कोरबा के लाइफ केयर अस्पताल में चल रहा था खतरनाक खेल? 15 साल बाद भी नहीं खुल पाया राज, हाईकोर्ट भी हैरान, 3 डॉक्टर दोषी..
VINAY VERMA | Sept 28, 2026, 19:39 IST
अस्पताल का लैब, बोतलों में भ्रूण
कोरबा का लाइफ केयर हॉस्पिटल 2011 में भ्रूणों के विभिन्न बोतलों में पाए जाने के मामले में विवाद में रहा है। निचली अदालत ने डॉक्टरों को बरी कर दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। अब हाईकोर्ट ने मेटरनिटी एक्ट के तत्वावधान में डॉक्टरों को दोषी ठहराया है, जिससे अस्पतालों के भीतर भ्रूण संरक्षण संबंधी नियमों पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं।
बिलासपुर। कोरबा के दीपका स्थित लाइफ केयर हॉस्पिटल में 15 साल पहले मिले भ्रूण के मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अस्पताल में अलग-अलग बोतलों में 16 से 32 सप्ताह तक के भ्रूण मिलने के मामले में हाईकोर्ट ने तीन डॉक्टरों को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के तहत दोषी माना है। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले में आंशिक बदलाव करते हुए यह फैसला दिया। हालांकि अस्पताल में इन भ्रूण के साथ कौन सा खेल चल रहा था, अभी तक इस मामले में जवाब नहीं मिल पाया है।
मामला 7 अगस्त 2011 का है। उस दिन कोरबा के तत्कालीन सीएमएचओ और कठघोरा एसडीएम ने दीपका के लाइफ केयर हॉस्पिटल में छापा मारा था। जांच के दौरान अस्पताल में अलग-अलग बोतलों में संरक्षित किए गए भ्रूण मिले थे। इनकी उम्र 16 से 32 सप्ताह के बीच बताई गई थी। अस्पताल से कुछ एक्सपायर्ड दवाएं और गर्भपात में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी मिले थे।
छापे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि अस्पताल में इतने अधिक समय के भ्रूण क्यों रखे गए थे और उन्हें किस प्रक्रिया के तहत सुरक्षित किया गया था। मामला जांच के बाद अदालत पहुंचा। अभियोजन ने डॉक्टरों पर MTP एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
मामले की सुनवाई कटघोरा अपर सत्र न्यायालय में हुई। वहां डॉ. राजेंद्र प्रसाद रविदास, डॉ. मिथिलेश प्रसाद और रेणू श्रीवास्तव को आरोपों से बरी कर दिया गया था। निचली अदालत के इस फैसले के बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और फैसले को चुनौती दी।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह सवाल अहम रहा कि अस्पताल में मिले 16 से 32 सप्ताह के भ्रूण किस वैध चिकित्सीय जरूरत के तहत रखे गए थे। हाईकोर्ट के अनुसार आरोपी डॉक्टर यह साबित नहीं कर सके कि भ्रूणों को अस्पताल में रखना किसी वैध चिकित्सीय प्रक्रिया और सद्भावना के तहत हुआ था।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह कायम नहीं रखा। कोर्ट ने तीनों चिकित्सकों को MTP एक्ट के तहत दोषी करार दिया है। यानी जिस मामले में करीब डेढ़ दशक पहले निचली अदालत से डॉक्टरों को राहत मिल गई थी, उसमें अब हाईकोर्ट के फैसले से कानूनी स्थिति बदल गई है। हाईकोर्ट के फैसले ने अस्पतालों में गर्भपात की प्रक्रिया, भ्रूण के रखरखाव और मेडिकल नियमों के पालन को लेकर भी गंभीर सवाल सामने रखे हैं।
2011 में पड़ा था छापा
भ्रूण देखकर उठे थे सवाल
निचली अदालत ने किया था बरी
HC में नहीं दे पाए संतोषजनक जवाब
15 साल बाद बदला फैसला
FAQ - अक्सर पूछे जानें वाले सवाल
- कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में मिले भ्रूण के मामले में हाईकोर्ट का हालिया फैसला क्या है?
हाईकोर्ट ने लाइफ केयर हॉस्पिटल में मिले भ्रूण के मामले में तीन डॉक्टरों को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के तहत दोषी माना है, जिसके तहत निचली अदालत के फैसले में आंशिक बदलाव किया गया है। - क्या है भ्रूण के इस गंभीर मामले की पृष्ठभूमि?
यह मामला 2011 का है, जब कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में छापे के दौरान 16 से 32 सप्ताह तक के भ्रूण मिले थे, जिनके साथ कुछ एक्सपायर्ड दवाएं और गर्भपात में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी पाए गए थे। - हाईकोर्ट ने डॉक्टरों के दावे को क्यों अस्वीकार किया?
हाईकोर्ट ने डॉक्टरों के दावे को अस्वीकार करते हुए कहा कि वे साबित नहीं कर सके कि भ्रूणों को अस्पताल में किसी वैध चिकित्सीय प्रक्रिया या सद्भावना के तहत रखा गया था।
Fire Safety Rules 2026: आग लगी तो जिम्मेदार कौन? MP में अब हर साल देना होगा भवनों की सुरक्षा का हिसाब
By Ramanand Tiwari
पुलिस होती कौन है हमें रोकने वाली? AISF कार्यकर्ता श्रावणी का बड़ा आरोप, इटारसी हिरासत से हाईकोर्ट तक की पूरी कहानी
By Neel Tiwari
CG Top News: CM हाउस के बाहर हंगामा, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का WhatsApp हैक, मंत्रालय में 162 कर्मचारियों के तबादले समेत पढ़े बड़ी खबरें
By Umeshwari Baghel
Rajasthan Top News: जयपुर जिला परिषद चुनाव में भाजपा-कांग्रेस ने घोषित किए प्रत्याशी
By Ashish Bhardwaj
छत्तीसगढ़ के इस अभयारण्य में आएंगे 50 काले हिरण, जंगल सफारी की तैयारी, स्थानीय युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
By Umeshwari Baghel
सिवनी में 46 नवजातों की मौत का दावा: भाजपा विधायक ने अपनी ही सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल, सीएम से जांच की मांग
By Atul Dwivedi
MP 108 Ambulance Service: एम्बुलेंस सेवा के करोड़ों के भुगतान पर उठे सवाल, लोकायुक्त की एंट्री से बढ़ी हलचल
By Ramanand Tiwari