11 मई का इतिहास: 17 बार टूटा, हर बार और भव्य बना, जानिए सोमनाथ मंदिर का इतिहास

Kaushiki | May 11, 2026, 08:00 IST
somnath temple
11 मई 1951 को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन किया था। यह मंदिर 17 बार टूटने के बाद भी आज भारत की अटूट आस्था का केंद्र है। जानिए सरदार पटेल के संकल्प और मंदिर के गौरवशाली इतिहास की पूरी कहानी।

Somnath Temple History: बात लगभग एक हजार साल पुरानी है, जब सोमनाथ के मंदिर का वैभव देखकर विदेशी लुटेरों की आंखें फटी रह गई थीं। जितनी बार इस मंदिर को लूटा गया, उतनी ही बार भारतीयों की अटूट आस्था ने इसे राख से फिर खड़ा कर दिया। लेकिन असली पुनर्जन्म की कहानी शुरू हुई 11 मई 1951 को, जब समंदर की लहरों के बीच मंत्रोच्चार गूंज रहे थे।



इसी दिन सोमनाथ के नए मंदिर में भगवान शिव की प्राण-प्रतिष्ठा हुई थी। भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने खुद यह शुभ कार्य किया था। ये केवल मंदिर का उद्घाटन नहीं, बल्कि गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर मुस्कुराते हुए भारत के स्वाभिमान की एक नई सुबह थी। आइए सोमनाथ मंदिर के पुनर्जन्म की अमर कहानी को डिटेल से जानें...



सोमनाथ मंदिर: 17 बार लूटा गया फिर भी बरकरार रही भव्यता, जानिए क्या है सरदार पटेल का कनेक्शन | Somna


सोमनाथ मंदिर का रहस्य

सोमनाथ महादेव को दुनिया का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह पावन मंदिर गुजरात के वेरावल तट पर स्थित है। पौराणिक कथा के मुताबिक, इसका इतिहास बहुत अद्भुत है।



पौराणिक कथा के मुताबिक, राजा दक्ष ने चंद्रमा को क्षय रोग (Tuberculosis) का श्राप दिया था। तब चंद्रमा ने इसी स्थान पर घोर तपस्या की थी। भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें श्राप से मुक्त किया। तभी से महादेव यहां सोमनाथ के रूप में विराजमान हैं।



मान्यता है कि यहां श्रीकृष्ण ने अपनी देह त्यागी थी। ये मंदिर चार युगों में अलग-अलग धातुओं से बना। सतयुग में इसे सोने से निर्मित किया गया था। त्रेतायुग में रावण ने इसे चांदी से बनवाया था। द्वापरयुग में भगवान कृष्ण ने इसे लकड़ी से बनाया।



कलयुग में राजा भीमदेव ने इसे पत्थर से बनवाया। इस मंदिर का शिखर 155 फीट ऊंचा बना है। शिखर के ऊपर लगा कलश 10 टन भारी है। यहां की नक्काशी और भव्यता देखते ही बनती है। यह स्थान आस्था और इतिहास का संगम है।



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बाण स्तंभ का रहस्य

मंदिर के दक्षिण में समुद्र किनारे एक स्तंभ बना है, जिसे बाण स्तंभ कहते हैं। इस पर एक तीर बना है जो समुद्र की ओर इशारा करता है। इस पर लिखे शिलालेख के मुताबिक, यहां से लेकर दक्षिण ध्रुव (Antarctica) तक समुद्र के बीच में कोई भी रुकावट या जमीन का टुकड़ा नहीं है। हैरानी की बात ये है कि हजारों साल पहले बिना सैटेलाइट के प्राचीन भारतीयों को यह कैसे पता चला कि उस सीधी रेखा में कोई द्वीप या पहाड़ नहीं आता? आज का गूगल मैप भी इस बात को एकदम सही बताता है।



हवा में तैरता शिवलिंग सोमनाथ काज़विनी (फ़ारसी भूगोलवेत्ता) – रमानिसब्लॉग


हवा में तैरता शिवलिंग

प्राचीन इतिहास और अरब यात्रियों (जैसे अल-बिरूनी) के वृत्तांतों के मुताबिक, सोमनाथ का असली शिवलिंग मंदिर के गर्भगृह में हवा में बिना किसी सहारे के तैरता था। वैज्ञानिक तर्क ये है कि ऐसा माना जाता है कि मंदिर की छत और फर्श में बहुत शक्तिशाली चुंबकीय पत्थर लगे थे। शिवलिंग के भीतर भी चुंबक था, जिससे वह मैग्नेटिक लेविटेशन के कारण बीच में स्थिर रहता था। महमूद गजनवी ने जब मंदिर तोड़ा, तो वह इस रहस्य को देखकर दंग रह गया था।



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सोमनाथ मंदिर को किसने और कितनी बार तोड़ा

सोमनाथ मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना और संघर्षों से भरा हुआ है। माना जाता है कि यहां पहला मंदिर खुद चंद्रदेव ने बनवाया था। लेकिन इस मंदिर की अपार संपत्ति विदेशी हमलावरों की आंखों में खटकती थी।



अरब और तुर्क लुटेरों ने इस पर कई बार हमला किया था। उन्होंने न केवल संपत्ति लूटी बल्कि मंदिर को भी भारी नुकसान पहुंचाया। इतिहास की किताबों के मुताबिक इसे करीब 17 बार लूटा और तोड़ा गया।



सबसे चर्चित हमला 1024 में महमूद गजनवी ने किया था। उसने मंदिर की पवित्रता को नष्ट किया और सारा सोना लूट लिया। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी और औरंगजेब ने भी मंदिर पर हमले किए। लेकिन हर बार भारतीयों ने अपनी श्रद्धा से इसे फिर खड़ा किया।



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सरदार वल्लभभाई पटेल का वो ऐतिहासिक संकल्प

आजादी के तुरंत बाद भारत के लौह पुरुष सरदार पटेल जूनागढ़ पहुंचे। साल 1947 (13 नवंबर) को उन्होंने सोमनाथ के खंडहरों को देखकर एक कसम खाई। उन्होंने समंदर का जल हाथ में लेकर मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया।



वे चाहते थे कि भारत का यह प्राचीन गौरव फिर से दुनिया देखे। महात्मा गांधी ने भी इस नेक काम के लिए अपना पूरा समर्थन दिया। गांधी जी ने सलाह दी कि मंदिर सरकारी पैसे से नहीं बनना चाहिए।



उन्होंने कहा कि इसके लिए जनता से चंदा इकट्ठा करना बेहतर होगा। लोगों ने दिल खोलकर दान दिया और मंदिर का काम शुरू हुआ। दुर्भाग्य से मंदिर पूरा होने से पहले ही सरदार पटेल का निधन हो गया। लेकिन कन्हैयालाल मुंशी ने इस सपने को आगे बढ़ाने का काम किया।



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जब राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने निभाया अपना वादा

मंदिर बनकर तैयार हुआ तो उद्घाटन के लिए डॉ. राजेंद्र प्रसाद को बुलाया गया। उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस फैसले के थोड़ा खिलाफ थे।



जवाहरलाल नेहरू का मानना था कि सरकारी पदों पर बैठे लोगों को धार्मिक आयोजनों से बचना चाहिए। लेकिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि वे एक सच्चे भारतीय के रूप में वहां जाएंगे।



राजेंद्र प्रसाद ने साफ किया कि भारत सभी धर्मों का सम्मान करने वाला देश है। तो 11 मई 1951 को सोमनाथ के तट पर भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ज्योतिर्लिंग की स्थापना की और मंदिर को राष्ट्र को समर्पित किया।



राजेंद्र प्रसाद ने अपने भाषण में कहा कि सोमनाथ का निर्माण विश्वास की विजय है। विनाश करने वाली ताकतें कभी भी सृजन करने वाली शक्तियों से बड़ी नहीं होतीं। यह संदेश आज भी हर भारतीय के दिल में गर्व भर देता है।



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आज कैसा दिखता है सोमनाथ मंदिर

आज का सोमनाथ मंदिर अपनी चालुक्य शैली की वास्तुकला के लिए मशहूर है। यह मंदिर समंदर के किनारे खड़ा है और बेहद भव्य दिखाई देता है। मंदिर के दक्षिण में एक स्तंभ है जिसे बाण स्तंभ (एरो कॉलम) कहा जाता है।



इस स्तंभ पर लिखा है कि यहां से अंटार्कटिका तक कोई रुकावट नहीं है। ये प्राचीन भारतीय भूगोल और विज्ञान के ज्ञान का एक बड़ा सबूत है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां बाबा सोमनाथ के दर्शन करने आते हैं।



शाम के समय यहां होने वाला लाइट एंड साउंड शो इतिहास को जीवंत कर देता है। आप ट्रेन से वेरावल स्टेशन (7 किमी दूर) पहुंच सकते हैं। नजदीकी एयरपोर्ट राजकोट या दीव है।



सड़क मार्ग से भी यह गुजरात के बड़े शहरों से अच्छे से जुड़ा है। सोमनाथ ट्रस्ट अब इस मंदिर की देखभाल बहुत ही आधुनिक तरीके से करता है।



सोमनाथ ज्योतिर्लिंग हमें सिखाता है कि सत्य और आस्था को कभी मिटाया नहीं जा सकता। विदेशी हमलावर आए और चले गए लेकिन सोमनाथ आज भी अडिग खड़ा है।



Reference Links:

11 मई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 11 मई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।



आइए जानते हैं 11 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-



विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 330: कांस्टेंटिनोपल (नोवा रोमा) को रोमन साम्राज्य की नई राजधानी के रूप में समर्पित किया गया।
  • 868: चीन में 'डायमंड सूत्र' की प्रति छापी गई, जो दुनिया की सबसे पुरानी दिनांकित मुद्रित पुस्तक है।
  • 1745: ऑस्ट्रियाई उत्तराधिकार युद्ध के दौरान फोंटेनॉय की लड़ाई में फ्रांसीसी सेना ने जीत हासिल की।
  • 1749: ब्रिटिश संसद ने रॉयल नेवी के पुनर्गठन के लिए समेकन अधिनियम स्वीकार किया।
  • 1751: डॉ. थॉमस बॉन्ड और बेंजामिन फ्रैंकलिन ने पेंसिल्वेनिया अस्पताल की स्थापना की।
  • 1752: अमेरिका के फिलाडेल्फिया में पहली अग्नि बीमा (Fire Insurance) पॉलिसी शुरू हुई।
  • 1772: एम्स्टर्डम थिएटर में भीषण आग लगने से 18 लोगों की मौत हो गई।
  • 1784: मैसूर के शासक टीपू सुल्तान और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक शांति संधि पर हस्ताक्षर हुए।
  • 1792: कैप्टन रॉबर्ट ग्रे कोलंबिया नदी में प्रवेश करने वाले पहले यूरोपीय नाविक बने।
  • 1812: स्पेंसर पेर्सवल की हत्या हुई, वे पद पर रहते हुए मारे जाने वाले एकमात्र ब्रिटिश प्रधानमंत्री थे।
  • 1813: यूरोपीय खोजकर्ताओं ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया के ब्लू माउंटेन को पार करने में सफलता पाई।
  • 1818: लंदन में प्रसिद्ध 'ओल्ड विक' थिएटर की स्थापना रॉयल कोबर्ग हॉल के रूप में हुई।
  • 1820: चार्ल्स डार्विन की ऐतिहासिक यात्रा वाला जहाज 'एचएमएस बीगल' पहली बार लॉन्च किया गया।
  • 1833: अटलांटिक सागर में जहाज 'लेडी-ऑफ-द-लेक' के हिमखंड से टकराने से 215 यात्रियों की मौत हुई।
  • 1846: अमेरिका का डोनर पार्टी समूह कैलिफ़ोर्निया जाते समय सिएरा नेवादास की बर्फ में फंस गया।
  • 1858: मिनेसोटा को अमेरिका के 32वें राज्य के रूप में मान्यता मिली।
  • 1880: कैलिफ़ोर्निया में जमीन विवाद को लेकर रेलमार्ग और स्थानीय लोगों में गोलीबारी में सात मरे।
  • 1894: शिकागो में वेतन कटौती के विरोध में 4,000 पुलमैन कार वर्करों ने ऐतिहासिक हड़ताल शुरू की।
  • 1910: अमेरिकी राज्य मोंटाना में 'ग्लेशियर नेशनल पार्क' को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
  • 1918: उत्तरी काकेशस के पर्वतीय गणराज्य (MRNC) की आधिकारिक स्थापना हुई।
  • 1927: 'ऑस्कर' देने वाली संस्था मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड साइंसेज अकादमी का गठन हुआ।
  • 1928: अमेरिकी गोल्फर वाल्टर हेगेन ने इंग्लैंड में ओपन चैम्पियनशिप का खिताब जीता।
  • 1946: मलेशिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी 'यूनाइटेड मलेशियाई नेशनल ऑर्गनाइजेशन' (UMNO) बनी।
  • 1949: इजरायल को संयुक्त राष्ट्र (UN) के 59वें सदस्य के रूप में आधिकारिक मान्यता मिली।
  • 1960: दुनिया की पहली गर्भनिरोधक गोली (Contraceptive Pill) बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध हुई।
  • 1965: बांग्लादेश में आए भीषण चक्रवाती तूफान ने 17 हजार लोगों की जान ले ली।
  • 1967: एंड्रियास पापैंड्रेउस को यूनानी सैन्य जंता द्वारा कैद किया गया, जो बाद में ग्रीस के पीएम बने।
  • 1985: इंग्लैंड के वैली परेड स्टेडियम में फुटबॉल मैच के दौरान आग लगने से 56 लोगों की मौत हुई।
  • 1996: माउंट एवरेस्ट पर आए बर्फीले तूफान में 8 पर्वतारोहियों की मौत, इतिहास का सबसे घातक दिन बना।
  • 1997: आईबीएम के सुपरकंप्यूटर 'डीप ब्लू' ने शतरंज चैंपियन गैरी कास्परोव को हराकर इतिहास रचा।
  • 1998: यूरोपीय एकल मुद्रा 'यूरो' का पहला सिक्का आधिकारिक तौर पर तैयार किया गया।
  • 2002: बांग्लादेश में एक बड़ी नौका दुर्घटना में करीब 378 लोगों की डूबने से मौत हुई।
  • 2003: लिथुआनिया के लोगों ने जनमत संग्रह के जरिए यूरोपीय संघ में शामिल होने को मंजूरी दी।
  • 2008: कॉर्नेल विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला जेनेटिकली मॉडिफाइड मानव भ्रूण बनाया।
  • 2010: डेविड कैमरन ने ब्रिटेन में पहली बार गठबंधन सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में पद संभाला।
  • 2012: चीनी वैज्ञानिकों ने 97 किमी दूर फोटॉन टेलीपोर्ट कर क्वांटम टेलीपोर्टेशन का नया रिकॉर्ड बनाया।

भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1951: राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने नवनिर्मित सोमनाथ मंदिर का भव्य उद्घाटन किया।
  • 1995: परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का विस्तार हुआ, जिस पर भारत ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया।
  • 1998: 'ऑपरेशन शक्ति' के तहत भारत ने पोखरण में तीन सफल भूमिगत परमाणु परीक्षण किए।
  • 1998: इन परीक्षणों के साथ ही भारत दुनिया के सामने एक पूर्ण विकसित 'परमाणु संपन्न राष्ट्र' बना।
  • 2000: भारत की जनसंख्या आधिकारिक तौर पर एक अरब पहुंची; 'आस्था' बनी भारत की एक अरबवीं बच्ची।
  • राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस (National Technology Day): पोखरण परमाणु परीक्षण की याद में हर साल मनाया जाता है।

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