आनंद महिंद्रा को चंबल रिवर फ्रंट की खूबसूरती ने किया चकित, पहले समझे AI अब वंडरर लिस्ट में शामिल
उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने कोटा के हेरिटेज चंबल रिवर फ्रंट की तारीफ की है। उन्होंने इसे पहली बार तस्वीर में देखकर एआई निर्मित समझा लेकिन यह असली पाया। रिवर फ्रंट का निर्माण 1450 करोड़ रुपए से हुआ है और इसमें 27 घाट हैं। महिंद्रा ने इसकी खूबसूरती को पर्यटन में सुधार का साधन मानते हुए देखने की इच्छा जाहिर की। रिवर फ्रंट के बारे में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
लेकिन जब गहनता से इसको आगे देखा तो सामने आया कि यह असली है। यह चकित कर देने वाला भी है। आनंद महिंद्रा ने कहा कि चंबल हेरिटेज रिवर फ्रंट को अभी काफी प्रसिद्ध होने की दरकार है। उन्होंने लोगों से पूछा है कि जितनी खूबसूरत इसकी तस्वीर नजर आती है, क्या यह उतना ही खूबसूरत है।
किसकी की तारीफ
उन्होंने कहा कि यह मेरी वंडरर लिस्ट में शामिल है। मैं इसे देखना चाहता हूं। उन्होंने यह भी कहा कि ज्यादा लोग इसके बारे में नहीं जानते हैं, जिन्होंने यह नहीं देखा है। लोगों को इसके बारे में जानना चाहिए।
My first reaction on seeing this was: AI.My second reaction, after checking: Good grief. It’s real.This is the Chambal Riverfront in Kota.For most of us, the name Kota probably brings to mind its huge coaching industry. And, sadly, the controversies around the intense pressure on students there.But this is a side of Kota I had absolutely no idea existed.2.75 km along both banks of the Chambal. Ghats, promenades, fountains and some fairly spectacular public spaces.And apparently I’m not the only one who hasn’t discovered it. The riverfront is reportedly attracting only around 1,000 visitors a day.Why haven’t we heard more about it?Credit to Shanti Dhariwal, then Rajasthan’s Urban Development Minister, who drove the project, the Kota Urban Improvement Trust and architect Anoop Bartaria.Judging from these images, it certainly deserves to be better known.Kota just went on my Wanderer list.Anyone been there? Does the reality live up to the pictures?(Video & pic courtesy @ind_whitepill )#SundayWanderer
— anand mahindra (@anandmahindra) October 4, 2026
कोटा की छवि पर बात
चंबल नदी के दोनों किनारों पर करीब 3 किलोमीटर का रिवर फ्रंट है। यहां पर अलग-अलग घाट बने हुए हैं। इसके अलावा फाउंटेन और पर्यटकों को देखने के लिए काफी कुछ है। रिवर फ्रंट पर आमतौर पर कम लोग ही रोज पहुंच रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी अद्भुत पर्यटन स्थल के बारे में अभी तक क्यों नहीं सुना। उन्होंने लोगों से इसकी तस्वीरें शेयर करने का भी आग्रह किया है। इससे ज्यादा लोग इसे जान सकेंगे।
मंत्री बता रहे सफेद हाथी
प्रदेश के यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा कोटा के हेरिटेज चंबल रिवर फ्रंट को कई बार सफेद हाथी बता चुके हैं। उनका कहना था कि रिवर फ्रंट पर पर्यटकों का फुटफॉल नहीं है। वहां पर व्यवस्थाएं सुचारू रखने के लिए 2 करोड़ रुपए महीना कोटा विकास प्राधिकरण को खर्च करना पड़ रहा है। जबकि पर्यटकों से इतनी आमदनी नहीं है।
धारीवाल ने क्या कहा?
इसलिए टूरिस्ट का फुटफॉल कम रहता है। इसके प्रचार-प्रसार को किया जाता तो स्थिति आज जैसी नहीं रहती। सरकार की मंशा सही नहीं है। उन्होंने कहा कि रिवर फ्रंट को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
पर्यटन बढ़ाने पर जोर
होटल फेडरेशन के राजस्थान के कोटा संभाग अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी का कहना है कि रिवर फ्रंट अद्भुत है और इसका प्रमोशन होना चाहिए। ट्रेवल मार्ट में आए टूर ऑपरेटरों ने भी चंबल रिवर फ्रंट की तारीफ की थी। ट्रेवल मार्ट के बाद कोटा में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है।
कितने में बना रिवर फ्रंट
अलग-अलग जगह की स्थापत्य कला भी है। हालांकि चंबल हेरिटेज रिवर फ्रंट पर होटल का निर्माण भी प्रस्तावित था, यह आगे नहीं बढ़ पाया है। रिवर फ्रंट पर टेंट सिटी स्थापित की जानी थी, यह भी नहीं हुई है। नाइट टूरिज्म के लिए यह पूरी तरह से रोशन रहता है।
राज्य की संस्कृति की झलक
यह चंबल के पानी से ही अर्घ्य दे रही है। जिसका पेडेस्टल 20 मीटर है, जबकि प्रतिमा 42 मीटर की है। विश्व का सबसे बड़ा नंदी भी यहां है। यह रिवर फ्रंट की खास पहचान बन गया है।
क्यों अहम है यह तारीफ
इससे कोटा की छवि में बदलाव आ सकता है। यह शहर सिर्फ कोचिंग के लिए नहीं, बल्कि पर्यटन के लिए भी जाना जाएगा। अब देखना जरूरी है कि सरकार इसका प्रमोशन कैसे करती है।
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