32 साल का इंतजार हुआ खत्म; यमुना जल समझौता पर राजस्थान-हरियाणा में बनी सहमति
Jageshwar prasad | May 14, 2026, 12:55 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर 32 साल पुराना गतिरोध खत्म हो गया है। हथिनी कुंड बैराज से पाइपलाइन के जरिए चूरू, सीकर और झुंझुनूं तक पानी लाने की डीपीआर पर पूर्ण सहमति बन गई है।
News In Short
- 1994 में हुए यमुना जल समझौते पर राजस्थान और हरियाणा में अंतिम सहमति बनी।
- हथिनी कुंड बैराज से चूरू तक 265 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने की डीपीआर मंजूर।
- पिछले तीन महीनों से डीपीआर को लेकर अटका गतिरोध बैठक में सुलझा लिया गया।
- समझौते के तहत चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों को 577 एमसीएम पानी मिलेगा।
- परियोजना के तहत मानसून के दौरान राजस्थान को 1917 क्यूसेक पानी मिल सकेगा।
News In Detail
यह समझौता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अब राजस्थान का जल संसाधन विभाग इस डीपीआर को केंद्रीय जल आयोग (CWC) के पोर्टल पर अपलोड करेगा। इसके साथ ही प्रोजेक्ट के लिए बजट और अन्य संसाधनों को जुटाने का काम भी शुरू हो जाएगा।
3 महीने से अटका था मामला
शेखावाटी की प्यास बुझाएगी 265 KM लंबी पाइपलाइन
लाभार्थी जिले: चूरू, सीकर और झुंझुनूं।
कुल आवंटित जल: 577 एमसीएम।
अन्य स्रोत: भविष्य में रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ बांधों से भी इसी पाइपलाइन के जरिए पानी लाया जाएगा।
1994 का यमुना जल समझौता
| राज्य | पानी का हिस्सा (%) |
| हरियाणा | 40.6% |
| उत्तर प्रदेश | 35.1% |
| राजस्थान | 10.4% |
| दिल्ली | 6.3% |
| हिमाचल प्रदेश | 1.7% |
किशाऊ परियोजना और भिवाड़ी पर भी मंथन
तीन दशकों से अटका यह प्रोजेक्ट अब धरातल पर उतरने को तैयार है। शेखावाटी क्षेत्र, जो लंबे समय से गहरे जल संकट से जूझ रहा है, उसके लिए यह पाइपलाइन जीवनदायिनी साबित होगी। केंद्रीय मंत्री और दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच हुई इस ऑन द स्पॉट सहमति ने राजस्थान के हक का पानी मिलने का रास्ता साफ कर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
यमुना जल समझौता क्या है और यह कब हुआ था?
हथिनी कुंड-चूरू पाइपलाइन प्रोजेक्ट से किन जिलों को फायदा होगा?
अब इस प्रोजेक्ट में अगला कदम क्या होगा?
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