CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश: अब कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 जैसी छूट
CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश: अब कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 जैसी छूट

28 Sept 2026

By Arohi Raj

सुप्रीम कोर्ट का आदेश CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर आया है। कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 जैसी छूट दी है। इससे इस बैच पर तीसरी भाषा का तुरंत दबाव नहीं रहेगा। नीति खत्म नहीं हुई है। सरकार ने छूट का विरोध किया और 99 प्रतिशत स्कूल तैयार बताए। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर आया है। कोर्ट ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 जैसी छूट दी है। इससे इस बैच पर तीसरी भाषा का तुरंत दबाव नहीं रहेगा। नीति खत्म नहीं हुई है। सरकार ने छूट का विरोध किया और 99 प्रतिशत स्कूल तैयार बताए। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।

सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

28 Sept 2026

By Jitendra Shrivastava

BHOPAL. भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रविवार रात छात्रों का हंगामा हुआ। कटारा हिल्स बायपास स्थित इस हॉस्टल में खाने में कीड़े मिलने का आरोप है। छात्रों ने कॉकरोच मिलने की भी बात कही। शिकायत के बाद भी सुधार न होने की बात कही गई। कटारा हिल्स पुलिस मौके पर पहुंची। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने कहा, शिकायत नहीं मिली। फिर भी जांच टीम भेजी जाएगी।

BHOPAL. भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रविवार रात छात्रों का हंगामा हुआ। कटारा हिल्स बायपास स्थित इस हॉस्टल में खाने में कीड़े मिलने का आरोप है। छात्रों ने कॉकरोच मिलने की भी बात कही। शिकायत के बाद भी सुधार न होने की बात कही गई। कटारा हिल्स पुलिस मौके पर पहुंची। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने कहा, शिकायत नहीं मिली। फिर भी जांच टीम भेजी जाएगी।

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

28 Sept 2026

By Sanjay Dhiman

सुप्रीम कोर्ट ने UPI MDR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 15 अक्टूबर से 2,000 रुपए से ज्यादा के चुनिंदा UPI पेमेंट पर दुकानदारों को 0.4 फीसदी शुल्क देना होगा। ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। कोर्ट ने केंद्र और बाकी पक्षों से चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा मांगा है। तब तक नई व्यवस्था की तारीख नहीं बदली है।

सुप्रीम कोर्ट ने UPI MDR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 15 अक्टूबर से 2,000 रुपए से ज्यादा के चुनिंदा UPI पेमेंट पर दुकानदारों को 0.4 फीसदी शुल्क देना होगा। ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। कोर्ट ने केंद्र और बाकी पक्षों से चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा मांगा है। तब तक नई व्यवस्था की तारीख नहीं बदली है।

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
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28 Sept 2026

By Sanjay Dhiman

सुप्रीम कोर्ट ने UPI MDR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 15 अक्टूबर से 2,000 रुपए से ज्यादा के चुनिंदा UPI पेमेंट पर दुकानदारों को 0.4 फीसदी शुल्क देना होगा। ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। कोर्ट ने केंद्र और बाकी पक्षों से चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा मांगा है। तब तक नई व्यवस्था की तारीख नहीं बदली है।

सुप्रीम कोर्ट ने UPI MDR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। 15 अक्टूबर से 2,000 रुपए से ज्यादा के चुनिंदा UPI पेमेंट पर दुकानदारों को 0.4 फीसदी शुल्क देना होगा। ग्राहकों पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा। कोर्ट ने केंद्र और बाकी पक्षों से चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा मांगा है। तब तक नई व्यवस्था की तारीख नहीं बदली है।

अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब

28 Sept 2026

By Umeshwari Baghel

कोरबा का लाइफ केयर हॉस्पिटल 2011 में भ्रूणों के विभिन्न बोतलों में पाए जाने के मामले में विवाद में रहा है। निचली अदालत ने डॉक्टरों को बरी कर दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। अब हाईकोर्ट ने मेटरनिटी एक्ट के तत्वावधान में डॉक्टरों को दोषी ठहराया है, जिससे अस्पतालों के भीतर भ्रूण संरक्षण संबंधी नियमों पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं।

कोरबा का लाइफ केयर हॉस्पिटल 2011 में भ्रूणों के विभिन्न बोतलों में पाए जाने के मामले में विवाद में रहा है। निचली अदालत ने डॉक्टरों को बरी कर दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। अब हाईकोर्ट ने मेटरनिटी एक्ट के तत्वावधान में डॉक्टरों को दोषी ठहराया है, जिससे अस्पतालों के भीतर भ्रूण संरक्षण संबंधी नियमों पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं।