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Photograph: (The Sootr)
राजस्थान के अलवर जिले में स्थित सरिस्का टाइगर प्रोजेक्ट (Sariska Tiger Project) में जंगल की जमीन पर बनाए गए होटलों, रेस्टोरेंट और रिसॉर्ट्स को बंद कराने के लिए प्रशासन के पास महज तीन महीने का समय है। एक साल पहले प्रशासन ने इन प्रतिष्ठानों का सर्वे कराया था, लेकिन अब तक प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। यह स्थिति एक बार फिर प्रशासनिक निष्क्रियता की ओर इशारा करती है, जो पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection) के लिए चिंताजनक है।
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सरिस्का बफर और राजस्व बफर एरिया: जांच और कार्रवाई का इंतजार
सरिस्का टाइगर प्रोजेक्ट (Sariska Tiger Project) के अंतर्गत आने वाले बफर और राजस्व बफर एरिया में बनाए गए इन होटलों और रिसॉर्ट्स के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जा रही थी। हालांकि, प्रशासन ने एक साल पहले इन प्रतिष्ठानों का सर्वे किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रशासन के पास केवल तीन महीने का समय है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इन प्रतिष्ठानों को बंद कराने के लिए नवंबर 2025 तक समय निर्धारित किया है।
सरिस्का टाइगर प्रोजेक्ट के क्षेत्रीय निदेशक संग्राम सिंह कटियार ने कहा कि जंगल की जमीन पर कोई भी कॉमर्शियल प्रतिष्ठान नहीं है। हालांकि, प्रशासन राजस्व बफर एरिया में बनें होटलों और रिसॉर्ट्स के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट के आदेशों पर तेजी से काम चल रहा है और गांवों का विस्थापन प्रक्रियाधीन है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए रोडवेज को टेंडर करने को पत्र लिखा गया है।
सरिस्का को लेकर सीईसी की रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश
सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (Central Empowered Committee - CEC) ने करीब एक साल पहले सरिस्का का दौरा किया था और यहां की बेहतरी के लिए एक रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट में 23 सिफारिशें की गई थीं, जिन पर राज्य सरकार को कार्रवाई करनी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन सिफारिशों को लेकर राज्य सरकार को निर्देश दिए थे, लेकिन राज्य सरकार ने इन कार्यों को पूरा करने के लिए एक साल का समय कोर्ट से मांगा था। अब यह समय नवंबर 2025 में समाप्त हो रहा है, और प्रशासन को जल्द ही इन कार्यों को पूरा करना होगा।
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सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की प्रमुख सिफारिशों पर काम नहीं हुआ पूरा
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद से कई महत्वपूर्ण सिफारिशों पर काम अधूरा है। इनमें से कुछ प्रमुख बिंदु हैं:
इलेक्ट्रिक बसों का संचालन: सरिस्का में इलेक्ट्रिक बसों (Electric Buses) का संचालन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। यह एक महत्वपूर्ण कदम था जो पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी होता।
गांवों का विस्थापन: सरिस्का में बाघों (Tigers) और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आसपास के गांवों का विस्थापन जरूरी था, लेकिन यह काम भी अब तक पूरा नहीं हो पाया।
ग्रामीणों के परिचय पत्र: विस्थापित ग्रामीणों के परिचय पत्र (Identity Cards) भी अभी तक तैयार नहीं किए गए हैं, जो उनकी पहचान और पुनर्वास के लिए जरूरी थे।
फॉरेस्ट गार्ड की संख्या में इजाफा: बाघों की सुरक्षा के लिए फॉरेस्ट गार्ड (Forest Guards) की संख्या में इजाफा किया जाना था, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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सरिस्का में प्रशासन की सक्रियता का अभाव
सरिस्का टाइगर रिजर्व प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) और सीईसी के आदेशों के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। सरिस्का के क्षेत्रीय निदेशक ने हाल ही में कहा कि कुछ कार्य प्रक्रियाधीन हैं, लेकिन जब तक इन कार्यों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक इन प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई करना कठिन है।
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पर्यावरणीय संकट: जंगल की भूमि पर कॉमर्शियल गतिविधियों का असर
सरिस्का टाइगर प्रोजेक्ट (Sariska Tiger Project) एक महत्वपूर्ण बायोस्फियर रिजर्व (Biosphere Reserve) है, जहां बाघों का संरक्षण किया जाता है। यहां की जंगल की भूमि पर कॉमर्शियल गतिविधियों का संचालन न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि पर्यावरणीय संकट भी पैदा करता है। जंगल की जमीन पर होटल, रेस्टोरेंट और रिसॉर्ट्स का निर्माण प्राकृतिक संसाधनों की अंधाधुंध उपयोगिता को बढ़ावा देता है, जिससे जैव विविधता (Biodiversity) पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
जलवायु परिवर्तन और बाघों की सुरक्षा
जलवायु परिवर्तन और बढ़ते मानव गतिविधियों के कारण वन्यजीवों की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन गया है। सरिस्का टाइगर प्रोजेक्ट में बाघों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास को बनाए रखना जरूरी है। यदि प्रशासन ने जल्द ही इन बफर क्षेत्रों में स्थित सरिस्का में होटल बंद करने की प्रक्रिया नहीं की, तो यह परियोजना और यहां के बाघों की सुरक्षा के लिए खतरे का संकेत हो सकता है।
प्रशासन को त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता
सरिस्का टाइगर प्रोजेक्ट (Sariska Tiger Project) में किए गए सर्वे और सरिस्का पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला के बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता के कारण पर्यावरणीय संरक्षण पर सवाल उठ रहे हैं। इन होटलों और रिसॉर्ट्स के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि सरिस्का का प्राकृतिक आवास और बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाने की आवश्यकता है।
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