UPSC की शून्य जानकारी से AIR 4 पाने की IAS अतुल प्रकाश की प्रेरक कहानी
Jageshwar prasad | May 17, 2026, 18:07 IST
Photograph: (the sootr)
आत्म-विश्लेषण और सटीक रणनीति से IAS अतुल प्रकाश ने बिहार के बक्सर से निकलकर IIT दिल्ली और UPSC में ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल की। वर्तमान में खैरथल-तिजारा के जिला कलेक्टर हैं।
सफलता सिर्फ एक बार की कोशिश से नहीं, बल्कि अपनी गलतियों को सुधारकर लगातार आगे बढ़ने से मिलती है। 2017 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी अतुल प्रकाश का जीवन भी हमें यही सिखाता है। बिहार के एक छोटे से जिले बक्सर से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल करने तक का अतुल का सफर दृढ़ संकल्प, आत्म-विश्लेषण और निरंतरता की एक अनूठी मिसाल है। एक बार असफलता या कम रैंक मिलने पर जहां कई लोग निराश हो जाते हैं, वहीं अतुल ने अपनी कमियों को अपनी ताकत बनाया और देश के टॉपर्स की सूची में अपना नाम दर्ज कराया।
वर्तमान में खैरथल-तिजारा (Rajasthan) के जिला कलेक्टर के रूप में अपनी कमान संभाल रहे अतुल प्रकाश की यह कहानी देश के हर उस युवा के लिए एक रोडमैप है जो अपनी मेहनत के दम पर इतिहास रचने की इच्छा रखते हैं।
अतुल प्रकाश का जन्म बिहार के बक्सर में हुआ था। उनके पिता की नौकरी ऐसी थी जिसमें आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में ट्रांसफर होता रहता था। इस कारण अतुल को बचपन में किसी एक शहर या स्कूल में टिककर पढ़ने का मौका नहीं मिला; उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों और स्कूलों से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की।
आम तौर पर बच्चे बार-बार स्कूल बदले जाने से परेशान हो जाते हैं, लेकिन अतुल का नजरिया अलग था। वे इसे अपनी समस्या नहीं बल्कि अपनी पर्सनेलिटी की ग्रोथ का एक शानदार जरिया मानते हैं। अलग-अलग संस्कृतियों और लोगों के बीच रहने से उनका दृष्टिकोण व्यापक और व्यावहारिक बना। अतुल पढ़ाई में हमेशा से ही बेहद गंभीर और होनहार थे। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी दसवीं की परीक्षा में 94 प्रतिशत और बारहवीं की परीक्षा में 87 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
IIT दिल्ली का सफर और
बारहवीं के बाद अतुल ने देश के सबसे कठिन इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम को पास किया और IIT दिल्ली में दाखिला लिया। आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएशन के दौरान ही उनके जीवन में एक नया मोड़ आया।
अतुल बताते हैं कि बचपन से उनका कोई ऐसा तय सपना नहीं था कि उन्हें सिविल सर्विसेज में ही जाना है। लेकिन जब वे आईआईटी में पढ़ रहे थे, तब वहां के माहौल और अपने सीनियर्स को देखकर उन्हें यूपीएससी और देश की प्रशासनिक सेवाओं के बारे में गहराई से पता चला। उन्हें समझ आया कि यह एक ऐसा मंच है जहां तकनीक, ज्ञान और नीतियों का उपयोग करके जमीनी स्तर पर लाखों लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है। बस यहीं से उन्होंने इस राह पर चलने का मन बना लिया।
चूंकि अतुल के परिवार में पहले से कोई प्रशासनिक सेवा में नहीं था और न ही उन्हें इस परीक्षा के पैटर्न की कोई गहरी समझ थी, इसलिए उन्होंने मैदान में उतरने से पहले पूरी रिसर्च करने का फैसला किया।
तैयारी से पहले की रिसर्च: अतुल ने सीधे किताबों में डूबने के बजाय पहले यह समझा कि आखिर यह परीक्षा है क्या। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट का भरपूर सहारा लिया, टॉपर्स के ब्लॉग पढ़े, उनके इंटरव्यू सुने और यूपीएससी के लिए समर्पित वेबसाइट्स को खंगाला।
चुनौतियों को समझा: उन्होंने न केवल सिलेबस को समझा, बल्कि यह भी जानने की कोशिश की कि एक आईएएस अधिकारी बनने के बाद किस तरह का काम करना होता है, फील्ड में कैसी चुनौतियां आती हैं और क्या वे वास्तव में इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए तैयार हैं। जब उन्हें पूरा भरोसा हो गया, तभी वे पूरी तरह से इस परीक्षा की तैयारी में कूदे।
तैयारी की शुरुआत में अन्य अभ्यर्थियों की तरह अतुल ने भी दिल्ली में एक नामी कोचिंग इंस्टीट्यूट ज्वॉइन किया था। लेकिन केवल दो महीने के भीतर ही उन्हें यह अहसास हो गया कि कोई भी कोचिंग आपको सिर्फ गाइड कर सकती है, परीक्षा पास कराने के लिए सेल्फ स्टडी ही एकमात्र रास्ता है।
उन्होंने कोचिंग छोड़ दी और खुद के बनाए नोट्स और टाइम-टेबल पर भरोसा किया। अतुल का मानना है कि इस परीक्षा में सफल होने के लिए सबसे जरूरी चीज कंसिसटेंसी है। वे कहते हैं, यह रवैया इस परीक्षा में बिल्कुल काम नहीं आता कि आप किसी दिन तो 10-12 घंटे पढ़ लें और फिर अगले तीन-चार दिन किताब ही न उठाएं। भले ही आप कम घंटे पढ़ें, लेकिन हर दिन नियमित रूप से पढ़ना ही आपको सफलता दिला सकता है।
अतुल प्रकाश ने अपना पहला प्रयास साल 2016 में किया था। अपनी मेहनत के दम पर वे पहले ही प्रयास में सफल भी रहे, लेकिन उनकी रैंक उम्मीद के मुताबिक अच्छी नहीं आई, जिसके कारण उन्हें इंडियन रेलवे सर्विस एलॉट हुई। अतुल इस रैंक से संतुष्ट नहीं थे क्योंकि उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का हिस्सा बनना था।
उन्होंने बिना समय गंवाए अपनी कमियों का आत्म-विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि पहले प्रयास में उन्होंने आंसर राइटिंग की उतनी प्रैक्टिस नहीं की थी जितनी जरूरी होती है। साल 2017 के अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने अपनी इस गलती को पूरी तरह से सुधारा और कुछ खास रणनीतियां अपनाईं:
बहुआयामी दृष्टिकोण: अतुल के अनुसार, मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखते समय किसी एक ही बिंदु की गहराई में जाने के बजाय प्रश्न के अलग-अलग पहलुओं (जैसे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, तकनीकी) को छूने का प्रयास करना चाहिए।
अंकों के अनुसार पॉइंट्स: उन्होंने एक बेहद व्यावहारिक नियम बनाया - अगर प्रश्न 10 नंबर का है, तो उत्तर में कम से कम 10 अलग-अलग पॉइंट्स होने चाहिए। वहीं अगर प्रश्न 15 नंबर का है, तो कम से कम 15 बिंदुओं पर बात की जानी चाहिए।
फैक्ट्स और डायग्राम्स: सामान्य अध्ययन (GS) के पेपर्स में अच्छे अंक पाने के लिए उन्होंने अपने उत्तरों में प्रामाणिक फैक्ट्स, डेटा और डायग्राम्स का जमकर इस्तेमाल किया, जिससे एग्जामिनर पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा।
टेस्ट सीरीज की भूमिका: अतुल ने प्रीलिम्स और मेन्स दोनों के लिए टेस्ट सीरीज को पूरी ईमानदारी से सॉल्व किया। उनका मानना है कि आप चाहे जितना पढ़ लें, जब तक आप परीक्षा के माहौल में प्रश्नों को हल करने का अभ्यास नहीं करते, तब तक अच्छे अंक लाना मुश्किल है।
उनकी इस बदली हुई और सटीक रणनीति का नतीजा यह रहा कि साल 2017 के रिजल्ट में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल कर पूरे देश में टॉप किया।
2018 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में अतुल प्रकाश ने राजस्थान कैडर में शामिल होकर अपनी प्रशासनिक पारी की शुरुआत की। वे जहां भी रहे, उन्होंने अपनी कार्यशैली से जनता और सरकार दोनों का दिल जीता।
उन्होंने कोटा में सहायक कलेक्टर एवं कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में काम करते हुए फील्ड की बारीकियों को समझा। इसके बाद उन्होंने राजस्थान के ऊर्जा विभाग में संयुक्त सचिव जैसी महत्वपूर्ण नीतिगत जिम्मेदारी निभाई।
इसके बाद उन्हें भिवाड़ी इंटीग्रेटेड विकास प्राधिकरण (BIDA) में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया। भिवाड़ी जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, सड़कों की स्थिति सुधारना और उद्योगों के अनुकूल माहौल तैयार करने में अतुल ने उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।
उनकी प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें नवगठित जिले खैरथल-तिजारा का जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया। यह उनकी पहली जिला स्तरीय कमान है। यहां वे पेयजल संकट को दूर करने, शिक्षा के स्तर को सुधारने, सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने और आमजन की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाकर काम कर रहे हैं।
IAS अतुल प्रकाश का व्यक्तिगत जीवन भी इंटीग्रिटी और नियमों के प्रति सम्मान की एक खूबसूरत बानगी पेश करता है। उन्होंने श्रीमती शिवानी से विवाह किया है, जो साल 2022 बैच की एक आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं। आईपीएस शिवानी मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली हैं।
शुरुआती चयन के बाद उन्हें AGMUT कैडर (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) आवंटित हुआ था। हालांकि, अतुल प्रकाश से विवाह के बाद, भारत सरकार के नियमों के तहत सितंबर 2023 में उनका कैडर ट्रांसफर राजस्थान कर दिया गया।
![तबीयत ठीक न होने पर भी नहीं मानी हार, पाया UPSC सिविल सेवा परीक्षा में चौथा स्थान | Atul Prakash from Bihar secured 4th rank in UPSC civils despite health issues]()
अतुल प्रकाश के इस शानदार सफर से सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए कुछ बेहद महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं:
शॉर्टकट से दूर रहें: अतुल का मानना है कि कड़ी मेहनत, निरंतरता और दृढ़ संकल्प का कोई विकल्प या शॉर्टकट नहीं है। आपको हर दिन तपना ही होगा।
गलतियों को स्वीकारें और सुधारें: पहले प्रयास में रैंक कम आने पर निराश होने के बजाय अपनी आंसर राइटिंग की कमी को पहचानना और उस पर काम करना ही असली विजेता की पहचान है।
पूरी जानकारी के बाद कदम बढ़ाएं: किसी के कहने पर यूपीएससी की तैयारी शुरू न करें। पहले परीक्षा के स्वरूप, उसकी मांग और सर्विस की चुनौतियों को अच्छी तरह समझ लें।
गुणवत्ता बनाम समय: किताबों के ढेर लगाने या केवल घंटों को गिनने से बेहतर है कि आप जो भी पढ़ें, पूरी तन्मयता से पढ़ें।
बिहार के बक्सर के एक साधारण स्कूल से शुरू होकर आईआईटी दिल्ली और फिर देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद तक पहुंचे आईएएस अतुल प्रकाश की कहानी यह साबित करती है कि आपकी पृष्ठभूमि, आपके बार-बार बदलते स्कूल या शुरुआती असफलताओं से आपका भविष्य तय नहीं होता। यदि आपके पास अपनी कमियों को देखने की खुली आंखें हैं, उन्हें सुधारने का हौसला है और रोज मेहनत करने का जज्बा है, तो आप भी शीर्ष पर पहुंचकर देश की सेवा का अपना सपना सच कर सकते हैं।
35 लाख का पैकेज छोड़ा, फिर चुनी सिविल सेवा की राह, आईएएस अक्षय गोदारा की प्रेरणादायक कहानी
चाय की दुकान से कलेक्ट्रेट तक का सफर, यह है आईएएस देशल दान की दिलचस्प कहानी
असफलताओं से मिला कामयाबी का सूत्र, फिर बन गए टॉपर, आईएएस जसमीत सिंह संधू की प्रेरक कहानी
समाज बदलने की सोच ने बनाया आईएएस, डॉ. मंजू का प्रशासनिक सेवा में आने का प्रेरणादायी सफर
वर्तमान में खैरथल-तिजारा (Rajasthan) के जिला कलेक्टर के रूप में अपनी कमान संभाल रहे अतुल प्रकाश की यह कहानी देश के हर उस युवा के लिए एक रोडमैप है जो अपनी मेहनत के दम पर इतिहास रचने की इच्छा रखते हैं।
विविधताओं के बीच निखरा व्यक्तित्व
आम तौर पर बच्चे बार-बार स्कूल बदले जाने से परेशान हो जाते हैं, लेकिन अतुल का नजरिया अलग था। वे इसे अपनी समस्या नहीं बल्कि अपनी पर्सनेलिटी की ग्रोथ का एक शानदार जरिया मानते हैं। अलग-अलग संस्कृतियों और लोगों के बीच रहने से उनका दृष्टिकोण व्यापक और व्यावहारिक बना। अतुल पढ़ाई में हमेशा से ही बेहद गंभीर और होनहार थे। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी दसवीं की परीक्षा में 94 प्रतिशत और बारहवीं की परीक्षा में 87 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
IIT दिल्ली का सफर और UPSC का विचार
अतुल बताते हैं कि बचपन से उनका कोई ऐसा तय सपना नहीं था कि उन्हें सिविल सर्विसेज में ही जाना है। लेकिन जब वे आईआईटी में पढ़ रहे थे, तब वहां के माहौल और अपने सीनियर्स को देखकर उन्हें यूपीएससी और देश की प्रशासनिक सेवाओं के बारे में गहराई से पता चला। उन्हें समझ आया कि यह एक ऐसा मंच है जहां तकनीक, ज्ञान और नीतियों का उपयोग करके जमीनी स्तर पर लाखों लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाया जा सकता है। बस यहीं से उन्होंने इस राह पर चलने का मन बना लिया।
शून्य से शुरुआत
तैयारी से पहले की रिसर्च: अतुल ने सीधे किताबों में डूबने के बजाय पहले यह समझा कि आखिर यह परीक्षा है क्या। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट का भरपूर सहारा लिया, टॉपर्स के ब्लॉग पढ़े, उनके इंटरव्यू सुने और यूपीएससी के लिए समर्पित वेबसाइट्स को खंगाला।
चुनौतियों को समझा: उन्होंने न केवल सिलेबस को समझा, बल्कि यह भी जानने की कोशिश की कि एक आईएएस अधिकारी बनने के बाद किस तरह का काम करना होता है, फील्ड में कैसी चुनौतियां आती हैं और क्या वे वास्तव में इस जिम्मेदारी को संभालने के लिए तैयार हैं। जब उन्हें पूरा भरोसा हो गया, तभी वे पूरी तरह से इस परीक्षा की तैयारी में कूदे।
कोचिंग का मोहभंग और सेल्फ स्टडी की ताकत
उन्होंने कोचिंग छोड़ दी और खुद के बनाए नोट्स और टाइम-टेबल पर भरोसा किया। अतुल का मानना है कि इस परीक्षा में सफल होने के लिए सबसे जरूरी चीज कंसिसटेंसी है। वे कहते हैं, यह रवैया इस परीक्षा में बिल्कुल काम नहीं आता कि आप किसी दिन तो 10-12 घंटे पढ़ लें और फिर अगले तीन-चार दिन किताब ही न उठाएं। भले ही आप कम घंटे पढ़ें, लेकिन हर दिन नियमित रूप से पढ़ना ही आपको सफलता दिला सकता है।
पहले प्रयास की कमी और दूसरे प्रयास में सुधार
उन्होंने बिना समय गंवाए अपनी कमियों का आत्म-विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि पहले प्रयास में उन्होंने आंसर राइटिंग की उतनी प्रैक्टिस नहीं की थी जितनी जरूरी होती है। साल 2017 के अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने अपनी इस गलती को पूरी तरह से सुधारा और कुछ खास रणनीतियां अपनाईं:
बहुआयामी दृष्टिकोण: अतुल के अनुसार, मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखते समय किसी एक ही बिंदु की गहराई में जाने के बजाय प्रश्न के अलग-अलग पहलुओं (जैसे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, तकनीकी) को छूने का प्रयास करना चाहिए।
अंकों के अनुसार पॉइंट्स: उन्होंने एक बेहद व्यावहारिक नियम बनाया - अगर प्रश्न 10 नंबर का है, तो उत्तर में कम से कम 10 अलग-अलग पॉइंट्स होने चाहिए। वहीं अगर प्रश्न 15 नंबर का है, तो कम से कम 15 बिंदुओं पर बात की जानी चाहिए।
फैक्ट्स और डायग्राम्स: सामान्य अध्ययन (GS) के पेपर्स में अच्छे अंक पाने के लिए उन्होंने अपने उत्तरों में प्रामाणिक फैक्ट्स, डेटा और डायग्राम्स का जमकर इस्तेमाल किया, जिससे एग्जामिनर पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा।
टेस्ट सीरीज की भूमिका: अतुल ने प्रीलिम्स और मेन्स दोनों के लिए टेस्ट सीरीज को पूरी ईमानदारी से सॉल्व किया। उनका मानना है कि आप चाहे जितना पढ़ लें, जब तक आप परीक्षा के माहौल में प्रश्नों को हल करने का अभ्यास नहीं करते, तब तक अच्छे अंक लाना मुश्किल है।
उनकी इस बदली हुई और सटीक रणनीति का नतीजा यह रहा कि साल 2017 के रिजल्ट में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 4 हासिल कर पूरे देश में टॉप किया।
विकास और नवाचार की नई पहचान
उन्होंने कोटा में सहायक कलेक्टर एवं कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में काम करते हुए फील्ड की बारीकियों को समझा। इसके बाद उन्होंने राजस्थान के ऊर्जा विभाग में संयुक्त सचिव जैसी महत्वपूर्ण नीतिगत जिम्मेदारी निभाई।
इसके बाद उन्हें भिवाड़ी इंटीग्रेटेड विकास प्राधिकरण (BIDA) में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया। भिवाड़ी जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, सड़कों की स्थिति सुधारना और उद्योगों के अनुकूल माहौल तैयार करने में अतुल ने उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया।
उनकी प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए राज्य सरकार ने उन्हें नवगठित जिले खैरथल-तिजारा का जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया। यह उनकी पहली जिला स्तरीय कमान है। यहां वे पेयजल संकट को दूर करने, शिक्षा के स्तर को सुधारने, सुदृढ़ स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने और आमजन की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाकर काम कर रहे हैं।
व्यक्तिगत जीवन
शुरुआती चयन के बाद उन्हें AGMUT कैडर (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) आवंटित हुआ था। हालांकि, अतुल प्रकाश से विवाह के बाद, भारत सरकार के नियमों के तहत सितंबर 2023 में उनका कैडर ट्रांसफर राजस्थान कर दिया गया।
तबीयत ठीक न होने पर भी नहीं मानी हार, पाया UPSC सिविल सेवा परीक्षा में चौथा स्थान | Atul Prakash from Bihar secured 4th rank in UPSC civils despite health issues
अभ्यर्थियों के लिए अतुल प्रकाश के सफलता सूत्र
शॉर्टकट से दूर रहें: अतुल का मानना है कि कड़ी मेहनत, निरंतरता और दृढ़ संकल्प का कोई विकल्प या शॉर्टकट नहीं है। आपको हर दिन तपना ही होगा।
गलतियों को स्वीकारें और सुधारें: पहले प्रयास में रैंक कम आने पर निराश होने के बजाय अपनी आंसर राइटिंग की कमी को पहचानना और उस पर काम करना ही असली विजेता की पहचान है।
पूरी जानकारी के बाद कदम बढ़ाएं: किसी के कहने पर यूपीएससी की तैयारी शुरू न करें। पहले परीक्षा के स्वरूप, उसकी मांग और सर्विस की चुनौतियों को अच्छी तरह समझ लें।
गुणवत्ता बनाम समय: किताबों के ढेर लगाने या केवल घंटों को गिनने से बेहतर है कि आप जो भी पढ़ें, पूरी तन्मयता से पढ़ें।
बिहार के बक्सर के एक साधारण स्कूल से शुरू होकर आईआईटी दिल्ली और फिर देश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद तक पहुंचे आईएएस अतुल प्रकाश की कहानी यह साबित करती है कि आपकी पृष्ठभूमि, आपके बार-बार बदलते स्कूल या शुरुआती असफलताओं से आपका भविष्य तय नहीं होता। यदि आपके पास अपनी कमियों को देखने की खुली आंखें हैं, उन्हें सुधारने का हौसला है और रोज मेहनत करने का जज्बा है, तो आप भी शीर्ष पर पहुंचकर देश की सेवा का अपना सपना सच कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें:-
चाय की दुकान से कलेक्ट्रेट तक का सफर, यह है आईएएस देशल दान की दिलचस्प कहानी
असफलताओं से मिला कामयाबी का सूत्र, फिर बन गए टॉपर, आईएएस जसमीत सिंह संधू की प्रेरक कहानी
समाज बदलने की सोच ने बनाया आईएएस, डॉ. मंजू का प्रशासनिक सेवा में आने का प्रेरणादायी सफर
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari