सांगानेर की 848 रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों को राहत, जानें पूरा मामला

Mukesh Sharma | Mar 21, 2026, 24:17 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाईकोर्ट ने सांगानेर की 848 रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों को राहत देते हुए कॉमर्शियल कोर्ट के कुर्की और सीज करने के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि व्यक्तिगत सदस्यों के खिलाफ कुर्की नहीं की जा सकती।

News In Short

  • सांगानेर की रंगाई-छपाई की 848 फैक्ट्रियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत।
  • सीईटीपी प्लांट के भुगतान का है विवाद।
  • कॉमर्शियल कोर्ट का कुर्की का आदेश रद्द।
  • कॉमर्शियल कोर्ट को मामले में पुन:सुनवाई के आदेश।

News In Detail

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के सांगानेर स्थित 848 रंगाई-छपाई फैक्ट्री मालिकों को बड़ी राहत देते हुए जयपुर कॉमर्शियल कोर्ट के 14 फरवरी 2025 के आदेश को रद्द कर दिया। इस आदेश में फैक्ट्रियों को सीज कर कुर्क करने के निर्देश दिए गए थे। इस आदेश पर हाई कोर्ट ने पहले ही अंतरिम रोक लग रखी थी। अब विस्तृत सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने इस आदेश को रद्ध करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए कॉमर्शियल कोर्ट को भेज दिया है।



अधिकार सीमा से बाहर नहीं जा सकता आदेश

हाईकोर्ट ने कहा है कि निष्पादन कार्यवाही के दौरान कोई भी अदालत अपनी अधिकार-सीमा से बाहर जाकर नए दायित्व तय नहीं कर सकती। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि कॉमर्शियल कोर्ट सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर देते हुए केवल निष्पादन की सीमाओं में रहकर फैसला करे।



सदस्यों पर व्यक्तिगत कुर्की गलत

मामले में कॉमर्शियल कोर्ट ने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के बकाया भुगतान के लिए फैक्ट्री मालिकों की संपत्तियों की कुर्की के आदेश दिए थे। इस आदेश को सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार का कहना था कि आदेश गलत है क्योंकि, भुगतान का दायित्व केवल डवलपमेंट कंपनी का है ना कि व्यक्तिगत सदस्यों का । इसलिए सदस्यों से व्यक्तिगत रुप से वसूली करने और वसूली नहीं होने पर कुर्की की कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने माना है कि कंपनी के सदस्यों के खिलाफ व्यक्तिगत कुर्की नहीं की जा सकती।



145 करोड़ के सीईटीपी प्रोजेक्ट से जुड़ा विवाद

सांगानेर की रंगाई-छपाई इकाइयों के अपशिष्ट जल के शोधन के लिए करीब 145 करोड़ रुपए की लागत से सीईटीपी प्लांट प्रस्तावित था। यह प्रोजेक्ट एडवेंट एनवीरोकेयर टैक्नोलॉजी और सांगानेर एनविरो प्रोजेक्ट डवलपमेंट के बीच समझौते से शुरू हुआ। जीएसटी लागू होने के बाद लागत बढ़ने और भुगतान विवाद के चलते कंपनी ने काम रोक दिया और मामला अदालत तक पहुंचा था। प्रोजेक्ट का बना हुआ बाकी काम राज्य सरकार पूरा करवा रही है।



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