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Photograph: (the sootr)
News In Short
राजस्थान के एकल पट्टा प्रकरण में एसीबी को अग्रिम जांच की अनुमति मिली
गहलोत सरकार ने मामले को बंद कर दिया था, लेकिन भजनलाल सरकार ने फिर से खोला
तीन अधिकारियों और पूर्व मंत्री शांति धारीवाल पर आरोप
एसीबी को अब अदालत से जांच की अनुमति, 2013 के मामले में कार्रवाई
मामले में उच्चतम न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए पुनः सुनवाई के आदेश दिए
News In Detail
राजस्थान के बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण में ट्रायल कोर्ट ने एसीबी को अग्रिम जांच की अनुमति दे दी है। इस मामले में पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार ने पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और तीन अधिकारियों को क्लीन चिट दी थी। लेकिन भजनलाल सरकार ने फिर से मामले की जांच शुरू करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने एसीबी को विस्तृत जांच करने का आदेश दिया है। इस मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो अब कार्रवाई करेगा। इससे पूर्व मंत्री धारीवाल की मुश्किलें बढ़ सकती है।
एकल पट्टा प्रकरण में एसीबी को अग्रिम जांच की अनुमति
प्रदेश के बहुचर्चित एकल पट्टा प्रकरण में अब एसीबी अग्रिम जांच करेगी। इसे लेकर आज एसीबी के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए ट्रायल (एसीबी) कोर्ट ने एसीबी को अग्रिम जांच करने की अनुमति दे दी हैं। बता दे कि गहलोत सरकार के समय एसीबी ने इस प्रकरण में आरोपी रहे तीनों सरकारी अधिकारियों सहित पूर्व मंत्री शांति धारीवाल को क्लीन चिट देते हुए मामले को बंद कर दिया था। लेकिन अब भजनलाल सरकार में उच्चस्तर पर इस मामलें की विस्तृत जांच करने के निर्णय के बाद एसीबी ने ट्रायल कोर्ट से अनुमति मांगी थी। जिस पर आदेश देते हुए कोर्ट एसीबी को अग्रिम जांच करने की छूट दी हैं।
अभियोजन वापसी के आवेदन को वापस लेने का प्रार्थना पत्र खारिज
इस मामले में आरोपी रहे तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर और जेडीए के जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी के खिलाफ अभियोजन (मामला) वापसी को लेकर गहलोत सरकार के समय एसीबी ने 19 जनवरी 2021 को आवेदन किया था।
अब करीब 5 साल बाद भजनलाल सरकार ने इस आवेदन को वापस लेने का प्रार्थना पत्र दायर किया था। जिसे एसीबी कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि साल 2021 में ही कोर्ट उस आवेदन को खारिज कर चुकी हैं। ऐसे में आवेदन को वापस लेने का एसीबी का प्रार्थना पत्र स्टैंड ही नहीं करता हैं।
तीन पूर्व अधिकारी हैं मामले में आरोपी
जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने 29 जून 2011 को गणपति कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर शैलेंद्र गर्ग के नाम एकल पट्टा जारी किया था। इसकी शिकायत परिवादी रामशरण सिंह ने वर्ष 2013 में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) में की थी। एसीबी में शिकायत के बाद तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, जेडीए के जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी सहित शैलेंद्र गर्ग और दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। इनके खिलाफ एसीबी कोर्ट में चालान पेश किया था। मामला बढ़ने पर विभाग ने 25 मई 2013 को एकल पट्टा निरस्त कर दिया था।
सरकार बदलते ही एसीबी ने तीन क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में की पेश
प्रदेश में सरकार बदलते ही तत्कालीन गहलोत सरकार में एसीबी ने मामले में तीन क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी थी। तीनों क्लोजर रिपोर्ट में सरकार ने मामले में पूर्व आईएएस जीएस संधू, पूर्व आरएएस निष्काम दिवाकर और ओंकारमल सैनी को क्लीन चिट दी थी। इसके बाद सरकार ने साल 2021 में तीनों के खिलाफ मामला वापस लेने का आवेदन एसीबी कोर्ट मे दायर कर दिया।
एसीबी कोर्ट ने खारिज कर दिया था आवेदन
मामला वापस लेने के सरकार के आवेदन को एसीबी कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद तीनों अधिकारियों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इनकी अपील पर 17 जनवरी 2023 को हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के संधू, दिवाकर और सैनी के खिलाफ केस वापस लेने को सही मान लिया।
इस आदेश के खिलाफ अशोक पाठक ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को खुद इस मामले की सुनवाई करने के लिए कहा। इस पर हाईकोर्ट सुनवाई कर रही है।
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