L&T की नौकरी छोड़ी, फिर बिना कोचिंग पाई AIR 10, राजस्थान कैडर की IAS ऐश्वर्यम प्रजापति की कहानी
Jageshwar prasad | Oct 20, 2026, 17:13 IST
राजस्थान कैडर की IAS ऐश्वर्यम प्रजापति
लखनऊ की ऐश्वर्यम प्रजापति ने L&T की नौकरी छोड़कर UPSC में AIR 10 हासिल किया। बिना कोचिंग के सेल्फ स्टडी से यह मुकाम पाया। 2024 बैच की राजस्थान कैडर की IAS अधिकारी हैं। वर्तमान में वे कार्यालय जिला निर्वाचन अधिकारी, खैरथल-तिजारा (राजस्थान) में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के पद पर कार्यरत हैं।
"सपनों को पाने की जिद हो, तो असफलता भी आपकी सफलता की नींव बन जाती है।"
जब बचपन में अमूमन बच्चे खेल-खिलौनों में व्यस्त रहते हैं, तब कुछ विरले ऐसे भी होते हैं जो अपने जीवन का लक्ष्य बहुत कम उम्र में तय कर लेते हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली IAS ऐश्वर्यम प्रजापति (IAS Aishwaryam Prajapati) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
बचपन में देखा गया 'डीएम (DM)' बनने का एक मासूम सा सपना आगे चलकर उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मकसद बन गया। उन्होंने कॉरपोरेट जगत की एक शानदार नौकरी (L&T) ठुकराई। अपने पहले प्रयास में प्रीलिम्स तक न निकाल पाने के झटके को सहने के बाद, ऐश्वर्यम ने बिना किसी महंगी कोचिंग के अपने दूसरे ही प्रयास में ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल की। आइए जानते हैं उनकी इस अनुशासित और ज़मीनी रणनीति की पूरी कहानी।
ऐश्वर्यम प्रजापति उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की रहने वाली हैं। बचपन में वे दूरदर्शन पर आने वाले यूपीएससी टॉपर्स के इंटरव्यू बेहद चाव से देखा करती थीं। उन इंटरव्यूज को देखते-देखते उनके अवचेतन मन में एक आईएएस अफसर की प्रशासनिक छाप छप गई।
12वीं बोर्ड में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), उत्तराखंड से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में अपनी बी.टेक (B.Tech) की डिग्री पूरी की।
कॉलेज के दूसरे साल में ऐश्वर्यम को उत्तराखंड के मलेथा गांव के एक सरकारी स्कूल में जाने का मौका मिला। वहां उन्होंने स्कूल की ज़मीनी समस्याओं और बुनियादी ढांचे की लाचारी को बहुत करीब से देखा।
जब वहां के शिक्षकों ने उनसे बातचीत की और उम्मीद जताई कि वे आगे चलकर इन समस्याओं को दूर करने में कोई मदद करेंगी, तो इस घटना ने ऐश्वर्यम के सोचने का नज़रिया पूरी तरह बदल दिया। उन्हें अहसास हुआ कि अगर नीतिगत और व्यापक स्तर पर समाज में बदलाव लाना है, तो प्रशासनिक पद (IAS) की ताकत बेहद ज़रूरी है। यहां से बचपन में देखा गया डीएम बनने का सपना पूरी मजबूती के साथ उनके दिल-ओ-दिमाग में दोबारा लौट आया।
इंजीनियरिंग पूरी होते ही ऐश्वर्यम का चयन देश की प्रसिद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (L&T) में हो गया। उस समय कोरोना महामारी का दौर था और परिवार की इच्छा थी कि वे एक सुरक्षित नौकरी पकड़ लें।
ऐश्वर्यम ने नौकरी जॉइन तो की, लेकिन अपने पिता के सामने एक स्पष्ट शर्त रखी कि मैं केवल एक साल तक यह नौकरी करूंगी ताकि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकूं और कॉरपोरेट अनुभव ले सकूं। इसके ठीक एक साल बाद मैं नौकरी छोड़कर पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी में जुट जाउंगी।
पिता ने उनकी बात मान ली। विशाखापट्टनम में रहकर उन्होंने एक साल तक पूरी निष्ठा से काम किया। जैसे ही अगस्त में एक साल पूरा हुआ, उन्होंने L&T से अपना इस्तीफा दे दिया और वापस लौट आईं।
नौकरी छोड़ने के बाद ऐश्वर्यम तैयारी के लिए इलाहाबाद गईं। शुरुआत में उन्हें यूपीएससी के विस्तृत सिलेबस और रणनीति की गहरी समझ नहीं थी। उन्होंने यूट्यूब पर टॉपर्स के वीडियो देखकर सोशियोलॉजी (Sociology) को अपना वैकल्पिक विषय चुना।
तैयारी के दौरान उनसे एक बड़ी रणनीतिक गलती हुई- वे मुख्य परीक्षा (Mains) और उत्तर लेखन (Answer Writing) में इतनी ज़्यादा व्यस्त हो गईं कि प्रीलिम्स (Prelims) के लिए पर्याप्त समय ही नहीं दे पाईं। इसका नतीजा यह हुआ कि वे अपने पहले प्रयास (UPSC CSE 2022) में प्रीलिम्स की बाधा भी पार नहीं कर सकीं।
जिस परीक्षा के लिए लाखों का पैकेज छोड़ा था, उसके पहले ही पड़ाव पर मिली इस हार ने उन्हें हिला दिया। लेकिन उन्होंने इस नाकामी को रोने में नहीं, बल्कि अपनी गलतियों को सुधारने में लगाया।
अपनी दूसरी कोशिश के लिए ऐश्वर्यम वापस लखनऊ आ गईं। घर में छोटी बहन की मौजूदगी के कारण पढ़ाई का एकाग्र माहौल बनाना मुश्किल हो रहा था।
उनकी मां ने घर से महज 5 मिनट की दूरी पर उनके लिए एक छोटा सा कमरा किराए पर ले दिया। इस फैसले ने उन्हें एक पूरी तरह से शांत और केंद्रित माहौल दिया।
ऐश्वर्यम ने अपनी पढ़ाई को ट्रैक करने के लिए लैपटॉप में एक स्प्रेडशीट (Excel Sheet) बनाई। वे रोज़ाना 8 से 10 घंटे की पढ़ाई का पाई-पाई हिसाब रखती थीं कि कितना पढ़ा गया और कितनी एफिशिएंसी आई।
जब भी वे टेस्ट सीरीज़ में अच्छे नंबर लाती थीं, तो उन मार्क्स को लाल पेन से एक कागज़ पर लिखकर अपनी कमरे की दीवार पर चिपका देती थीं। रात को सोने से पहले उन नंबरों को देखकर उनके भीतर आत्मविश्वास भर जाता था।
ऐश्वर्यम ने अपनी पूरी तैयारी में किसी भी पारंपरिक कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया। उन्होंने पूरी तरह से सेल्फ-स्टडी, प्रामाणिक किताबों, ऑनलाइन कंटेंट और मॉक टेस्ट्स के दम पर तैयारी की। वे केवल इंटरव्यू गाइडेंस के लिए मॉक इंटरव्यू देने पहली बार दिल्ली गई थीं।
परिणाम वाले दिन एक मज़ाकिया वाकया भी हुआ। ऐश्वर्यम अक्सर दोस्तों से मज़ाक में कहती थीं, मुझे बस कोई डबल डिजिट (Double Digit) रैंक मिल जाए, सिंगल डिजिट का प्रेशर मैं नहीं झेल पाउंगी।
जब परिणाम घोषित हुआ, तो किस्मत ने उनकी बात को बिल्कुल सच कर दिया, उन्हें UPSC CSE 2023 में ऑल इंडिया 10वीं रैंक (AIR 10) हासिल हुई। जिस परीक्षा में वे पहली बार प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाई थीं, उसी में देश की 10वीं टॉपर बनकर उन्होंने एक नया इतिहास रच दिया।
वर्तमान में हैं
2024 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस (IAS) अधिकारी ऐश्वर्यम प्रजापति की नवीनतम पोस्टिंग कार्यालय जिला निर्वाचन अधिकारी, खैरथल-तिजारा (राजस्थान) में विशेष अधिकारी / ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के पद पर हुई है। इससे पहले वे जिला अलवर के गोविंदगढ़ में उपखंड अधिकारी (SDM) तथा असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं।
1. बिना कोचिंग के भी टॉप-10 संभव है (Self-Study Power):
ऐश्वर्यम की सफलता यह साबित करती है कि महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि आपका अपना अनुशासन, किताबों से जुड़ाव और सही रणनीतिक सेल्फ-स्टडी ही आपको टॉपर बनाती है।
2. असफलता का बारीक विश्लेषण करें:
पहले प्रयास में प्रीलिम्स फेल होने के बाद ऐश्वर्यम ने भागने के बजाय अपनी गलती (प्रीलिम्स को कम समय देना) को पहचाना और दूसरे प्रयास में उसे पूरी तरह सुधार लिया।
3. पढ़ाई को क्वांटिटी नहीं, क्वालिटी और डेटा से मापें:
केवल किताबें खोलकर घंटों बैठने के बजाय लैपटॉप की स्प्रेडशीट से अपनी डेली प्रोग्रेस को ट्रैक करना स्मार्ट वर्क का बेहतरीन उदाहरण है।
4. ध्यान भटकाने वाले माहौल से दूरी बनाएं:
अगर घर या आसपास का माहौल पढ़ाई के अनुकूल न हो, तो मां की सलाह से एक छोटा सा शांत कमरा किराए पर लेकर पूरी एकाग्रता से पढ़ाई करना बड़ा बदलाव ला सकता है।
एक सरकारी स्कूल की कमियों को देखकर समाज बदलने का संकल्प लेने वाली ऐश्वर्यम प्रजापति आज देश की सबसे युवा और मेधावी आईएएस अधिकारियों की सूची में शुमार हैं।
बिना किसी कोचिंग की बैसाखी के, केवल अपने दृढ़ संकल्प, स्प्रेडशीट की ट्रैकिंग और अटूट मेहनत के दम पर ऑल इंडिया 10वीं रैंक लाने वाली ऐश्वर्यम की यह गाथा देश के करोड़ों युवाओं को यह विश्वास दिलाती है कि मंज़िलें महलों या लाखों की फीस की मोहताज नहीं होतीं, अगर आपके पास अपने सपनों को सच करने का सच्चा जज़्बा हो।
जब बचपन में अमूमन बच्चे खेल-खिलौनों में व्यस्त रहते हैं, तब कुछ विरले ऐसे भी होते हैं जो अपने जीवन का लक्ष्य बहुत कम उम्र में तय कर लेते हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली IAS ऐश्वर्यम प्रजापति (IAS Aishwaryam Prajapati) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
बचपन में देखा गया 'डीएम (DM)' बनने का एक मासूम सा सपना आगे चलकर उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मकसद बन गया। उन्होंने कॉरपोरेट जगत की एक शानदार नौकरी (L&T) ठुकराई। अपने पहले प्रयास में प्रीलिम्स तक न निकाल पाने के झटके को सहने के बाद, ऐश्वर्यम ने बिना किसी महंगी कोचिंग के अपने दूसरे ही प्रयास में ऑल इंडिया 10वीं रैंक हासिल की। आइए जानते हैं उनकी इस अनुशासित और ज़मीनी रणनीति की पूरी कहानी।
एक इंटरव्यू से मिली प्रेरणा और NIT से इंजीनियरिंग
12वीं बोर्ड में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), उत्तराखंड से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में अपनी बी.टेक (B.Tech) की डिग्री पूरी की।
वह टर्निंग पॉइंट: मलेथा गांव के स्कूल की हकीकत
जब वहां के शिक्षकों ने उनसे बातचीत की और उम्मीद जताई कि वे आगे चलकर इन समस्याओं को दूर करने में कोई मदद करेंगी, तो इस घटना ने ऐश्वर्यम के सोचने का नज़रिया पूरी तरह बदल दिया। उन्हें अहसास हुआ कि अगर नीतिगत और व्यापक स्तर पर समाज में बदलाव लाना है, तो प्रशासनिक पद (IAS) की ताकत बेहद ज़रूरी है। यहां से बचपन में देखा गया डीएम बनने का सपना पूरी मजबूती के साथ उनके दिल-ओ-दिमाग में दोबारा लौट आया।
L&T में नौकरी, पिता के सामने शर्त और इस्तीफा
ऐश्वर्यम ने नौकरी जॉइन तो की, लेकिन अपने पिता के सामने एक स्पष्ट शर्त रखी कि मैं केवल एक साल तक यह नौकरी करूंगी ताकि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकूं और कॉरपोरेट अनुभव ले सकूं। इसके ठीक एक साल बाद मैं नौकरी छोड़कर पूरी तरह से यूपीएससी की तैयारी में जुट जाउंगी।
पिता ने उनकी बात मान ली। विशाखापट्टनम में रहकर उन्होंने एक साल तक पूरी निष्ठा से काम किया। जैसे ही अगस्त में एक साल पूरा हुआ, उन्होंने L&T से अपना इस्तीफा दे दिया और वापस लौट आईं।
पहली कोशिश में प्रीलिम्स की असफलता
तैयारी के दौरान उनसे एक बड़ी रणनीतिक गलती हुई- वे मुख्य परीक्षा (Mains) और उत्तर लेखन (Answer Writing) में इतनी ज़्यादा व्यस्त हो गईं कि प्रीलिम्स (Prelims) के लिए पर्याप्त समय ही नहीं दे पाईं। इसका नतीजा यह हुआ कि वे अपने पहले प्रयास (UPSC CSE 2022) में प्रीलिम्स की बाधा भी पार नहीं कर सकीं।
जिस परीक्षा के लिए लाखों का पैकेज छोड़ा था, उसके पहले ही पड़ाव पर मिली इस हार ने उन्हें हिला दिया। लेकिन उन्होंने इस नाकामी को रोने में नहीं, बल्कि अपनी गलतियों को सुधारने में लगाया।
घर से 5 मिनट की दूरी पर कमरा और स्प्रेडशीट वाली पढ़ाई
उनकी मां ने घर से महज 5 मिनट की दूरी पर उनके लिए एक छोटा सा कमरा किराए पर ले दिया। इस फैसले ने उन्हें एक पूरी तरह से शांत और केंद्रित माहौल दिया।
ऐश्वर्यम ने अपनी पढ़ाई को ट्रैक करने के लिए लैपटॉप में एक स्प्रेडशीट (Excel Sheet) बनाई। वे रोज़ाना 8 से 10 घंटे की पढ़ाई का पाई-पाई हिसाब रखती थीं कि कितना पढ़ा गया और कितनी एफिशिएंसी आई।
जब भी वे टेस्ट सीरीज़ में अच्छे नंबर लाती थीं, तो उन मार्क्स को लाल पेन से एक कागज़ पर लिखकर अपनी कमरे की दीवार पर चिपका देती थीं। रात को सोने से पहले उन नंबरों को देखकर उनके भीतर आत्मविश्वास भर जाता था।
न कोई कोचिंग, सीधे AIR 10 का धमाका
परिणाम वाले दिन एक मज़ाकिया वाकया भी हुआ। ऐश्वर्यम अक्सर दोस्तों से मज़ाक में कहती थीं, मुझे बस कोई डबल डिजिट (Double Digit) रैंक मिल जाए, सिंगल डिजिट का प्रेशर मैं नहीं झेल पाउंगी।
जब परिणाम घोषित हुआ, तो किस्मत ने उनकी बात को बिल्कुल सच कर दिया, उन्हें UPSC CSE 2023 में ऑल इंडिया 10वीं रैंक (AIR 10) हासिल हुई। जिस परीक्षा में वे पहली बार प्रीलिम्स भी पास नहीं कर पाई थीं, उसी में देश की 10वीं टॉपर बनकर उन्होंने एक नया इतिहास रच दिया।
वर्तमान में हैं खैरथल-तिजारा में OSD
आईएएस ऐश्वर्यम प्रजापति के सफर से अभ्यर्थियों के लिए 4 सबसे बड़े सबक
ऐश्वर्यम की सफलता यह साबित करती है कि महंगी कोचिंग नहीं, बल्कि आपका अपना अनुशासन, किताबों से जुड़ाव और सही रणनीतिक सेल्फ-स्टडी ही आपको टॉपर बनाती है।
2. असफलता का बारीक विश्लेषण करें:
पहले प्रयास में प्रीलिम्स फेल होने के बाद ऐश्वर्यम ने भागने के बजाय अपनी गलती (प्रीलिम्स को कम समय देना) को पहचाना और दूसरे प्रयास में उसे पूरी तरह सुधार लिया।
3. पढ़ाई को क्वांटिटी नहीं, क्वालिटी और डेटा से मापें:
केवल किताबें खोलकर घंटों बैठने के बजाय लैपटॉप की स्प्रेडशीट से अपनी डेली प्रोग्रेस को ट्रैक करना स्मार्ट वर्क का बेहतरीन उदाहरण है।
4. ध्यान भटकाने वाले माहौल से दूरी बनाएं:
अगर घर या आसपास का माहौल पढ़ाई के अनुकूल न हो, तो मां की सलाह से एक छोटा सा शांत कमरा किराए पर लेकर पूरी एकाग्रता से पढ़ाई करना बड़ा बदलाव ला सकता है।
एक सरकारी स्कूल की कमियों को देखकर समाज बदलने का संकल्प लेने वाली ऐश्वर्यम प्रजापति आज देश की सबसे युवा और मेधावी आईएएस अधिकारियों की सूची में शुमार हैं।
बिना किसी कोचिंग की बैसाखी के, केवल अपने दृढ़ संकल्प, स्प्रेडशीट की ट्रैकिंग और अटूट मेहनत के दम पर ऑल इंडिया 10वीं रैंक लाने वाली ऐश्वर्यम की यह गाथा देश के करोड़ों युवाओं को यह विश्वास दिलाती है कि मंज़िलें महलों या लाखों की फीस की मोहताज नहीं होतीं, अगर आपके पास अपने सपनों को सच करने का सच्चा जज़्बा हो।
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