तरंग शक्ति युद्धाभ्यास: अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमानों ने राफेल के साथ किया अभ्यास, आसमान में दिखा जंग जैसा नजारा

Ashish Bhardwaj | Oct 01, 2026, 15:36 IST
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तरंग शक्ति युद्धाभ्यास
तरंग शक्ति युद्धाभ्यास

भारत और अमेरिका के बीच तरंग शक्ति 2026 नामक युद्धाभ्यास, जोधपुर एयरबेस पर जारी है। राफेल, F-35, तेजस और सुखोई-30 MKI जैसे युद्धक विमानों ने इस अभ्यास में शामिल होकर एक नई मिसाल कायम की है। ये अभ्यास विभिन्न वायुसेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने का एक प्रयास है, जिसमें नाल, उतरलाई, जैसलमेर और फलोदी जैसे प्रमुख एयरबेस भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जोधपुर एयरबेस पर चल रहा है तरंग शक्ति 2026 का युद्धाभ्यास।
  • युद्धाभ्यास में 60 से 80 लड़ाकू विमान में ले रहे है हिस्सा।
  • राफेल, F-35, तेजस और सुखोई-30 MKI एक ही युद्ध क्षेत्र में उतरे हैं।
  • नाल, उतरलाई, जैसलमेर और फलोदी एयरबेस पर कर रहे है अभ्यास।
  • युद्धाभ्यास का मकसद वायुसेनाओं के बीच तालमेल मजबूत करना है।
तरंग शक्ति युद्धाभ्यास से जोधपुर का आसमान रोमांच से भर गया है। यह युद्धाभ्यास पश्चिमी राजस्थान के एयरस्पेस में किसी असली युद्ध जैसा नजर आ रहा है। इस युद्धाभ्यास में एक साथ 60 से 80 लड़ाकू विमान एक साथ अभ्यास कर रहे है। अमेरिका के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमान F-35 से लेकर भारत के तेजस एक साथ आसमान में गरज रहे है।

जंग के मैदान जैसा बना पश्चिमी राजस्थान

Tarang Shakti 2026 के दौरान पश्चिमी राजस्थान के एयरस्पेस का नजारा बिलकुल बदल गया है। यह युद्धाभ्यास किसी असली युद्ध क्षेत्र जैसा दिख रहा है। एक साथ 60 से 80 लड़ाकू विमान एक साथ आसमान में नजर आ रहे है।

लार्ज फोर्स एम्प्लॉयमेंट से बना बड़ा पैकेज

अभ्यास में लार्ज फोर्स एम्प्लॉयमेंट के जरिए विमानों का बड़ा पैकेज तैयार किया गया। यानी अलग-अलग श्रेणी और ताकत के विमानों का एक बड़ा समूह। फिर लड़ाकू विमानों को अलग-अलग फोर्स पैकेज में बांटा गया।

एक पैकेज ने दुश्मन के हवाई हमले को रोकने का अभ्यास किया। दूसरे पैकेज ने अपने विमानों के लिए हवाई सुरक्षा कवच बनाया। ताकि वे सुरक्षित अपने लक्ष्य तक पहुंच सकें।

वन-ऑन-वन डॉगफाइट और एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग

इससे पहले के चरण में भारत और विदेशी लड़ाकू विमानों के बीच वन-ऑन-वन और टू-ऑन-वन जैसी कठिन डॉगफाइट और एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग हुई।

राफेल तेजस सुखोई और F-35 ने किया युद्धाभ्यास

इस युद्धाभ्यास की सबसे खास बात यह है कि कई देशों के आधुनिक फाइटर जेट्स ने एक साथ अभ्यास किया । इस अभ्यास में फ्रांस और भारत के राफेल शामिल हैं। अमेरिका का F-35 लड़ाकू विमान भी यहां उड़ान भर रहा है। Indian Air Force के तेजस और सुखोई-30 MKI ने भी दम दिखाया।

राफेल तेजस सुखोई और F-35, सभी ने एक ही युद्ध क्षेत्र में क्षमता दिखाई।

हवा में ईंधन भरने से एयरलिफ्ट तक

इस बड़े ऑपरेशन में सिर्फ फाइटर जेट ही नहीं थे। एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग यानी हवा में ईंधन भरने का अभ्यास भी हुआ। एयरलिफ्ट और दूसरे सपोर्ट मिशन भी इसमें शामिल रहे।

सोचिए एक बार। एक ही आसमान में 80 तक लड़ाकू विमान और हर एक का अलग मिशन। क्या बिना सटीक तालमेल के यह मुमकिन है?

जोधपुर के साथ चार और एयरबेस

यह बड़ा ऑपरेशनल अभ्यास केवल जोधपुर तक सीमित नहीं रहा। राज्य के दूसरे प्रमुख एयरबेस भी इस विशाल नेटवर्क का हिस्सा बने। इनमें नाल, उतरलाई, जैसलमेर और फलोदी एयरबेस शामिल हैं। यानी Jodhpur Airbase समेत पांच एयरबेस एक साथ सक्रिय रहे।

अमेरिका के F-35A और KC-135R भी शामिल

अमेरिकी पैसिफिक एयर फोर्सेज ने भी तरंग शक्ति-26 में हिस्सा लिया है। अमेरिका से 6 F-35A लाइटनिंग-II लड़ाकू विमान आए हैं। साथ में एक KC-135R स्ट्रैटोटैंकर भी शामिल हुआ है। स्ट्रैटोटैंकर यानी हवा में दूसरे विमानों को ईंधन देने वाला विमान।

जापान के एयरबेस से पहुंचे अमेरिकी विमान

छह F-35A जापान के मिसावा एयर बेस की 13वीं फाइटर स्क्वाड्रन के हैं। KC-135R जापान के काडेना एयर बेस की 909वीं एयर रिफ्यूलिंग स्क्वाड्रन से आया है। अमेरिकी वायुसेना भारतीय वायुसेना और दूसरे देशों के साथ संयुक्त ट्रेनिंग कर रही है।

अमेरिकी पायलट ने बताया अनुभव

एक अमेरिकी F-35A पायलट ने इस अभ्यास पर अपना अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, दूसरी वायुसेनाओं के साथ उड़ान से रणनीतियां समझने का मौका मिलता है। संचालन के अलग तरीके और नजरिए भी सामने आते हैं। इससे पायलट एक-दूसरे से सीखते हैं।

अभ्यास का असली मकसद

इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य आपसी तालमेल को परखना और मजबूत करना है। यह तालमेल अलग-अलग देशों की वायुसेनाओं के बीच है। अलग तरह के विमानों और तकनीकों के बीच भी तालमेल परखा जा रहा है। मकसद बहुराष्ट्रीय हवाई अभियानों की कार्यप्रणाली समझना और साझा अनुभव विकसित करना है।
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