अजमेर में लॉरेंस-रोहित गोदारा के गुर्गों वाली जेल में बिल्लियों का पहरा, कोबरा से बचा चुकी कैदियों की जान
Jageshwar prasad | Oct 06, 2026, 15:51 IST
प्रदेश की सबसे हाई सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा संभालती हैं कैट्स
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बिल्लियां अब सुरक्षा का अहम हिस्सा बन गई हैं। ये चूहों के प्रति प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती हैं और कैदियों के लिए मनोरंजन का एक माध्यम भी बनी हैं। हाल ही में, एक बहादुर बिल्ली ने कोबरा सांप से एक कैदी की जान बचाकर सभी को चौंका दिया।
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल (High Security Jail) की सुरक्षा का जिम्मा केवल प्रहरी नहीं उठा रहे। सुरक्षा में उनका साथ दे रही हैं आधा दर्जन से अधिक बिल्लियां। बिल्लियां न केवल जेल को चूहों से बचा रही हैं। बल्कि एक हार्डकोर अपराधी की जान भी बचा चुकी हैं।
बिल्लियां जेल प्रहरियों के साथ कैदियों को पसंद आने लगी हैं। प्रहरियों के साथ बिल्लियां गश्त करती हैं। उनकी अठखेलियां कैदियों का मनोरंजन भी करती हैं। बिल्लियां नहीं दिखने पर कैदी खुद प्रहरियों से उनकी खैरखबर लेते हैं।
प्रदेश की
अजमेर की इकलौती सिक्योरिटी जेल में हार्डकोर अपराधी को रखा जाता है। 264 कैदियों की क्षमता वाली यह प्रदेश की सबसे सुरक्षित हाई सिक्योरिटी जेल है। इसकी स्थापना 2015 में हुई थी।
शहर के बाल सुधार गृह को बदलकर कुख्यात अपराधियों की जेल में परिवर्तित कर दिया गया। जेल में कई अधीक्षक रहे। लेकिन कोई भी ज्यादा समय नहीं टिक पाया। पारस जांगिड़ एकमात्र जेलर हैं, जो सबसे ज्यादा समय तक यहां अधीक्षक रहे। वर्तमान में पारस जांगिड़ जेल अधीक्षक हैं।
अजमेर जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ (Paras Jangid) बताते हैं कि हाई सिक्योरिटी जेल की सुरक्षा काफी अहम है। लेकिन वर्ष 2022 में चूहों ने यहां आतंक मचा दिया। आसपास जंगल होने के कारण चूहे नालियों के जरिए जेल में आ जाते थे।
चूहे जेल की रसद सामग्री के अलावा कैदियों के सामान को भी नुकसान पहुंचाते थे। चूहों पर अंकुश के लिए बिल्ली का एक जोड़ा लाया गया। इस जोड़े का कुनबा बढ़ा और कई बिल्लियां हो गईं। ये बिल्लियां जेल की सुरक्षा का हिस्सा बन गईं। बिल्लियों के कारण जेल में चूहे नहीं आते हैं। ये बिल्लियां जेल प्रहरियों और कैदियों से भी घुल-मिल गई हैं।
जेल अधीक्षक जांगिड़ ने बताया कि सवा महीने पहले कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग (Lawrence Bishnoi Gang) के एक गुर्गे की बिल्लियों ने जान बचाई। उन्होंने बताया कि रात को कैदी सो रहा था। तब नाली से कोबरा सांप सेल में आ गया।
गनीमत रही कि तब बिल्लियां सेल के आसपास थीं। कोबरा सांप देख बिल्लियों ने शोर मचाया। इससे कैदी भी जग गया। उसने प्रहरियों को बुलाकर सांप के बारे में बताया। सांप को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया। इस घटना ने बिल्लियों की उपयोगिता सामने आई।
अधीक्षक ने बताया कि जेल में 8 से अधिक बिल्लियां हैं। प्रहरियों और कैदियों ने इनके नाम रखे हैं। जैसे काली या भूरी। जेल में कैदी बाहरी दुनिया से कटे हैं। मनोरंजन के नाम पर किताबें हैं। लेकिन बिल्लियों की अठखेलियां भी उनका मन बहलाती हैं।
बिल्लियां जेल के हर हिस्से में बेखौफ घूमती हैं। प्रहरियों के साथ गश्त में भी आगे चलती हैं। गश्त के दौरान जेल अधिकारी और प्रहरी जहां रुकते हैं, वहां बिल्लियां भी रुक जाती हैं। आगे बढ़ते ही बिल्लियां भी आगे बढ़ जाती हैं।
कैदियों को भी बिल्लियों से लगाव है। वे अपने खाने से कुछ न कुछ उनको देते रहते हैं। जेल प्रहरी भी बिल्लियों का खास ध्यान रखते हैं। समय-समय पर दूध-रोटी खिलाते हैं।
बिल्लियों के कारण जेल की सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाता है। मसलन बिल्लियों के माध्यम से कोई अवांछित वस्तु भीतर न जाए, इसके लिए पूरी निगरानी रखी जाती है। इस तरह बिल्लियां जेल की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन गई हैं।
यह पहल अनोखी है। आमतौर पर जेलों में सुरक्षा के लिए कर्मचारी और तकनीक का इस्तेमाल होता है। लेकिन यहां बिल्लियों ने यह काम संभाल लिया है।
इससे जेल का माहौल भी बेहतर हुआ है। कैदियों का मनोरंजन हो रहा है। साथ ही चूहों और सांप जैसी समस्याओं से भी राहत मिली है। यह एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।
बिल्लियां जेल प्रहरियों के साथ कैदियों को पसंद आने लगी हैं। प्रहरियों के साथ बिल्लियां गश्त करती हैं। उनकी अठखेलियां कैदियों का मनोरंजन भी करती हैं। बिल्लियां नहीं दिखने पर कैदी खुद प्रहरियों से उनकी खैरखबर लेते हैं।
प्रदेश की सबसे सुरक्षित जेल में से एक
शहर के बाल सुधार गृह को बदलकर कुख्यात अपराधियों की जेल में परिवर्तित कर दिया गया। जेल में कई अधीक्षक रहे। लेकिन कोई भी ज्यादा समय नहीं टिक पाया। पारस जांगिड़ एकमात्र जेलर हैं, जो सबसे ज्यादा समय तक यहां अधीक्षक रहे। वर्तमान में पारस जांगिड़ जेल अधीक्षक हैं।
क्यों पाली गईं हाई सिक्योरिटी जेल में बिल्लियां?
चूहे जेल की रसद सामग्री के अलावा कैदियों के सामान को भी नुकसान पहुंचाते थे। चूहों पर अंकुश के लिए बिल्ली का एक जोड़ा लाया गया। इस जोड़े का कुनबा बढ़ा और कई बिल्लियां हो गईं। ये बिल्लियां जेल की सुरक्षा का हिस्सा बन गईं। बिल्लियों के कारण जेल में चूहे नहीं आते हैं। ये बिल्लियां जेल प्रहरियों और कैदियों से भी घुल-मिल गई हैं।
बिल्ली ने कोबरा से बचाई कैदी की जान
गनीमत रही कि तब बिल्लियां सेल के आसपास थीं। कोबरा सांप देख बिल्लियों ने शोर मचाया। इससे कैदी भी जग गया। उसने प्रहरियों को बुलाकर सांप के बारे में बताया। सांप को रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा गया। इस घटना ने बिल्लियों की उपयोगिता सामने आई।
प्रहरियों के साथ गश्त करती हैं बिल्लियां
बिल्लियां जेल के हर हिस्से में बेखौफ घूमती हैं। प्रहरियों के साथ गश्त में भी आगे चलती हैं। गश्त के दौरान जेल अधिकारी और प्रहरी जहां रुकते हैं, वहां बिल्लियां भी रुक जाती हैं। आगे बढ़ते ही बिल्लियां भी आगे बढ़ जाती हैं।
कैदियों को है बिल्लियों से लगाव
बिल्लियों के कारण जेल की सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाता है। मसलन बिल्लियों के माध्यम से कोई अवांछित वस्तु भीतर न जाए, इसके लिए पूरी निगरानी रखी जाती है। इस तरह बिल्लियां जेल की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन गई हैं।
क्यों अहम है यह पहल?
इससे जेल का माहौल भी बेहतर हुआ है। कैदियों का मनोरंजन हो रहा है। साथ ही चूहों और सांप जैसी समस्याओं से भी राहत मिली है। यह एक सराहनीय कदम माना जा रहा है।
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