज कर दिया गया।
PFRDA एक्ट (PFRDA Act) और PFRDA विनियम (PFRDA Regulations) के तहत कर्मचारियों के जमा एनपीएस फंड को सरकार को वापस करने का कोई प्रावधान नहीं है।
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राजस्थान में, ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को 2023 में गहलोत सरकार (Gehlot Government) द्वारा लागू किया गया था। इसके बाद, बीजेपी सरकार (BJP Government) ने इसे बनाए रखा। राजस्थान के कर्मचारियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम था क्योंकि इससे उन्हें पुरानी पेंशन व्यवस्था में वापस जाने का अवसर मिला था।
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राजस्थान में OPS लागू करने के साथ ही NPS को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इसके साथ ही, कर्मचारियों की वेतन से कटौती (Salary Deductions) भी बंद कर दी गई थी। राज्य सरकार ने कर्मचारियों को OPS के तहत पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का फैसला किया, लेकिन इस दौरान NPS में जमा पैसा (NPS Fund) वापस लेने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से कई बार पत्राचार हुआ।
राजस्थान में OPS लागू होने के बाद, प्रदेश के 1 लाख 143 कर्मचारी (1,43,000 Employees) ने NPS फंड से कुल 590 करोड़ रुपए (₹590 Crore) निकाल लिए थे। इन कर्मचारियों में से 40,000 कर्मचारियों (40,000 Employees) से ही पैसे की वसूली हो पाई थी।
वित्त विभाग (Finance Department) ने कर्मचारियों को राहत देने के लिए कई सर्कुलर निकाले थे, लेकिन कर्मचारियों से पूरा पैसा वसूल नहीं हो सका। इसके बाद सरकार ने NPS से निकाले गए पैसे को लेकर सख्त कदम उठाने का फैसला किया।
राजस्थान में OPS लागू होने के बाद, केंद्र और राज्य सरकार के बीच एनपीएस फंड को लेकर लगातार विवाद चला आ रहा है। राज्य सरकार की मांग थी कि जो पैसा NPS में जमा हुआ था, वह OPS के तहत कर्मचारियों को दिया जाए, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद, राज्य सरकार ने कई बार पत्र लिखकर इस मुद्दे को हल करने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।
NPS में जमा पैसे (Money in NPS) को निकालने का अधिकार सिर्फ कर्मचारी (Employee) को है, सरकार को नहीं। इस प्रावधान के तहत, यदि कोई कर्मचारी अपने एनपीएस फंड को निकालता है, तो वह खुद इसे अपनी व्यक्तिगत जरूरतों के लिए उपयोग कर सकता है, लेकिन राज्य सरकार इस पैसे को वापस नहीं ले सकती।
राजस्थान में ओल्ड पेंशन स्कीम लागू होने के बाद, इस फंड से 590 करोड़ रुपए (₹590 Crore) की निकासी की गई थी, और इसके बाद वित्त विभाग (Finance Department) ने यह फैसला लिया कि OPS को बनाए रखा जाएगा, लेकिन कर्मचारियों से NPS का पैसा वापस नहीं लिया जाएगा।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि उसने OPS को इसलिए बंद किया था क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ और भविष्य की देनदारियां बढ़ सकती थीं। हालांकि, सरकार ने यह भी कहा कि वर्तमान में OPS को बहाल (Reinstating OPS) करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
केंद्र सरकार ने साफ तौर पर कहा है कि कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (Old Pension Scheme) को बहाल करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसके बावजूद, राजस्थान सहित कुछ राज्यों में इस योजना को लागू किया गया है, जिससे कर्मचारियों को अपने पुराने पेंशन के अधिकार मिलते हैं।
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राजस्थान ओल्ड पेंशन स्कीम | नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम | यूनिफाइड पेंशन स्कीम | क्या है यूनिफाइड पेंशन स्कीम | केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी | राजस्थान में ओपीएस और एनपीएस की स्थिति | क्या है यूनिफाइड पेंशन स्कीम
NPS फंड को लेकर लोकसभा में लिखित जवाब
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PFRDA के नियम
PFRDA एक्ट (PFRDA Act) और PFRDA विनियम (PFRDA Regulations) के तहत कर्मचारियों के जमा एनपीएस फंड को सरकार को वापस करने का कोई प्रावधान नहीं है।
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ओपीएस, एनपीएस और यूपीएस के बारे में जानें
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राजस्थान में ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की स्थिति
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NPS को बंद करने का निर्णय
NPS फंड से कर्मचारियों की निकासी
वित्त विभाग (Finance Department) ने कर्मचारियों को राहत देने के लिए कई सर्कुलर निकाले थे, लेकिन कर्मचारियों से पूरा पैसा वसूल नहीं हो सका। इसके बाद सरकार ने NPS से निकाले गए पैसे को लेकर सख्त कदम उठाने का फैसला किया।
केंद्र और राज्य सरकार के बीच जारी विवाद
NPS में पैसा निकालने के प्रावधान
राजस्थान में ओल्ड पेंशन स्कीम लागू होने के बाद, इस फंड से 590 करोड़ रुपए (₹590 Crore) की निकासी की गई थी, और इसके बाद वित्त विभाग (Finance Department) ने यह फैसला लिया कि OPS को बनाए रखा जाएगा, लेकिन कर्मचारियों से NPS का पैसा वापस नहीं लिया जाएगा।
OPS पर केंद्र सरकार का रुख
क्या केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का विचार किया है?
FAQ
- 1. क्या राजस्थान में NPS फंड का पैसा राज्य सरकार को मिलेगा?
नहीं, केंद्र सरकार ने साफ किया है कि NPS फंड का पैसा राज्य सरकार को वापस देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। यह केवल कर्मचारियों को ही वापस किया जा सकता है। - 2. OPS को क्यों बंद किया गया था?
केंद्र सरकार ने OPS को बंद किया था क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ और भविष्य की देनदारियां बढ़ने की संभावना थी। - 3. राजस्थान के कर्मचारियों ने NPS से कितने पैसे निकाले थे?
राजस्थान के 1 लाख 143 कर्मचारियों ने NPS से कुल 590 करोड़ रुपए (₹590 Crore) निकाले थे, जिनमें से 40,000 कर्मचारियों से ही पैसे की वसूली हो पाई थी। - 4. क्या OPS के बाद NPS में जमा पैसा वापस लिया जा सकता है?
नहीं, NPS में जमा पैसा केवल कर्मचारियों को वापस किया जा सकता है, राज्य सरकार को नहीं। - 5. क्या केंद्र सरकार OPS को फिर से लागू करेगी?
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि OPS को फिर से लागू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
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