पंचायत व पालिका चुनाव टालने का पैंतरा फेल, हाई कोर्ट की सरकार को दो टूक- 31 जुलाई तक कराएं चुनाव

Mukesh Sharma | May 22, 2026, 12:42 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने सरकार को झटका देते हुए 31 जुलाई तक पंचायत व निकाय चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने ओबीसी आयोग को 20 जून तक रिपोर्ट देने और चुनाव आयोग को उसके बाद चुनावी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।

News In Short

  • राजस्थान पंचायत-निकाय चुनावपर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला।
  • कोर्ट ने कहा, 31 जुलाई तक करवाने होंगे पंचायत व पालिका चुनाव।
  • कोर्ट ने पहले 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की तय की थी डेडलाइन।
  • कोर्ट ने यह आदेश सरकार की समय बढ़ाने की अर्जी पर दिए।
  • ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) 20 जून तक सौंपे रिपोर्ट।

News In Detail

राजस्थान में पंचायत और स्थानीय निकायों का कार्यकाल पूरा हो चुका है। सरकार इन चुनावों को टालने के लिए लगातार रास्ता तलाश रही है। ऐसे में हाईकोर्ट ने सरकार की मंशा से परे जाकर अब 31 जुलाई तक प्रदेश में पंचायत और पालिका चुनाव करवाने के आदेश दिए हैं।



कोर्ट ने ओबीसी आयोग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) को 20 जून तक अपनी रिपोर्ट देने और राज्य चुनाव आयोग को 20 जून के बाद चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। एक्टिंज चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित ने यह आदेश राजस्थान सरकार और राज्य चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्र को आंंशिक रुप से स्वीकार करते हुए दिए। कोर्ट ने 11 मई को सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला रिजर्व कर लिया था।



यह है मामला

राजस्थान हाई कोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राजस्थान सरकार को प्रदेश में 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। लेकिन सरकार ने तय समय सीमा में चुनाव नहीं कराए और हाईकोर्ट में चुनाव टालने का प्रार्थना पत्र लगा दिया।



सरकार ने सुनवाई के दौरान ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट नहीं आने और अन्य परिस्थितियों के चलते अभी चुनाव नहीं कराए जाना बताया था। वहीं, पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और गिर्राज सिंह देवंदा का कहना था कि सरकार जानबूझकर पिछले डेढ़ साल से चुनाव टाल रही हैं।



वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा

सरकार का कहना था कि सितंबर से दिसंबर के बीच में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा। इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा।



सरकार का कहना था कि सरकार ने कोर्ट के आदेश की पालना के लिए हरसंभव प्रयास किया। लेकिन परिस्थितियों के कारण 15 अप्रेल तक चुनाव करवान संभव नहीं था। सरकार ने राज्य ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, स्कूल, स्टाफ, ईवीएम सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर हाईकोर्ट से चुनाव आगे खिसकाने का अनुरोध किया था।



राज्य चुनाव आयोग ने समर्थन किया

राज्य चुनाव आयोग ने भी हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर करके चुनाव टालने का अनुरोध किया था। आयोग ने चुनाव की तिथियां बढ़ाने के सरकार का समर्थन करते हुए कहा था कि ओबीसी रिजर्वेशन के निर्धारण से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है।



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