सुखाड़िया यूनिवर्सिटी में गेस्ट फैकल्टी चयन पर विवाद, NET-JRF के अंकों से लेकर आरक्षण तक उठे सवाल
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 05, 2026, 12:01 IST
NET-JRF अंकों पर बड़ा विवाद
उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में जूलॉजी विभाग की गेस्ट फैकल्टी चयन प्रक्रिया पर गंभीर विवाद उठ खड़ा हुआ है। शिकायत में नियमों के उल्लंघन, अंक गणना में त्रुटि और आरक्षण के नियमों का पालन न करने के आरोप लगाए गए हैं। डॉ. रूपसिंह मीणा ने उच्च न्यायालय में अपील कर अंतरिम राहत प्राप्त की है।
उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में जूलॉजी विभाग की गेस्ट फैकल्टी चयन प्रक्रिया विवादों में आ गई है। चयन में कथित तौर पर मेरिट तैयार करने के दौरान नियमों के अनुसार अंक नहीं देने, NET और JRF के अंकों की गणना में गड़बड़ी करने और आरक्षण प्रावधानों का पालन नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। मामले में लंबे समय से गेस्ट फैकल्टी के रूप में सेवाएं दे रहे डॉ. रूपसिंह मीणा की ओर से भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि चयन समिति की ओर से तैयार की गई स्कोर शीट में उन योग्यताओं के लिए निर्धारित सीमा से अधिक अंक दिए गए, जिनके लिए विश्वविद्यालय के नियमों में अधिकतम अंक तय हैं। इसी कथित गड़बड़ी के कारण मेरिट सूची में अभ्यर्थियों की स्थिति प्रभावित होने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत के अनुसार विश्वविद्यालय के सेल्फ फाइनेंसिंग एडवाइजरी बोर्ड के नियमों में NET, SET, MPhil और JRF जैसी योग्यताओं को मिलाकर अधिकतम 10 अंक की सीमा निर्धारित है।
आरोप है कि चयन प्रक्रिया में इस सीमा का पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों के NET और JRF के लिए अलग-अलग 15-15 अंक तक जोड़ दिए गए। इससे उनकी कुल मेरिट में बढ़ोतरी हुई और चयन सूची की स्थिति प्रभावित हुई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सही तरीके से गणना करने पर कुछ अभ्यर्थियों के अंक अलग आते हैं। उदाहरण के तौर पर एक अभ्यर्थी के 91.29 और दूसरे के 83.99 अंक बनने की बात कही गई है। ऐसे में शिकायतकर्ता पक्ष ने पूरी स्कोर शीट और मेरिट को दोबारा जांचने की मांग की है।
इस पूरे विवाद में डॉ. रूपसिंह मीणा का मामला भी प्रमुख है। शिकायत के मुताबिक डॉ. मीणा पिछले 10 साल से ज्यादा समय से जूलॉजी विषय में गेस्ट फैकल्टी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
उनकी ओर से आरोप लगाया गया है कि इंटरव्यू में उन्हें महज 10 अंक दिए गए और इसके चलते उनका कुल स्कोर 58.31 रह गया। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि अगर नियमों के मुताबिक अंक दिए जाते तो उनकी मेरिट स्थिति अलग हो सकती थी।
डॉ. मीणा के मामले में हाईकोर्ट का रुख भी सामने आया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार अदालत ने उनकी सेवाएं हटाने पर अंतरिम रोक लगाई और विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। साथ ही उन्हें जूलॉजी विषय में गेस्ट फैकल्टी के रूप में सेवाएं जारी रखने की अनुमति देने के निर्देश बताए गए हैं।
मामले में चयन समिति की बैठक और इंटरव्यू पैनल को लेकर भी शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि चयन समिति में निर्धारित सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी, लेकिन इंटरव्यू के दौरान केवल दो सदस्य मौजूद थे।
इसे चयन प्रक्रिया के नियमों के खिलाफ बताते हुए शिकायत में समिति के गठन और इंटरव्यू की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। एसटी, एससी, ओबीसी और महिला वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि तैयार की गई मेरिट सूची को विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए मेरिट सूची और अभ्यर्थियों को मिले अंकों की जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है। इसी वजह से चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और स्कोर शीट की दोबारा जांच की मांग की जा रही है।
जूलॉजी विभाग की शीर्ष-10 चयन सूची में ST वर्ग का एक भी अभ्यर्थी नहीं होने को लेकर भी शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता पक्ष ने UGC की आरक्षण नीति और केंद्र सरकार के संबंधित नियमों का हवाला देते हुए आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
शिकायत में 16 फरवरी 2026 के UGC निर्देश का भी उल्लेख किया गया है और दावा किया गया है कि 45 दिन से ज्यादा की अस्थायी नियुक्तियों में भी आरक्षण प्रावधानों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पूरे मामले को लेकर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. कैलाश डागा को ज्ञापन सौंपे जाने की बात सामने आई है। ज्ञापन में चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि अगर चयन प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो पूरी मेरिट सूची और स्कोर शीट की दोबारा जांच होनी चाहिए। साथ ही आरक्षण और चयन समिति के गठन से जुड़े नियमों की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोपों और विश्वविद्यालय की ओर से संभावित जवाब के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि NET, SET, MPhil और JRF के लिए अंक किस नियम के तहत जोड़े गए और चयन समिति ने किस आधार पर अंतिम मेरिट तैयार की।
वहीं, डॉ. रूपसिंह मीणा से जुड़ा हाईकोर्ट का मामला भी आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण रहेगा। राजस्थान हाईकोर्ट ने गेस्ट फैकल्टी से जुड़े अन्य मामलों में भी पुराने और अनुभवी गेस्ट फैकल्टी की निरंतरता तथा नए चयन के बीच संतुलन पर निर्देश दिए हैं।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि चयन समिति की ओर से तैयार की गई स्कोर शीट में उन योग्यताओं के लिए निर्धारित सीमा से अधिक अंक दिए गए, जिनके लिए विश्वविद्यालय के नियमों में अधिकतम अंक तय हैं। इसी कथित गड़बड़ी के कारण मेरिट सूची में अभ्यर्थियों की स्थिति प्रभावित होने का आरोप लगाया गया है।
10 अंक की जगह 15-15 अंक देने का आरोप
आरोप है कि चयन प्रक्रिया में इस सीमा का पालन नहीं किया गया। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों के NET और JRF के लिए अलग-अलग 15-15 अंक तक जोड़ दिए गए। इससे उनकी कुल मेरिट में बढ़ोतरी हुई और चयन सूची की स्थिति प्रभावित हुई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि सही तरीके से गणना करने पर कुछ अभ्यर्थियों के अंक अलग आते हैं। उदाहरण के तौर पर एक अभ्यर्थी के 91.29 और दूसरे के 83.99 अंक बनने की बात कही गई है। ऐसे में शिकायतकर्ता पक्ष ने पूरी स्कोर शीट और मेरिट को दोबारा जांचने की मांग की है।
डॉ. रूपसिंह मीणा ने भी उठाई आपत्ति
उनकी ओर से आरोप लगाया गया है कि इंटरव्यू में उन्हें महज 10 अंक दिए गए और इसके चलते उनका कुल स्कोर 58.31 रह गया। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि अगर नियमों के मुताबिक अंक दिए जाते तो उनकी मेरिट स्थिति अलग हो सकती थी।
डॉ. मीणा के मामले में हाईकोर्ट का रुख भी सामने आया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार अदालत ने उनकी सेवाएं हटाने पर अंतरिम रोक लगाई और विश्वविद्यालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। साथ ही उन्हें जूलॉजी विषय में गेस्ट फैकल्टी के रूप में सेवाएं जारी रखने की अनुमति देने के निर्देश बताए गए हैं।
चयन समिति के कोरम पर भी सवाल
इसे चयन प्रक्रिया के नियमों के खिलाफ बताते हुए शिकायत में समिति के गठन और इंटरव्यू की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। एसटी, एससी, ओबीसी और महिला वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
मेरिट सूची सार्वजनिक नहीं करने का आरोप
शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए मेरिट सूची और अभ्यर्थियों को मिले अंकों की जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है। इसी वजह से चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और स्कोर शीट की दोबारा जांच की मांग की जा रही है।
ST वर्ग को लेकर भी उठे सवाल
शिकायत में 16 फरवरी 2026 के UGC निर्देश का भी उल्लेख किया गया है और दावा किया गया है कि 45 दिन से ज्यादा की अस्थायी नियुक्तियों में भी आरक्षण प्रावधानों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय प्रशासन से जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि अगर चयन प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो पूरी मेरिट सूची और स्कोर शीट की दोबारा जांच होनी चाहिए। साथ ही आरक्षण और चयन समिति के गठन से जुड़े नियमों की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
अब जांच के बाद साफ होगी स्थिति
वहीं, डॉ. रूपसिंह मीणा से जुड़ा हाईकोर्ट का मामला भी आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण रहेगा। राजस्थान हाईकोर्ट ने गेस्ट फैकल्टी से जुड़े अन्य मामलों में भी पुराने और अनुभवी गेस्ट फैकल्टी की निरंतरता तथा नए चयन के बीच संतुलन पर निर्देश दिए हैं।
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