रोडवेज बसों से एक साल में 148 हादसे, 60 मौतें, जयपुर में 13 चालान वाली बस दौड़ती रही, निगरानी पर सवाल
Raghvendra Singh Rathore | Oct 15, 2026, 14:58 IST
जयपुर हादसे वाली रोडवेज बस पर 13 चालान और 92 हजार रुपए जुर्माना लंबित था।
जयपुर में हादसे वाली रोडवेज बस पर 13 चालान और 92 हजार रुपए का जुर्माना लंबित था, फिर भी बस सड़कों पर दौड़ती रही। इनमें तीन चालान ओवरस्पीडिंग और सात परमिट उल्लंघन के थे। रोडवेज की बसों से एक साल में 148 हादसों में 60 लोगों की मौत हुई, इसके बावजूद सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
राजस्थान रोडवेज की बसों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जयपुर में बुधवार को जिस रोडवेज बस ने चार वाहनों को टक्कर मारी, उसके खिलाफ पहले से 13 चालान लंबित थे। इन पर 92 हजार रुपए का जुर्माना भी बकाया था। इनमें तीन चालान तेज रफ्तार और सात परमिट नियमों के उल्लंघन से जुड़े थे। इसके बावजूद बस का संचालन जारी रहा।
हैरानी की बात यह है कि रोडवेज मुख्यालय पहले ही बसों की सुरक्षा, दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और ड्राइवरों की ट्रेनिंग को लेकर कई आदेश जारी कर चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बार-बार नियम तोड़ने वाली बसों पर निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? क्या डिपो प्रबंधन को चालानों की जानकारी नहीं थी या जानकारी मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई?
हादसे वाली बस के खिलाफ शाहजहांपुर टोल से बिना जरूरी परमिट गुजरने के सात चालान जनवरी 2026 में काटे गए थे। प्रत्येक चालान पर 10 हजार रुपए का जुर्माना था। यानी सिर्फ परमिट संबंधी उल्लंघनों पर 70 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया था। इसके अलावा तीन चालान ओवरस्पीडिंग और तीन अन्य चालान प्रदूषण प्रमाणपत्र व नो-पार्किंग से जुड़े बताए गए हैं।
यहां सवाल केवल जुर्माने की रकम का नहीं है। एक ही बस के खिलाफ बार-बार नियम उल्लंघन का रिकॉर्ड बनने के बावजूद उसकी समीक्षा किसने की? क्या रोडवेज के पास ऐसा सिस्टम है जो डिपो प्रबंधक को लंबित चालानों की जानकारी देता है?
रोडवेज की आधिकारिक वेबसाइट पर दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार, निगम ने 22 मई 2024 को बस सुरक्षा से संबंधित सर्कुलर जारी किया था। इसके बाद 12 जुलाई 2024 को दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए निर्देश जारी किए गए।
इतना ही नहीं, 15 अप्रैल 2025 को अनुबंध पर चलने वाले वाहनों की दुर्घटनाएं कम करने के लिए भी आदेश जारी हुआ। वहीं 5 जून 2025 को बसों के सुचारू संचालन और प्रभावी जांच व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए गए थे। 22 अप्रैल 2026 को ड्राइवरों और कंडक्टरों की ट्रेनिंग से संबंधित आदेश भी जारी हुआ।
रोडवेज मुख्यालय सुरक्षा और जांच व्यवस्था के लिए लगातार निर्देश जारी करता रहा है। लेकिन इन निर्देशों के तहत चालान वाले वाहनों की निगरानी कैसे होती है, इसका जवाब जरूरी है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आदेशों के पालन की जांच कौन करता है और लापरवाही मिलने पर किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय होती है।
हादसे वाली बस के तीन चालान तेज रफ्तार के थे। ओवरस्पीडिंग सीधे सड़क सुरक्षा से जुड़ा उल्लंघन है। सवाल है कि क्या इन चालानों के बाद बस चलाने वाले ड्राइवरों की पहचान की गई? क्या उनसे जवाब मांगा गया या उन्हें अतिरिक्त ट्रेनिंग दी गई?
यह भी जांच का विषय है कि तीनों चालान अलग-अलग ड्राइवरों के समय हुए या एक ही चालक के दौरान। अभी इन चालानों की तारीखें और संबंधित चालकों के नाम उपलब्ध नहीं हैं।
राजस्थान परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, परिवहन वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र की प्रक्रिया में प्रदूषण प्रमाणपत्र, टैक्स चुकाने की रिपोर्ट और ऑडिट व चालान बकाया नहीं होने की रिपोर्ट जैसे दस्तावेज जरूरी बताए गए हैं।
अब सवाल है कि हादसे वाली बस का आखिरी फिटनेस प्रमाणपत्र कब जारी हुआ था? उस समय कितने चालान लंबित थे? क्या परिवहन विभाग ने वाहन के रिकॉर्ड की जांच की थी?
रोडवेज के वर्ष 2024-25 के सार्वजनिक आंकड़ों के अनुसार, निगम की बसों से 148 दुर्घटनाएं हुई थीं। इनमें 60 लोगों की मौत हुई। इससे पहले 2023-24 में 183 दुर्घटनाओं में 80 लोगों की जान गई थी। निगम के मुताबिक, दुर्घटनाओं और मौतों में कमी आई थी। इसके बावजूद हादसों की संख्या सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जरूरत दिखाती है।
नवंबर 2025 में रोडवेज प्रबंधन ने बताया था कि निगम में पांच हजार से ज्यादा ड्राइवर कार्यरत थे। इनमें करीब 800 ड्राइवर अनुबंध पर थे। उस समय प्रबंधन ने ड्राइवरों की ट्रेनिंग और सुरक्षा उपायों को लेकर भी जानकारी दी थी। अब सवाल है कि ट्रेनिंग के बाद ड्राइवरों के नियम उल्लंघन की समीक्षा किस तरह होती है। क्या रोडवेज ऐसे ड्राइवरों और बसों की अलग निगरानी करता है, जिनके खिलाफ बार-बार चालान होते हैं?
राजस्थान रोडवेज की आधिकारिक वेबसाइट के वर्किंग अपडेट में 52 डिपो और 3,708 बसें दर्ज हैं। निगम प्रतिदिन औसतन 7.31 लाख यात्रियों के परिवहन की जानकारी भी देता है। इतने बड़े परिवहन नेटवर्क में बसों की फिटनेस, परमिट, ड्राइवरों की ड्यूटी और ट्रैफिक नियमों के पालन की निगरानी महत्वपूर्ण है।
ऐसे में रोडवेज मुख्यालय को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेशभर की कितनी बसों पर चालान लंबित हैं। क्या उनकी डिपोवार रिपोर्ट तैयार होती है? क्या बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों की अलग जांच की जाती है?
जयपुर के खेतान चौराहे के पास बुधवार दोपहर करीब 2:45 बजे श्रीमाधोपुर से आ रही रोडवेज बस ने दो कारों, एक बाइक और स्कूटी को टक्कर मार दी थी। हादसे में 49 वर्षीय तुलसी देवी की मौत हो गई। स्कूटी सवार महेश चौधरी के पैर में फ्रैक्चर हुआ।
प्रारंभिक पूछताछ में चालक राकेश कुमार ने पुलिस को बताया कि ब्रेक के नीचे कोई वस्तु आने से वह बस नहीं रोक पाया। पुलिस इस दावे और दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच कर रही है। ऐसे में बस की तकनीकी जांच, ब्रेक सिस्टम की स्थिति और अंतिम वर्कशॉप जांच का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होगा।
मामले में राजस्थान रोडवेज के प्रबंध निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी। बस के 13 लंबित चालानों, संबंधित डिपो की भूमिका और नियम उल्लंघनों पर विभागीय कार्रवाई को लेकर रोडवेज प्रबंधन का विस्तृत पक्ष अभी प्राप्त नहीं हुआ है।
इस मामले में संबंधित डिपो के मुख्य प्रबंधक, यातायात शाखा और परिवहन विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आने वाले सवालों से जुड़ी है। हालांकि किसी अधिकारी की व्यक्तिगत लापरवाही साबित करने वाला रिकॉर्ड अभी सामने नहीं आया है।
हैरानी की बात यह है कि रोडवेज मुख्यालय पहले ही बसों की सुरक्षा, दुर्घटनाओं पर नियंत्रण और ड्राइवरों की ट्रेनिंग को लेकर कई आदेश जारी कर चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बार-बार नियम तोड़ने वाली बसों पर निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? क्या डिपो प्रबंधन को चालानों की जानकारी नहीं थी या जानकारी मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई?
जनवरी से सात चालान लंबित, क्या कर रहा था डिपो प्रबंधन?
यहां सवाल केवल जुर्माने की रकम का नहीं है। एक ही बस के खिलाफ बार-बार नियम उल्लंघन का रिकॉर्ड बनने के बावजूद उसकी समीक्षा किसने की? क्या रोडवेज के पास ऐसा सिस्टम है जो डिपो प्रबंधक को लंबित चालानों की जानकारी देता है?
रोडवेज के सुरक्षा आदेश कागजों तक सीमित तो नहीं?
इतना ही नहीं, 15 अप्रैल 2025 को अनुबंध पर चलने वाले वाहनों की दुर्घटनाएं कम करने के लिए भी आदेश जारी हुआ। वहीं 5 जून 2025 को बसों के सुचारू संचालन और प्रभावी जांच व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए गए थे। 22 अप्रैल 2026 को ड्राइवरों और कंडक्टरों की ट्रेनिंग से संबंधित आदेश भी जारी हुआ।
रोडवेज मुख्यालय सुरक्षा और जांच व्यवस्था के लिए लगातार निर्देश जारी करता रहा है। लेकिन इन निर्देशों के तहत चालान वाले वाहनों की निगरानी कैसे होती है, इसका जवाब जरूरी है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि आदेशों के पालन की जांच कौन करता है और लापरवाही मिलने पर किस अधिकारी की जिम्मेदारी तय होती है।
तीन ओवरस्पीडिंग चालान, क्या किसी ने ड्राइवरों का रिकॉर्ड देखा?
यह भी जांच का विषय है कि तीनों चालान अलग-अलग ड्राइवरों के समय हुए या एक ही चालक के दौरान। अभी इन चालानों की तारीखें और संबंधित चालकों के नाम उपलब्ध नहीं हैं।
फिटनेस जांच पर भी उठे सवाल
अब सवाल है कि हादसे वाली बस का आखिरी फिटनेस प्रमाणपत्र कब जारी हुआ था? उस समय कितने चालान लंबित थे? क्या परिवहन विभाग ने वाहन के रिकॉर्ड की जांच की थी?
रोडवेज की बसों से एक साल में 148 हादसे, 60 लोगों की मौत
नवंबर 2025 में रोडवेज प्रबंधन ने बताया था कि निगम में पांच हजार से ज्यादा ड्राइवर कार्यरत थे। इनमें करीब 800 ड्राइवर अनुबंध पर थे। उस समय प्रबंधन ने ड्राइवरों की ट्रेनिंग और सुरक्षा उपायों को लेकर भी जानकारी दी थी। अब सवाल है कि ट्रेनिंग के बाद ड्राइवरों के नियम उल्लंघन की समीक्षा किस तरह होती है। क्या रोडवेज ऐसे ड्राइवरों और बसों की अलग निगरानी करता है, जिनके खिलाफ बार-बार चालान होते हैं?
हजारों बसों की जिम्मेदारी, मुख्यालय को क्या मिलती है चालानों की रिपोर्ट?
ऐसे में रोडवेज मुख्यालय को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदेशभर की कितनी बसों पर चालान लंबित हैं। क्या उनकी डिपोवार रिपोर्ट तैयार होती है? क्या बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों की अलग जांच की जाती है?
ब्रेक के नीचे वस्तु आने का दावा, तकनीकी जांच से खुलेगा राज
प्रारंभिक पूछताछ में चालक राकेश कुमार ने पुलिस को बताया कि ब्रेक के नीचे कोई वस्तु आने से वह बस नहीं रोक पाया। पुलिस इस दावे और दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच कर रही है। ऐसे में बस की तकनीकी जांच, ब्रेक सिस्टम की स्थिति और अंतिम वर्कशॉप जांच का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होगा।
रोडवेज एमडी से संपर्क नहीं हो सका, विभागीय जवाब का इंतजार
इस मामले में संबंधित डिपो के मुख्य प्रबंधक, यातायात शाखा और परिवहन विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आने वाले सवालों से जुड़ी है। हालांकि किसी अधिकारी की व्यक्तिगत लापरवाही साबित करने वाला रिकॉर्ड अभी सामने नहीं आया है।
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