क्या छत्तीसगढ़ में डीजे और लाउडस्पीकर पर मनमानी खत्म होगी? नए ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम पर एक नज़र
Umeshwari Baghel | Sept 20, 2026, 14:11 IST
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छत्तीसगढ़ में अब आम जनता की भलाई के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। डीजे और लाउडस्पीकर का उपयोग करने के लिए सार्वजनिक आयोजनों में सरकारी अनुमति लेना अनिवार्य होगा। स्कूलों और अस्पतालों के आसपास 100 मीटर का क्षेत्र शांत क्षेत्र माना जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और जेल की सजा भी दी जाएगी। यह प्रयास ध्वनि प्रदूषण को कम कर स्वास्थ्य रक्षा में मदद करेगा।
रायपुर। छत्तीसगढ़में अब शादी-ब्याह, धार्मिक या किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में डीजे और लाउडस्पीकर पर मनमानी नहीं चलेगी। राज्य सरकार ध्वनि प्रदूषण को काबू में करने के लिए नए नियम लाने की तैयारी में है। गृह एवं पुलिस विभाग ने इसके लिए 'छत्तीसगढ़ कोलाहल नियंत्रण अधिनियम-2026' का एक मसौदा तैयार किया है। इस नए कानून के तहत, सार्वजनिक जगहों पर डीजे, लाउडस्पीकर या ऐसे ही किसी भी ध्वनि बढ़ाने वाले यंत्र का इस्तेमाल करने से पहले संबंधित सरकारी अफसरों से इजाजत लेनी होगी। अगर कोई बिना इजाजत तेज आवाज में डीजे बजाता पकड़ा गया, तो उस पर कार्रवाई होगी। इसमें भारी जुर्माना, जेल और ध्वनि उपकरण को जब्त करने जैसे कड़े प्रावधान शामिल हैं।
नए नियमों के तहत, अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्कूलों, कॉलेजों, छात्रावासों, अदालतों, सरकारी दफ्तरों और स्थानीय निकायों के आसपास 100 मीटर का इलाका 'शांत क्षेत्र' (साइलेंस जोन) घोषित किया जाएगा। इन खास इलाकों में तेज आवाज वाले उपकरणों के इस्तेमाल पर और भी ज्यादा सख्ती बरती जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस कमिश्नर अपनी जरूरत के हिसाब से किसी और इलाके को भी शांत क्षेत्र घोषित कर सकेंगे।
प्रस्तावित नियमों में दिन और रात के समय को भी साफ तौर पर बांटा गया है। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक का समय 'दिन का समय' माना जाएगा, जबकि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक का समय 'रात्रि समय' कहलाएगा। रात के समय ध्वनि बढ़ाने वाले यंत्रों के इस्तेमाल पर खास तौर पर पाबंदी रहेगी।
अगर कोई पहली बार इन नियमों को तोड़ता है, तो उस पर कम से कम 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, उसे जेल भी हो सकती है या फिर जुर्माना और जेल दोनों की सजा भुगतनी पड़ सकती है। अगर कोई शांत क्षेत्र में नियमों का उल्लंघन करता है, तो सजा और भी कड़ी होगी। ऐसे मामलों में एक साल तक की जेल और कम से कम 75 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
बार-बार नियम तोड़ने वालों के लिए तो और भी सख्त नियम बनाए गए हैं। अगर कोई दोबारा गलती करता है, तो उसे तीन महीने से लेकर एक साल तक की जेल और कम से कम एक लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है। वहीं, शांत क्षेत्र में दूसरी बार गलती करने पर छह महीने से लेकर दो साल तक की जेल और डेढ़ लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह नए कानून का असर सिर्फ कार्यक्रम आयोजित करने वालों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि डीजे और साउंड सिस्टम का कारोबार करने वालों के लिए भी नए नियम तय किए जाएंगे। जो लोग ध्वनि उपकरण बनाते हैं, बेचते हैं या किराए पर देते हैं, उन्हें अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य हो सकता है। इन कारोबारियों का पुलिस वेरिफिकेशन भी किया जाएगा। अगर कोई बिना इजाजत वाले कार्यक्रमों के लिए साउंड सिस्टम उपलब्ध कराता है, तो उस पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि साउंड सिस्टम देने वाले संचालकों को उपकरण देने से पहले कार्यक्रम आयोजित करने वाले की इजाजत की कॉपी जांचनी होगी। अगर वे बिना इजाजत के किसी कार्यक्रम में साउंड सिस्टम देते हैं, तो संबंधित कारोबारी पर भी कार्रवाई हो सकती है।
आवाज की सीमा तय करने और उसकी निगरानी के लिए 'साउंड मीटर' (ध्वनि मापक यंत्र) के इस्तेमाल को भी नियमों में शामिल किया गया है।प्रशासन जरूरत पड़ने पर ध्वनि के स्तर की जांच कर सकेगा। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वाले उपकरण सप्लाई करने वालों का रजिस्ट्रेशन स्थायी रूप से रद्द करने का विकल्प भी प्रस्ताव में रखा गया है।
सरकार का मुख्य मकसद तेज आवाज से होने वाले स्वास्थ्य पर बुरे असर और लोगों को होने वाली परेशानी को कम करना है। हालांकि, ये सभी नियम अंतिम रूप से अधिसूचना जारी होने के बाद ही लागू होंगे। फिलहाल यह सिर्फ एक मसौदा है, जिस पर आगे विचार-विमर्श के बाद फैसला लिया जाएगा।
यह नया कानून ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य लोगों के स्वास्थ्य और शांतिपूर्ण माहौल को बनाए रखना है। ध्वनि प्रदूषण न केवल सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि तनाव, नींद की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है। इसलिए, इन नियमों का पालन करना सभी के हित में होगा।
डीजे और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल अक्सर शादियों, पार्टियों और धार्मिक जुलूसों में किया जाता है। हालांकि, इनकी तेज आवाज से आसपास रहने वाले लोगों को काफी परेशानी होती है। खासकर रात के समय, जब लोग आराम करना चाहते हैं, तब तेज संगीत से उनकी नींद खराब हो सकती है। नए नियम इन समस्याओं को दूर करने में मदद करेंगे।
शांत क्षेत्र (साइलेंस जोन) की घोषणा से यह सुनिश्चित होगा कि अस्पताल और स्कूलों जैसे संवेदनशील स्थानों के आसपास शांति बनी रहे। इससे मरीजों को आराम मिलेगा और छात्रों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आएगी। यह एक बहुत ही जरूरी कदम है जो समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा करेगा।
ध्वनि उपकरण बनाने और बेचने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन और पुलिस वेरिफिकेशन की व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि केवल जिम्मेदार लोग ही इस कारोबार से जुड़े हों। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि उपकरण का इस्तेमाल नियमों के अनुसार ही हो। यह एक तरह से 'जवाबदेही' तय करने का तरीका है।
साउंड मीटर का इस्तेमाल ध्वनि के स्तर को मापने में मदद करेगा। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि कहीं आवाज तय सीमा से ज्यादा तो नहीं है। यह तकनीक ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने में बहुत उपयोगी साबित हो सकती है।
सरकार का यह प्रयास सराहनीय है। ध्वनि प्रदूषण एक गंभीर समस्या है और इसे नियंत्रित करने के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता है। उम्मीद है कि ये नए नियम प्रभावी ढंग से लागू होंगे और छत्तीसगढ़ में ध्वनि प्रदूषण का स्तर कम होगा। इससे लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा और एक शांत व स्वस्थ वातावरण बनेगा।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि ये नियम किसी के मनोरंजन को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के लिए नहीं हैं, बल्कि ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हैं। आयोजक अभी भी अपने कार्यक्रमों में संगीत का आनंद ले सकते हैं, लेकिन उन्हें नियमों का पालन करना होगा और दूसरों की शांति का भी ध्यान रखना होगा। यह एक संतुलन बनाने का प्रयास है।
अंतिम नियमों के लागू होने से पहले, सरकार जनता से सुझाव भी ले सकती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि नियम सभी की जरूरतों और चिंताओं को ध्यान में रखकर बनाए जाएं। यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे नियमों को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
संक्षेप में, छत्तीसगढ़ सरकार ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। नए नियम सार्वजनिक कार्यक्रमों में ध्वनि के इस्तेमाल को विनियमित करेंगे, शांत क्षेत्रों की सुरक्षा करेंगे और ध्वनि उपकरण कारोबारियों को जवाबदेह बनाएंगे। यह कदम राज्य में शांति और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
अस्पताल और स्कूलों के आसपास 100 मीटर का इलाका होगा शांत क्षेत्र
सुबह 6 से रात 10 बजे तक दिन, रात 10 से सुबह 6 बजे तक रात्रि समय
पहली बार नियम तोड़ा तो 50 हजार रुपये तक जुर्माना और जेल
दोबारा गलती करने पर एक लाख रुपये तक जुर्माना
डीजे और साउंड सिस्टम कारोबारियों के लिए भी नए नियम
साउंड सिस्टम देने से पहले अनुमति की कॉपी जांचना जरूरी
साउंड मीटर से होगी आवाज के स्तर की निगरानी
स्वास्थ्य और लोगों की परेशानी कम करना सरकार का मकसद
ध्वनि प्रदूषण से सुनने की क्षमता और नींद पर असर
शादी, पार्टी और धार्मिक आयोजनों में तेज आवाज से परेशानी
अस्पताल और स्कूलों के आसपास शांति बनाए रखने पर जोर
साउंड सिस्टम कारोबारियों की तय होगी जवाबदेही
साउंड मीटर से तय सीमा से ज्यादा आवाज की होगी जांच
सरकार का यह प्रयास सराहनीय है
मनोरंजन पर पूरी तरह रोक नहीं, नियमों का पालन जरूरी
अंतिम नियमों से पहले जनता से लिए जा सकते हैं सुझाव
ध्वनि प्रदूषण रोकने की दिशा में बड़ा कदम
- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू किए जा रहे नए ध्वनि प्रदूषण नियम क्या हैं?
छत्तीसगढ़ सरकार नए ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत, सार्वजनिक स्थानों पर डीजे और लाउडस्पीकर के उपयोग के लिए अनुमति लेना अनिवार्य करेगी। इसके अलावा, 100 मीटर के दायरे में स्कूलों और अस्पतालों के आसपास 'शांत क्षेत्र' घोषित किए जाएंगे। - इन नए नियमों का उल्लंघन करने पर क्या दंड होगा?
यदि कोई व्यक्ति नए नियमों का उल्लंघन करता है, तो पहले बार उसे 50 हजार रुपये तक का जुर्माना तथा जेल की सजा हो सकती है। शांत क्षेत्र में उल्लंघन करने पर सजा और भी कड़ी होगी, जिसमें एक साल तक की जेल और 75 हजार रुपये तक का जुर्माना शामिल है। - नए नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा?
नवीनतम नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 'साउंड मीटर' का उपयोग किया जाएगा, जिससे ध्वनि के स्तर की निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा, ध्वनि उपकरणों के कारोबारियों का रजिस्ट्रेशन और पुलिस वेरिफिकेशन भी अनिवार्य किया जाएगा।
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