12 जून का इतिहास: इलाहाबाद हाई कोर्ट का एक फैसला, इसके बाद लगी इमरजेंसी
Allahabad High Court Verdict: यह कहानी भारतीय राजनीति के सबसे बड़े और सबसे नाटकीय मोड़ की है। इस घटना ने देश के पूरे इतिहास को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। साल 1971 में देश के अंदर पांचवें लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा था। उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपनी लोकप्रियता के चरम पर थीं।
इंदिरा गांधी ने इस चुनाव में रायबरेली लोकसभा सीट से अपना नामांकन दाखिल किया था। उनके सामने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के नेता राज नारायण चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव के नतीजे सामने आए तो इंदिरा गांधी ने बहुत बड़ी जीत हासिल की। उन्होंने राज नारायण को एक लाख से ज्यादा वोटों से हरा दिया था।
इस शानदार जीत से कांग्रेस खेमे में भारी जश्न का माहौल बन गया था। लेकिन विपक्ष के नेता राज नारायण इस हार को आसानी से मानने वाले नहीं थे। उन्हें पक्का भरोसा था कि इस चुनाव में कुछ न कुछ गड़बड़ी जरूर हुई है। उन्होंने इंदिरा गांधी की इस बड़ी जीत को अदालत में चुनौती देने का मन बनाया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में इंदिरा गांधी के खिलाफ याचिका
चुनाव खत्म होने के कुछ ही समय बाद राज नारायण सीधे कोर्ट पहुंच गए। उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में इंदिरा गांधी के खिलाफ एक याचिका दायर की। इस याचिका में उन्होंने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर कई बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए गलत तरीके अपनाए गए हैं।
राज नारायण का सबसे बड़ा आरोप सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को लेकर था। उनका कहना था कि सरकारी अधिकारियों का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदिरा गांधी के सचिव यशपाल कपूर ने सरकारी पद पर रहते हुए काम किया। उन्होंने पद से इस्तीफा दिए बिना ही प्रचार संभाला।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव में तय सीमा से कहीं ज्यादा पैसा खर्च किया गया। वोटर्स को लुभाने के लिए सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल हुआ। हाई कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार कर मामले की नियमित सुनवाई शुरू कर दी। यह केस भारतीय इतिहास का सबसे चर्चित मुकदमा बनने जा रहा था।
जब इंदिरा को गवाही देने के लिए खुद जाना पड़ा अदालत
इस मुकदमे की सुनवाई इलाहाबाद हाई कोर्ट में लगातार कई महीनों तक चलती रही। पूरे देश की नजरें इस केस के हर एक अपडेट पर टिकी हुई थीं। इस केस में सबसे बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ तब आया जब इंदिरा गांधी को कोर्ट बुलाया गया।
इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को अदालत में पेश होना था। तारीख थी 18 मार्च 1975 जब इंदिरा गांधी गवाही देने कोर्ट पहुंचीं। इलाहाबाद हाई कोर्ट के कमरा नंबर 24 में भारी सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। वहां मौजूद जज जगमोहन लाल सिन्हा के सामने प्रधानमंत्री को एक गवाह की कुर्सी पर बैठना पड़ा।
इंदिरा गांधी से लगातार करीब पांच घंटे तक तीखे सवाल पूछे गए। विपक्ष के वकील के. एन. सिंह ने इंदिरा गांधी से एक-एक कर कई सवाल किए। इंदिरा गांधी ने बहुत ही शांति और संयम के साथ सभी सवालों के जवाब दिए। देश के इतिहास में यह अपनी तरह की पहली और बेहद अनोखी घटना थी। इसने साफ कर दिया कि कानून की नजर में देश का प्रधानमंत्री भी आम नागरिक ही है।
12 जून 1975 की वो ऐतिहासिक सुबह
सभी गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। वह ऐतिहासिक दिन आया 12 जून 1975 का, जिसका सबको इंतजार था। सुबह के ठीक दस बजे इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जगमोहन लाल सिन्हा अपनी कुर्सी पर आकर बैठे।
कोर्ट रूम वकीलों और पत्रकारों से खचाखच भरा हुआ था। जज सिन्हा ने बहुत ही शांत आवाज में अपना ऐतिहासिक फैसला पढ़ना शुरू किया। उन्होंने इंदिरा गांधी को सरकारी मशीनरी के गलत इस्तेमाल का दोषी पाया।
अदालत ने साफ कहा कि इंदिरा गांधी का 1971 का चुनाव पूरी तरह अमान्य और रद्द किया जाता है। इस एक लाइन ने देश के सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया। इतना ही नहीं कोर्ट ने इंदिरा गांधी पर एक और बड़ा प्रतिबंध लगा दिया।
इंदिरा गांधी अगले छह साल तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ सकती थीं। इस फैसले का मतलब यह था कि उन्हें तुरंत प्रधानमंत्री का पद छोड़ना होगा। यह आजाद भारत का सबसे बड़ा और सबसे साहसिक अदालती फैसला था।
अदालती फैसले के बाद दिल्ली की हलचल
हाई कोर्ट का फैसला आते ही दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। कांग्रेस के बड़े नेताओं ने तुरंत प्रधानमंत्री आवास पर आपात बैठक बुलाई।
इंदिरा गांधी के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष सड़कों पर उतर आया। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में देश भर में बड़े-बड़े प्रदर्शन शुरू हो गए। इंदिरा गांधी ने इस फैसले के खिलाफ तुरंत देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इंदिरा ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। 24 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट के वेकेशन जज वी. आर. कृष्ण अय्यर ने इस पर सुनवाई की। उन्होंने इस मामले में एक बीच का रास्ता निकाला।
सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद पर बने रहने की इजाजत तो दे दी। लेकिन एक बहुत ही सख्त शर्त भी उनके सामने रख दी। कोर्ट ने कहा कि अपील पर अंतिम फैसला आने तक वे संसद की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकतीं। साथ ही वे संसद में वोट भी नहीं डाल पाएंगी।
देश में लगी इमरजेंसी
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने विपक्ष के हौसलों को और ज्यादा बुलंद कर दिया। जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल रैली की। उन्होंने इंदिरा गांधी से तुरंत इस्तीफा देने और देश भर में जेल भरो आंदोलन की घोषणा कर दी। सरकार पर चौतरफा दबाव बहुत ज्यादा बढ़ चुका था।
इस भारी राजनीतिक (Indira Gandhi) संकट से निकलने के लिए इंदिरा गांधी ने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने देश में आंतरिक अशांति का हवाला देना शुरू किया। 25 जून 1975 की आधी रात को देश के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने एक दस्तखत किए।
इस दस्तखत के साथ ही देश में इमरजेंसी लागू कर दी गई। अगली सुबह देश के लोगों ने रेडियो पर इंदिरा गांधी की आवाज सुनी। उन्होंने देश को बताया कि भाइयों और बहनों, राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है।
इसके बाद देश के सभी बड़े विपक्षी नेताओं को रातों-रात जेल में डाल दिया गया। अखबारों पर सेंसरशिप लगा दी गई और नागरिकों के मौलिक अधिकार छीन लिए गए। इस तरह इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले से शुरू हुई कानूनी लड़ाई आखिरकार देश की इमरजेंसी की मुख्य वजह बनी। यह इतिहास आज भी लोगों को हैरान करता है।
कुछ और दिलचस्प बातें
इलाहाबाद हाई कोर्ट(भारतीय राजनीति का इतिहास) के इस ऐतिहासिक फैसले में कुछ और भी बेहद महत्वपूर्ण और दिलचस्प बातें थीं। ये अक्सर आम चर्चाओं में छूट जाती हैं।
- Justice Sinha को मिला लालच और धमकी: फैसला सुनाने से पहले जज जगमोहन लाल सिन्हा को केस वापस लेने के लिए भारी राजनीतिक दबाव और रिश्वत तक का ऑफर दिया गया था। लेकिन उन्होंने न्याय की गरिमा को सर्वोपरि रखा और किसी के आगे नहीं झुके।
- Cow-Belt Politics का असर: यह आजाद भारत का पहला ऐसा मामला था जिसने यह साबित कर दिया कि देश की 'काऊ-बेल्ट' (उत्तर प्रदेश की राजनीति) पूरे देश की सत्ता की दिशा तय कर सकती है और एक अकेला सांसद भी पीएम की कुर्सी हिला सकता है।
- सिर्फ 2 आरोपों पर गिरी गाज: राज नारायण ने इंदिरा गांधी पर कुल 14 गंभीर आरोप लगाए थे। कोर्ट ने उनमें से 12 आरोपों को खारिज कर दिया था, लेकिन सिर्फ 2 तकनीकी आरोपों के साबित होने पर ही उनका पूरा चुनाव रद्द कर दिया।
- The Midnight Drama (आधी रात का ड्रामा): 25 जून की रात को जब इमरजेंसी के पेपर्स पर साइन होने थे, तब देश के राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद (इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला)सोने चले गए थे। उन्हें रात को जगाकर अध्यादेश पर दस्तखत कराए गए, जो भारतीय लोकतंत्र का सबसे नाटकीय पल था।
12 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 12 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 12 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं- हिंदी भाषा सम्मान होल्कर साम्राज्य
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1987: ब्रिटिश आम चुनावों में मार्गरेट थैचर ने तीसरी बार ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- 1998: परमाणु परीक्षण के कारण जी-8 देशों ने भारत और पाकिस्तान को कर्ज न देने का फैसला किया।
- 1999: पाकिस्तान ने अपने रक्षा बजट में 11% की बढ़ोतरी की और यूएन ने ईस्ट तिमोर मिशन को मंजूरी दी।
- 2001: भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई।
- 2002: स्वीडन से मैच ड्रा होने के कारण अर्जेंटीना की टीम फुटबॉल वर्ल्ड कप से बाहर हो गई।
- 2004: सवन्ना में जी-8 सम्मेलन खत्म हुआ और अमेरिकी राष्ट्रपति बुश ने उत्तर कोरिया से सीधी बातचीत का प्रस्ताव ठुकराया।
- 2007: कनाडा जीव विज्ञान ओलंपियाड के लिए 4 भारतीयों का चयन हुआ और ऑस्ट्रेलियाई स्कूलों में सिख छात्रों को कृपाण रखने की इजाजत मिली।
- 2008: दक्षिण एशियाई फुटबॉल महासंघ ने साल 2009 की छठी सैफ फुटबॉल चैंपियनशिप की मेजबानी भारत को सौंपी।
- 2008: मशहूर फिल्म डायरेक्टर मृणाल सेन को 10वें ओसियाना सिनेफैन फिल्म फेस्टिवल में सम्मानित किया गया।
- 2016: भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने दूसरी बार ऑस्ट्रेलियाई ओपन का खिताब जीता।
- 1915: कन्नड़ लेखक, नाटककार, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता सी. के. नागराज राव का जन्म हुआ।
- 1932: कोंकण रेलवे और दिल्ली मेट्रो का निर्माण करने वाले मशहूर सिविल इंजीनियर ई. श्रीधरन का जन्म हुआ।
- 1932: हिंदी, तमिल और मलयालम फिल्मों की जानी-मानी अभिनेत्री पद्मिनी का जन्म हुआ।
- 1932: प्रसिद्ध मराठी अभिनेत्री जयश्री तल्पड़े का जन्म हुआ।
- 1935: भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की मशहूर अभिनेत्री श्यामा का जन्म हुआ।
- 1947: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ बंडारू दत्तात्रेय का जन्म हुआ।
- 1949: छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध और लोकप्रिय भरतरी गायिका सुरुज बाई खांडे का जन्म हुआ।
- 1957: हिंदी की जानी-मानी समकालीन कथाकार और उपन्यासकार गीतांजलि श्री का जन्म हुआ।
- 1957: भारतीय जनता पार्टी के प्रसिद्ध नेता और राजनीतिज्ञ नरेंद्र सिंह तोमर का जन्म हुआ।
- 1972: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रसिद्ध जीवनी लिखने वाले लेखक श्री डी.जी तेंदुलकर का निधन हुआ।
- 1976: संस्कृत भाषा के प्रकांड विद्वान और महान दार्शनिक गोपीनाथ कविराज का निधन हुआ।
- 1981: भारत के भूतपूर्व और सातवें मुख्य न्यायाधीश (CJI) पी. बी. गजेन्द्रगडकर का निधन हुआ।
- 1986: बंगाली भाषा के विख्यात और सम्मानित साहित्यकार अमिय चक्रवर्ती का निधन हुआ।
- 1989: तुर्की के ओट्टोमन राजसी वंश की आखिरी शहजादी राजकुमारी निलोफर का निधन हुआ।
- 1999: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता जलगम वेन्गला राव का निधन हुआ।
- 2000: लोकप्रिय मराठी लेखक, नाटककार, अभिनेता और संगीतकार पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे का निधन हुआ।
- 2017: ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित और तेलुगु भाषा के प्रख्यात कवि सी. नारायण रेड्डी का निधन हुआ।
- विश्व बालश्रम निषेध दिवस: बाल मजदूरी को रोकने और जागरूकता फैलाने के लिए हर साल 12 जून को यह अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है।
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