जोधपुर में राजनाथ सिंह ने देखा ‘तरंग शक्ति-2026’, 32 देशों के सैन्य पर्यवेक्षक भी मौजूद
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जोधपुर एयरफोर्स स्टेशन पर अंतरराष्ट्रीय अभ्यास तरंग शक्ति-2026 का दौरा किया। इस अभ्यास में भारत सहित ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के साथ अन्य मित्र देशों की वायुसेनाएं भाग ले रही हैं। सालभर की तैयारी के बाद इन देशों के सैन्यकर्मी एक साथ विमान उड़ाने का अभ्यास कर रहे हैं।
राजनाथ सिंह जोधपुर पहुंचे
इस Indian Air Force exercise का मकसद सिर्फ हवाई ताकत दिखाना नहीं है। इसका असली मकसद अलग-अलग वायुसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाना है। संयुक्त अभियान की क्षमता मजबूत करना भी इसका अहम लक्ष्य है।
‘Tarang Shakti’ is aimed at enhancing operational coordination among Friendly Countries. Speaking at the event in Jodhpur.https://t.co/uyaAplCgTE
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) October 10, 2026
8 देशों की वायुसेनाएं
32 देशों के पर्यवेक्षक
#TarangShakti26 Going Strong.From the first take-off to every mission flown, #TarangShakti26 has brought together air power, interoperability, and international camaraderie in action.The exercise continues at full tempo, with flying operations, professional engagements, and shared experiences—strengthening bonds and enhancing mutual understanding.#ExTS26 #TarangShakti26@AusAirForce @Armee_de_lair @usairforce @BDairforce @airforcelk @Team_Luftwaffe@modgovae @DefenceMinIndia @SpokespersonMoD @HQ_IDS_India @CareerinIAF@air_veterans
— Indian Air Force (@IAF_MCC) October 7, 2026
F-35 और राफेल भी शामिल
भारतीय वायुसेना भी अपने आधुनिक लड़ाकू विमानों के साथ अभ्यास में है। दूसरे हवाई संसाधन भी इसमें लगाए गए हैं। F-35 और राफेल जैसे विमानों का एक साथ उड़ना अपने आप में खास है।
हवाई युद्ध की रणनीति पर जोर
हवा में ईंधन भरने का अभ्यास
आधुनिक युद्ध में सिर्फ अत्याधुनिक विमान होना काफी नहीं है। अलग-अलग देशों के पायलट और ग्राउंड स्टाफ कितनी तेजी से साथ काम कर पाते हैं, यह भी अहम है। क्या जंग के समय अलग भाषा और अलग तकनीक वाली सेनाएं एक टीम बन पाएंगी? ऐसे अभ्यास इसी सवाल का जवाब तैयार करते हैं।
सारंग और सूर्यकिरण के करतब
विदेशी मेहमानों के लिए खास मौका
राजस्थान बना रक्षा सहयोग का केंद्र
Tarang Shakti 2026 का समापन 12 अक्टूबर को होगा। तब तक संयुक्त प्रशिक्षण और हवाई संचालन से जुड़ी गतिविधियां जारी रहेंगी।
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