साध्वी प्रेम बाईसा की पैतृक गांव में समाधि, साधु-संतों का रहा जमावड़ा, रातभर चले भजन

साध्वी प्रेम बाईसा का अंतिम संस्कार राजस्थान के बालोतरा जिले में परेऊ गांव में किया गया। यह उनका पैतृक गांव भी हैं। जहां भक्तों और साधु-संतों की मौजूदगी में उन्हें समाधि दी गई।

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Ashish Bhardwaj
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News In Short 

साध्वी प्रेम बाईसा का अंतिम संस्कार 30 जनवरी को बालोतरा में उनके पैतृक गांव परेऊ में हुआ।

उनका शव जोधपुर से परेऊ गांव लाया गया, जहां रातभर भजन कीर्तन चलता रहा।

साध्वी को उनके आश्रम में पूरे विधि-विधान से समाधि दी गई।

गांव में साधु-संतों और भक्तों की भारी भीड़ जमा हुई, और सभी ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

साध्वी प्रेम बाईसा की जीवन यात्रा भक्ति और आध्यात्मिक शिक्षा से भरपूर थी।

News In Detail 

साध्वी प्रेम बाईसा को शुक्रवार 30 जनवरी को उनके आश्रम में पूरे विधि-विधान से समाधि दी गई। इस दौरान उनके अनुयायी और साधु-संत बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। साध्वी प्रेम बाईसा का निधन 28 जनवरी को जोधपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ था।

पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचा 

साध्वी का शव जोधपुर से परेऊ गांव लाए जाने से पहले पोस्टमार्टम किया गया था। लेकिन रिपोर्ट अभी तक सामने नहीं आई है। शव के गांव पहुंचने पर रातभर भजन कीर्तन चलता रहा और पूरे वातावरण में शोक और श्रद्धा का मिश्रण बना रहा।

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Photograph: (The soort)

अंतिम दर्शन और समाधि का आयोजन

गांव में बड़ी संख्या में साधु-संत और उनके अनुयायी पहुंचे, जहां शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। अंतिम संस्कार के बाद साध्वी प्रेम बाईसा को समाधि दी गई। उनका अंतिम संस्कार उनके द्वारा स्थापित शिव शक्ति धाम आश्रम में किया गया।

साध्वी प्रेम बाईसा की जीवन यात्रा

साध्वी प्रेम बाईसा बालोतरा जिले के परेऊ गांव की निवासी थीं। उनके पिता वीरमनाथ ट्रक चालक थे और उनकी मां का निधन जब वे केवल दो साल की थीं, तब हो गया था। इसके बाद उनकी जीवन यात्रा में उनकी मां की भक्ति भावना का गहरा असर पड़ा। उनके पिता उन्हें जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम ले गए, जहां संत राजाराम जी और कृपाराम जी के मार्गदर्शन में उन्होंने आध्यात्मिक शिक्षा ली।

व्यक्तिगत जीवन और गांव की चुप्पी

साध्वी की मौत पर उनके पिता जो भावुक रूप से रोते हुए नजर आए।  इस दुखद घटना के बाद हर कोई स्तब्ध दिखाई दे रहा है। साध्वी की मौत पर लगातार सवाल उठ रहे है। फ़िलहाल मामले की जांच पुलिस कर रही हैं।

इंजेक्शन के 5 मिनट बाद ही मौत

उनके पिता ने कहा कि बुधवार सुबह साध्वी प्रेम बाइसा को सामान्य जुकाम और सांस हो रहा था। उन्होंने आश्रम में एक कंपाउंडर को बुलाया गया था। कंपाउंडर ने उन्हें एक इंजेक्शन लगाया था। इंजेक्शन लगने के महज 5 मिनट के भीतर ही उनकी तबीयत और भी बिगड़ गई थी। इसके बाद उन्हें जोधपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया था। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मौत के बाद सोशल मीडिया की पोस्ट

इस मामले ने उस समय मोड़ ले लिया जब उनकी मृत्यु शाम करीब 5:30 बजे के 4 घंटे बाद रात करीब 9:30 बजे उनके इंस्टाग्राम हैंडल से एक भावुक पोस्ट शेयर की गई। इस पोस्ट में लिखा था, "मैं अपनी अग्निपरीक्षा देने जा रही हूं…जीते जी इंसाफ नहीं मिला, लेकिन अब शायद मिल जाए। सनातन धर्म के लिए मेरी विदाई स्वीकार करें।" पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि जब साध्वी की मृत्यु के बाद ये पोस्ट किस ने की थी 

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