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Photograph: (the sootr)
News In Short
- थानागाजी फोर्ट की नीलामी अब नहीं होगी, कोर्ट ने लगाई रोक
- कोर्ट ने नीलामी प्रक्रिया को माना अवैध, कहा—यह प्रक्रिया गलत
- 2013 में नजूल संपत्ति निस्तारण समिति चाहती थी फोर्ट की नीलामी
- 1999 में सरकार ने वन विभाग को दिया था यह फोर्ट
- सरिस्का टाइगर रिजर्व के पास पड़ता है यह फोर्ट
News In Detail
सुनील जैन​@अलवर।
राजस्थान में अलवर जिले के थानागाजी फोर्ट की नीलामी अब नहीं होगी। इस किले के स्वामित्व और नीलामी को लेकर 13 साल से चल रहे कानूनी विवाद में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने आदेश में नीलामी को निरस्त कर दिया है।
नीलामी नियमों के विपरीत
यह फैसला सिविल जज नरेंद्र कुमार मीना ने ग्राम पंचायत बनाम राजस्थान सरकार मामले में सुनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नीलामी प्रक्रिया को नियमों के विपरीत माना। उसने आदेश दिया कि
नीलामी में जमा कराई गई पूरी राशि नीलामकर्ता को 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस लौटाई जाए। इस मामले में अलवर के उपवन संरक्षक आरके हुड्डा के निर्देशन में वन विभाग का मजबूत पक्ष रखा।
वन विभाग को मिला था यह किला
बताया जाता है कि थानागाजी फोर्ट खसरा नंबर 2584 पर पहाड़ी पर बना हुआ है। इसका कुल क्षेत्रफल 22.44 हेक्टेयर है। यह भूमि 16 नवंबर 1999 को राज्य सरकार ने वन विभाग को हस्तांतरित की थी। इसके बावजूद 2013 में जिला स्तरीय नजूल संपत्ति निस्तारण समिति की नीलामी को कोर्ट ने अवैध करार दिया।
आदेश में सुप्रीम कोर्ट का भी हवाला
कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 12 दिसंबर 1996 के उस फैसले का उल्लेख किया, जिसमें स्पष्ट किया कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार की गैर-वानिकी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस आधार पर नीलामी को पूर्णतः नियम विरुद्ध मानते हुए निरस्त किया गया।
सरिस्का के पास है थानागाजी किला
यह एतिहासिक फोर्ट सरिस्का टाइगर रिजर्व के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप पड़ता है। यह ऐतिहासिक के साथ-साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी काफी अहम है। क्षेत्रीय वन अधिकारी जितेन्द्र कुमार सैन ने बताया कि न्यायालय के निर्णय के बाद किले को इको-ट्यूरिज्म साइट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। कोर्ट के इस फैसले से थानागाजी किले की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक पहचान को नया आयाम मिलेगा।
क्या है किले का इतिहास
थानागाजी किला राजस्थान के अलवर जिले में थानागाजी कस्बे की एक छोटी पहाड़ी पर स्थित एक 18वीं सदी का ऐतिहासिक किला है। इसका निर्माण राव राजा प्रताप सिंह ने करवाया था। सरिस्का टाइगर रिजर्व के निकट स्थित यह किला वर्तमान में जर्जर अवस्था में है और वन विभाग के अंतर्गत है। यह 2004 के बाद से खंडहर बन गया है और अब एक ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
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