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Photograph: (the sootr)
News In Short
- जल-जीवन मिशन घोटाले में 9 गिरफ्तार, एसीबी की ताबड़तोड़ छापेमारी।
- पीएचईडी चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल फाइव स्टार होटल से हुए गिरफ्तार।
- 900 करोड़ रुपए का बताया जा रहा है जल जीवन मिशन घोटाला।
- गिरफ्तार अधिकारियों में से तीन हो चुके हैं बहुत पहले सेवानिवृत्त।
- राजस्थान, बिहार, झारखंड व दिल्ली सहित 15 जगहों पर हुई छापेमारी।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार को 900 करोड़ रुपए के जलजीवन मिशन घोटाले में बड़ी छापेमारी कर 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। छापेमारी में एसीबी ने पीएचईडी के चीफ इंजिनियर दिनेश गोयल को उदयपुर के पांच सितारा होटल से गिरफ्तार किया। पूर्व सीनियर आईएएस सुबोध अग्रवाल के घर पर सुबह छापा मारने की खबर आई, लेकिन एसीबी ने अधिकारिक प्रेस रिलीज में इस बारे में कोई खुलासा नहीं किया।
सबूतों के विश्लेषण के बाद गिरफ्तारी
एसीबी के अनुसार इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी। आईजी राजेश सिंह और डीआईजी डॉ.रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में एसआईटी ने सबूतों के विश्लेषण के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एडीजी स्मिता श्रीवास्तव के निर्देशन में आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
डेढ़ दर्जन टीमों ने की छापेमारी
एसीबी की डेढ़ दर्जन टीम ने जल जीवन मिशन घोटाले में 2024 में दर्ज मामले की पड़ताल के आधार पर एकसाथ सघन छापेमारी की। ये छापे राजस्थान में जयपुर, बाडमेर, उदयपुर, करौली, दिल्ली, बिहार व झारखंड में डाले गए। एसीबी ने इन छापों के जरिए आरोपी अधिकारी और ठेकेदारों की गिरफ्तारी की रणनीति तैयार की थी।
ये हुए नौ आरोपी गिरफ्तार
जिन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, उनमें मुख्य अभियन्ता प्रशासन दिनेश गोयल, मुख्य अभियन्ता ग्रामीण केडी गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता जयपुर क्षेत्र-द्वितीय सुभांशु दीक्षित, वित्तीय सलाहकार अक्षय उर्जा सुशील शर्मा, मुख्य अभियंता चूरु निरिल कुमार, निलंबित अधिशाषी अभियंता विशाल सक्सेना, तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य अभियंता व अब सेवानिवृत्त अरूण श्रीवास्तव, तत्कालीन मुख्य अभियन्ता व अब सेवानिवृत डीके गौड और तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, अब सेवानिवृत्त महेन्द्र प्रकाश सोनी शामिल हैं।
फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र से किया घोटाला
इस घोटाले में श्रीगणपति ट्यूबवैल कम्पनी के प्रोपराईटर महेश मित्तल व श्रीश्याम ट्यूबैवल कम्पनी के प्रोपराइटर पदमचन्द जैन ने इरकॉन इन्टरनेशनल लि० के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए थे। इनके आधार पर इन्होंने पीएचईडी के उच्च स्तर के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर दोनों फर्मों के नाम से करीब 960 करोड रूपए के टेण्डर लिए थे। इसमें करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार हुआ।
टेंडर पुलिंग कर लगाया चूना
पीएचईडी के उच्च स्तर के अधिकारियों ने आपराधिक मंशा से 50 करोड़ रुपए से ज्यादा के बड़े प्रोजेक्ट की निविदाओं में साइट विजिट प्रमाण-पत्र की बाध्यता को नियम विरूद्ध शामिल किया। इससे बोलीदाताओ की पहचान उजागर हुई और टेंडर पुलिंग होने से उंची दर के टेंडर आए। इस पूरी कवायद को पीएचईडी अधिकारियो ने मंजूरी दी और हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार किया।
ट्रेप के मामला कोर्ट में
एसीबी ने पूर्व में जल जीवन मिशन से संबंधित एक मामले में ट्रेप कार्रवाई की थी। इसमें कुल 11 आरोपियो एवं 02 फर्मों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में पेश कर दिया गया है।
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